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गंगा आरती पर विवाद:DM ने कहा- घाट स्थायी रूप से सार्वजनिक सम्पत्ति है और इसका स्वामित्व राज्य सरकार का है, सभी आरतियों का रजिस्ट्रेशन नगर निगम द्वारा होगा

वाराणसी14 दिन पहले
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वर्तमान में जितनी आरतियाॅं गंगा नदी के घाटों पर 17 फरवरी की सायंकाल तक हुई थी, उनका रिकार्ड बनवा कर आगामी एक माह में उनका रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। - Dainik Bhaskar
वर्तमान में जितनी आरतियाॅं गंगा नदी के घाटों पर 17 फरवरी की सायंकाल तक हुई थी, उनका रिकार्ड बनवा कर आगामी एक माह में उनका रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा।
  • वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र में स्वामित्व होने की वजह से गंगा घाटों का प्रबंधन नगर निगम के पास है
  • आरती के लिये स्थान का आवंटन भी नगर निगम के द्वारा एक-एक वर्ष के लिए किया जायेगा

काशी के अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस संस्था की ओर से मंगलवार को संध्या आरती शुरू की गयी है। इसके लेकर पुरोहितों और स्थानीय लोगो ने विरोध शुरू कर दिया था। उनका आरोप है कि जब पहले से आरती होती आ रही है, तो नया क्यों शुरू किया गया। गुरुवार को DM कौशल राज शर्मा ने पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा है कि गंगा नदी के किनारे के सार्वजनिक घाट स्थायी रूप से सार्वजनिक सम्पत्ति है। इसका स्वामित्व राज्य सरकार का है। सभी आरतियों के रजिस्ट्रेशन के लिए नगर निगम को निर्देशित किया गया हैं।

घाटों के प्रबंधन और रख रखाव का जिम्मा नगर निगम के पास हैं

DM कौशल राज शर्मा ने बताया कि कभी-कभी यह देखने में आता है कि कुछ लोग इन घाटों पर आरती को लेकर विवाद करते हैं। कुछ लोग नई आरती प्रारम्भ करते हैं। इस बारे में नगर निगम को बिल्कुल स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए कि जितनी भी आरतियां घाटों पर होती है, उनका रजिस्ट्रेशन नगर निगम के द्वारा किया जाये। उन्हें स्थान का आवंटन भी नगर निगम के द्वारा एक-एक वर्ष के लिए किया जाना चाहिए तथा इसका नवीनीकरण प्रत्येक वर्ष किया जाना चाहिए।

बिना परमिशन के कोई भी आरती अब घाटों पर नहीं होगी

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किसी भी घाट पर किसी भी निजी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा भविष्य में कोई भी आरती बिना नगर निगम की अनुमति के न किया जाये। यह भी चेक किया जाये कि एक ही संस्था या व्यक्तियों का समूह एक से अधिक घाटों पर आरती न करें। जिनका भी रजिस्ट्रेशन हो उनका LIU के आवश्यक जांच पूरी कराते हुए उनके नवीनीकरण पर निर्णय लिया जाये।

नगर निगम अन्तर्गत घाटों हेतु एक नोडल अधिकारी भी नामित करें

वर्तमान में जितनी आरतियां गंगा नदी के घाटों पर 17 फरवरी की सायंकाल तक हुई थी, उनका रिकार्ड बनवाया जाये तथा आगामी एक माह में उनका रजिस्ट्रेशन कराया जाये। रजिस्ट्रेशन हेतु एक प्रपत्र भी नगर निगम की तरफ से डिजाईन करके जारी किया जाये। 31 मार्च तक यह कार्य पूर्ण किया जाये। प्रत्येक वित्तीय वर्ष हेतु जो भी संस्था/व्यक्ति घाटों पर आरती किये जाने हेतु आवेदन करें अथवा नवीनीकरण कराएं।

आरती के नाम पर घाटों का अतिक्रमण न हो

31 मार्च के उपरान्त केवल वे ही व्यक्ति/संस्था घाटों पर आरती कर सकेंगे जिनका रजिस्ट्रेशन नगर निगम के द्वारा किया गया होगा। रजिस्ट्रेशन करते समय घाट पर आरती हेतु प्रयोग किया जाने वाला स्थान, आरती किये जाने वाले व्यक्तियों की संख्या आदि का उल्लेख भी रजिस्ट्रेशन फार्म में किया जाये। ताकि कोई भी व्यक्ति/संस्था आरती करने के नाम पर घाटों पर अतिक्रमण न करें।

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