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मानसून में देरी और सूखे की वजह बना हीट वेव:रतलाम समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश में 1.1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है औसत तापमान, वाराणसी के BHU में मौसम के 60 साल के आंकड़ों पर हुआ शोध

वाराणसीएक वर्ष पहले
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BHU में भारत-महामना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन क्लाइमेट चेंज रिसर्च के  प्रो. आर.के.  मल्ल के नेतृत्व में पीएचडी स्कॉलर सौम्या सिंह और निधि सिंह ने किया है अध्ययन। - Dainik Bhaskar
BHU में भारत-महामना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन क्लाइमेट चेंज रिसर्च के प्रो. आर.के. मल्ल के नेतृत्व में पीएचडी स्कॉलर सौम्या सिंह और निधि सिंह ने किया है अध्ययन।

पिछले 60 साल में पश्चिमी मध्य प्रदेश विशेषकर रतलाम वाले इलाके में औसत तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है। इससे जलवायु परिवर्तन के साथ ही इन क्षेत्रों में मानसून में देरी, बारिश में कमी, नदियों में पानी का घटना, जमीन का बंजर होना, कृषि पर हानिकारक प्रभाव और सूखे की समस्या विकराल होती जा रही है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भारत-महामना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के क्लाइमेट चेंज रिसर्च में हुए एक अध्ययन के बाद ये आंकड़े सामने आए हैं। BHU के प्रोफेसर आरके मल्ल के नेतृत्व में पीएचडी स्कॉलर सौम्या सिंह और निधि सिंह ने वर्ष 1951 से 2016 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है, जो जर्नल "इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी" में प्रकाशित हुआ है।

यूपी के जालौन और इटावा में तापमान बढ़ा
यह शोध बताता है कि एमपी के भिंड, मुरैना, ग्वालियर। यूपी के जालौन और इटावा। राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर, चुरू, पिथौरागढ़, सिरमौर, जैसलमेर। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, यवतमाल, अमरावती, चंद्रनगर, और आदिलाबाद में भी औसत तापमान में बढ़ोतरी देखी गई है।

BHU के भारत-महामना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन क्लाइमेट चेंज रिसर्च में शोध कार्य करते छात्र-छात्रा।
BHU के भारत-महामना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन क्लाइमेट चेंज रिसर्च में शोध कार्य करते छात्र-छात्रा।

बिहार और बंगाल में घटा है तापमान
तापमान में अंतर आने से इस शोध के अंतर्गत भारत में हीट वेव के 3 नए हॉट स्पॉट भी निर्धारित किए गए हैं। इनमें पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल और बिहार) , मध्य भारत (मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तरी महाराष्ट्र) और दक्षिण-मध्य (विदर्भ व आंध्रप्रदेश) वाला हिस्सा शामिल है। इस अध्ययन में सबसे खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल और बिहार वाले गंगा घाटी के इलाके में औसत तापमान में कमी देखी गई है। जबकि मध्य और दक्षिण मध्य भारत वाले इलाके में गर्म हवाओं का प्रभाव काफी हद तक बढ़ गया है। ये हॉटस्पॉट कई तरह के रोगों में इजाफा कर रहे हैं, जिससे इन क्षेत्रों की मृत्युदर भी बढ़ी है।

संस्थान में इसी सुपर कंप्यूटर से आंकड़ों की गणना की जाती है।
संस्थान में इसी सुपर कंप्यूटर से आंकड़ों की गणना की जाती है।

मार्च से जुलाई तक के तापमान पर हुआ शोध
प्रो. आर के मल्ल ने बताया कि पश्चिमी मध्य प्रदेश वाले इलाके में कई बार देखा गया है कि अधिकतम तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहता है। यहां पर कई बार सीवियर हीट वेव की स्थिति बन जाती है। इस अध्ययन में मार्च, अप्रैल, मई, जून और जुलाई में हर दिन आए औसत तापमान का आकलन किया गया है। हर 50 किलोमीटर का एक जोन बनाकर तापमान के आंकड़े जुटाए गए हैं। वहीं सबसे खास बात यह कि संस्थान में इन वृहद डाटा की गणना के लिए सुपर कंप्यूटर की भी मदद ली गई है। इस अध्ययन में जितेश्वर दधीच, सुनीता वर्मा, जेवी सिंह और अखिलेश गुप्ता भी शामिल रहे हैं।

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