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  • Both The Mini Gate And The Main Gate Of BHU Were Closed, The Hospital Staff Said That Now Action Should Be Taken Against The Students, Only Then The Traffic Will Start.

बिड़ला सी के छात्रों ने मेडिकल स्टाफ से की मारपीट:दोनों मिनी गेट व BHU का मुख्य द्वार किया बंद, अस्पताल के कर्मचारियों ने कहा वाराणसी पुलिस की कार्रवाई के बाद खोलेंगे गेट

वाराणसी20 दिन पहले
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BHU मुख्यद्वार को बंद अस्पताल के कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करते हुए। - Dainik Bhaskar
BHU मुख्यद्वार को बंद अस्पताल के कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करते हुए।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के 2 हॉस्टलों के बीच बवाल की आग बुझी नहीं कि दोबारा से एक बड़ी घटना सामने आ गई। BHU स्थित बिड़ला सी के छात्रों ने बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में गैस्ट्रो ओपीडी में ड्यूटी कर रहे एक कई मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट की। छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने पहले दबंगई दिखाते हुए बाउंसरों को धक्का दिया उसके बाद अंदर घुस कर सभी वार्ड ब्वाय और डॉक्टरों की जमकर पिटाई की।

BHU गेट बंद होने से परेशान छात्र और आमजन।
BHU गेट बंद होने से परेशान छात्र और आमजन।

इस घटना से क्षुब्ध होकर कारीब 150 वार्ड ब्वाय और मेडिकल स्टाफ BHU के मुख्य द्वार को बंद कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान गेट पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी पहले से ही मौजूद था।

गेट बंद होते ही पुलिस फोर्स गेट पर हालात को काबू करने में जुट गई। 2 दर्जन से अधिक पुलिस वालों के समझाने के बाद अब उन छात्रों को गिरफ्तार करने की तहरीर लंका थाने में दी गई है।

छात्रों और प्रोफेसरों का आवागमन बाधित

विरोध प्रदर्शन के कारण BHU मुख्य द्वार के साथ ही दोनों मिनी गेट बंद हो जाने से मरीजों, छात्रों, प्रोफेसरों और आसपास के लोगों का आवागमन बाधित हो चुका है। केवल एंबुलेंस को ही आने जाने दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियाें में कुछ लोग बाहर से भी थे, जिन्होंने मेडिकल स्टाफ के साथ मिलकर पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए।

पिस्टल सटाकर खींची चेन

एक मेडिकल स्टाफ राकेश पांडेय ने बताया कि वह अपने ससुर को दिखाने गया था। वहां 5-6 छात्रों ने आकर हमारे भाई को धक्का मारा। मारने के बाद हाथापाई हुआ। उसके बाद उन छात्रों ने हॉस्टल से कई दोस्तों को बुलाया और पिस्टल सटाकर चैन भी खींचे। यह सब आए दिन बीएचयू में हो रहा है। हॉस्टल में फर्जीगिरी करके अवैध छात्र रहते हैं, लेकिन प्रॉक्टोरियल बोर्ड उन्हें बचाने में लगा हुआ है। इन्होंने बताया कि इन छात्रों को चीफ प्रॉक्टर ऑफिस के अंदर रखा गया है, मगर मेडिकल स्टाफ को घुसने नहीं दिया जा रहा है।

इस तरह मारपीट के बाद कैंपस की स्थिति अब बेहद नाजुक हो गई है। अब कभी भी वाराणसी पुलिस बिड़ला सी को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए एक्शन ले सकती है। उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति का ही इंतजार है। बिड़ला सी में अभी भी 50 कमरों में अवैध छात्र रह रहे हैं।

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