अगले पैरालिंपिक में हमारा दबदबा देखिएगा:दीपा मलिक वाराणसी में बोलीं- 2016 में 4 मेडल मिले थे 2021 में 19 मिले; 4 वर्ष बाद हम और बेहतर करेंगे

वाराणसी10 दिन पहले
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2016 पैरालिंपिक की रजत पदक विजेता और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित दीपा मलिक ने गुरुवार को वाराणसी में कहा कि अगले पैरालिंपिक में अपने देश का दबदबा देखिएगा। उन्होंने कहा कि सोचिए 2016 में पैरालिंपिक हमारे देश के हिस्से में 4 मेडल आए थे। हम टोक्यो जा रहे थे तो हमने कहा था कि हम कम से कम 15 मेडल लेकर आएंगे। टोक्यो में हमने 4 मेडल को 19 पहुंचा दिया। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अब अगले 4 साल बाद होने वाले पैरालिंपिक में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन कैसा होगा।

प्रधानमंत्री दिव्यांग खिलाड़ियों से खुद कनेक्ट हुए

दीपा मलिक ने कहा कि जब मैं पैरालिंपिक का पहला मेडल लाई थी तो खुश भी हुई थी और असमंजस में भी थी। मुझे लगा कि ऐसा क्या था कि देश में किसी महिला को पैरालिंपिक मेडल लाने में इतना लंबा समय लग गया। फिर इसी से जुड़ कर मैं आगे बढ़ी और अब मैं पैरालिंपिक कमेटी ऑफ इंडिया की अध्यक्ष हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेल मंत्रालय ने पैरालिंपिक खिलाड़ियों को सुविधाएं दीं। प्रधानमंत्री खुद सभी दिव्यांग खिलाड़ियों से कनेक्ट हुए।

इसका असर यह हुआ कि 2016 में जहां 3 महिलाएं पैरालिंपिक में गई थी, इस बार 14 महिलाएं गईं। उनमें से 2 महिलाएं गोल्ड और सिल्वर मेडल लेकर लौटीं। टोटल देखा जाए तो 2016 के पैरालिंपिक में मात्र 19 खिलाड़ी गए थे, इस बार 54 खिलाड़ी गए और 19 मेडल लेकर आए। यह बदलते हुए भारत का सुंदर स्वरूप है।

भारतीय होने की जिम्मेदारी हमें निभानी होगी

दीपा मलिक ने कहा कि सरकार की मंशा बहुत स्पष्ट है और उसका असर भी दिख रहा है। नीतियां बिल्कुल सही हैं और उसमें भेदभाव की कोई जगह नहीं हैं। मानसिकता भी बदल रही है और हम नए भारत की ओर जा रहे हैं। दैनिक भास्कर के इस मंच से पूरे भारत के लिए एक अपील है कि हमें एक भारतीय होने के नाते स्वयं की जिम्मेदारी निभानी होगी।

दिव्यांग हों तो उन्हें अपने अंदर एक हुनर पैदा कर उसे विकसित करना होगा। भारत के निर्माण में एक सशक्त भूमिका निभानी होगी। सरकार जो कर रही है उसके अलावा हमें अपने स्तर से भी अपने लिए, अपने आसपास के लिए, समाज के लिए और राष्ट्र के लिए सार्थक प्रयास करना होगा।

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