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अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो:वाराणसी के एक परिवार में 30 साल बाद बेटी पैदा हुई तो मनाया जश्न, गंगा किनारे लगाए पौधे...अस्पताल से घर आने पर आरती उतार कर किया स्वागत

वाराणसी4 महीने पहले
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नवजात बच्ची घर आई तो उसकी आरती उतार कर फूलों से किया गया स्वागत। - Dainik Bhaskar
नवजात बच्ची घर आई तो उसकी आरती उतार कर फूलों से किया गया स्वागत।

वाराणसी के अखरी गांव में एक परिवार के यहां बुधवार को 30 साल बाद बेटी ने जन्म लिया तो लोग उत्सव में डूब गए। परिवार के लोगों ने गंगा किनारे जाकर शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर के समीप पीपल, बरगद, पाकड़, बेल और शमी के 5 पौधे लगाए। इसके बाद बिटिया जब अस्पताल से घर आई तो उसकी आरती उतार कर पूजापाठ कर स्वागत किया गया। बेटी पैदा होने पर परिवार की यह खुशी देखकर गांव के लोग भी सराहना करते नजर आए।

बेटी पैदा होने की खुशी में पौधरोपण करने जाते परिवार के सदस्य।
बेटी पैदा होने की खुशी में पौधरोपण करने जाते परिवार के सदस्य।

2016 में बेटी विदा हो गई तो पूरा घर सूना लगता था

अखरी निवासी कृपा शंकर पांडेय ने बताया कि वह 3 भाई हैं। तीनों भाइयों के 5 बेटे और सिर्फ 1 बेटी साधना है। साधना की साल 2016 में शादी हो गई तो पूरा घर सूना-सूना लगता था। उन्होंने बताया कि उनका बेटा मधुकर उर्फ अनुज बीएचयू में कार्यरत है। मधुकर की पत्नी आस्था ने बुधवार को बिटिया को जन्म दिया तो इसकी सूचना मिलते ही ऐसे लगा जैसे कि हमारे परिवार पर साक्षात लक्ष्मी की कृपा हुई है। बेटी पैदा होने की खुशी में परिवार और गांव के लोगों को घर बुलाकर भव्य भोज का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

बिटिया के आने से पहले ही हमने घर सजा दिया था

नवजात के चचेरे दादा अजय पांडेय ने बताया कि हमारा संयुक्त परिवार है। बिटिया के जन्म होने की सूचना मिली तो उसके आने से पहले हम सभी ने मिलकर घर को फूल और गुब्बारों से सजा दिया था। हमारे घर में बेटियां बेटों से कम नहीं आंकी जाती हैं। आज हमारा पूरा परिवार खुशी से झूम रहा है। बेटी जन्म ले तो सभी को इसी तरह से ही खुशी मनानी चाहिए। जमाना अब बदल गया है। बेटी और बेटा एकसमान हैं।

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