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सीवी रमन की जयंती...पढ़िए काशी से जुड़े 4 किस्से:BHU के प्रतिनिधि बनकर अमेरिका गए; कहा था- भारत को जानना है तो बनारस को देखो

वाराणसीएक महीने पहले

महान भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन की आज जयंती है। विज्ञान का नोबेल जीतने वाले पहले भारतीय रमन का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली में हुआ था। आसमान नीला क्यों है यह बताने वाले (रमन इफेक्ट की खोज) चंद्रशेखर वेंकटरमन (सीवी रमन) ​​​​काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में लाइफटाइम विजिटिंग प्रोफेसर रहे। उनका बनारस से जुड़ाव इतना ज्यादा था कि वह अपने विदेशी यात्राओं के व्याख्यान में भारत का परिचय बनारस से कराते थे। एक बार अमेरिका में आधुनिक और प्राचीन भारत पर बोलते हुए वह केवल बनारस का ही उदाहरण देते रहे।

ऐसे ही सीवी रमन के BHU से जुड़े किस्सों से दैनिक भास्कर आपको रुबरू करा रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय के पूर्व विशेष कार्याधिकारी डॉ. विश्वनाथ पांडेय से बातचीत की गई। पढ़िए सीवी रमन के 4 किस्से...

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व विशेष कार्याधिकारी डॉ. विश्वनाथ पांडेय।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व विशेष कार्याधिकारी डॉ. विश्वनाथ पांडेय।

किस्सा एक: BHU शिक्षा और संस्कृति को साथ लेकर चलता है
बात 1926 की है। BHU आए सीवी रमन ने कहा था कि विदेशों में भारत से दूर अंजान लोगों के बीच में मैं मन से कभी बनारस से दूर नहीं रह सका। इन्हीं गलियों और मालवीय जी के विशाल कैंपस में ही मन रमता है। जब-जब मुझसे कहा गया कि नए भारत के बारे में कुछ बोलो। तब-तब भारत को समझाने के लिए बनारस का ही नाम मुख पर आता था। एक ऐसा ऐतिहासिक स्थान जहां पर पवित्र गंगा बहती हैं, जो भारत की आत्मा है। हमारी संस्कृति का केंद्र है। रमन ने कहा कि मैं देख सकता हूं कि BHU शिक्षा और संस्कृति को साथ लेकर चलता है। भारत प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

BHU में डॉ. सीवी रमन के नाम से हॉस्टल बनाया गया है।
BHU में डॉ. सीवी रमन के नाम से हॉस्टल बनाया गया है।

किस्सा दो: बनारस की बुराई बर्दाश्त नहीं थी
डॉ. विश्वनाथ पांडेय ने बताया कि सीवी रमन BHU के स्थापना दिवस फरवरी, 1916 को भी आए थे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय का इतिहास भाग-1 पुस्तक के अनुसार महात्मा गांधी की बनारस के बारे में खरी-खोटी सुनने के बाद मंच पर लोगों को सीवी रमन को सुनने का मौका मिला। वह धारा प्रवाह बोलते हुए इस विश्वविद्यालय को आधुनिक विज्ञान और धर्मशास्त्र का प्रतीक बताया था। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के त्याग को देखते हुए रमन ने कहा कि इस तरह की पढ़ाई कराने वाला दुनिया का कोई विश्वविद्यालय नहीं है।

किस्सा तीन: BHU के प्रतिनिधि बनकर ऑक्सफोर्ड गए थे
सीवी रमन पहली बार 1921 में BHU के प्रतिनिधि बनकर ही ऑक्सफोर्ड गए। जब वह शिप से यात्रा कर रहे थे, तब उनके मन में आया कि समुद्र का रंग नीला क्यों होता है। तब तक लोग इसे आसमान का इफेक्ट मानते थे। यात्रा पूरी कर जब वह भारत लौट रहे थे तो उन्होंने स्पेक्ट्रोग्राफ रखा। रास्ते में पड़ने वाले ग्लेशियरों और पानी पर प्रकीर्णन कराकर कुछ डाटा कलेक्ट किए। जर्नल नेचर में एक लेख प्रकाशित कराने को भेजा। मगर 7 साल बाद 28 फरवरी को उनके इस खोज को दुनिया समझ पाई और 2 साल बाद 1930 में उन्हें फिजिक्स में नोबल से पुरस्कृत किया गया। आज इस खोज के ही दिन को भारत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।

किस्सा चार: 2 घंटे तक दिया धारा प्रवाह भाषण
1926 में BHU के दीक्षांत समारोह में सीवी रमन संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय के साथ करीब 2 घंटे तक धारा प्रवाह भाषण देते रहे। उन्होंने कहा कि हमने दुनिया भर के विश्वविद्यालय देखें मगर BHU उनमें सबसे विहंगम और राजसी सुख-सुविधाओं वाला है। यह देश के सांस्कृतिक केंद्र में बसा है, जो अपने आप में गौरव का एहसास कराता है। यहां के शानदार हॉस्टल, सड़कें और आवास भी पठन-पाठन के अनुरूप ही तैयार किए गए हैं। यह विश्वविद्यालय आधुनिक भारत के इतिहास में शिक्षा का एक आदर्श स्थापित कर रहा है।

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