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वाराणसी से मोजांबिक निर्यात हुए दो इंजन:बीएलडब्लू में बना 3000 एचपी का रेल इंजन मोजांबिक किया गया रवाना, मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा

वाराणसी4 महीने पहले
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वाराणसी से मोजांबिक भेजे गए दो रेल इंजन। - Dainik Bhaskar
वाराणसी से मोजांबिक भेजे गए दो रेल इंजन।

बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्लू) में बनाया गया 3000 एचपी का डीजल रेल इंजन बुधवार की दोपहर वाराणसी से मोजांबिक देश के लिए रवाना किया गया। तीन अन्य डीजल रेल इंजन भी जल्द ही तैयार कर मोजांबिक भेजे जाएंगे। गौरतलब है कि इससे पहले 2 डीजल रेल इंजन बीते मार्च महीने में मोजांबिक को निर्यात किए गए थे।

मोजांबिक से मिले 51.6 करोड़ के छह इंजन में ऑर्डर स्टेनलेस स्टील के यात्री डिब्बे हैं। यह इंजन बहुआयामी चालक डिस्प्ले युक्त कंसोल (दाईं तरफ से नियंत्रित) हैं। इनमें शोर, कंपन, थकावट रहित, आरामदायक सीट युक्त हैं।

साथ ही वातानुकूलित कैब, कपड़े के लिए आलमारी सहित ऑनबोर्ड वॉटर क्लोजेट और ऑनबोर्ड रेफ्रिजरेटर एवं हॉट प्लेट की सुविधा है। बीएलडब्लू प्रशासन का कहना है कि इस निर्यात से हमारी ही नहीं बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा।

20 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी रहे कोविड पॉजिटिव
बीएलडब्लू की महाप्रबंधक अंजली गोयल ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर में 20% से अधिक अधिकारी और कर्मचारी संक्रमित थे। इसके बावजूद उत्पादन का काम प्रभावित नहीं हुआ। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अप्रैल-मई में पिछले वर्ष 8 रेल इंजन बनाए गए थे। इस वर्ष 34 विद्युत रेल इंजन और मोजांबिक के लिए एक डीजल रेल इंजन बनाया गया। मोजांबिक के लिए एक अन्य रेल इंजन भी तैयार हो गया है और उसकी टेस्टिंग का काम किया जा रहा है।

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