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वाराणसी गंगा महासभा की मांग:कोरोना महामारी के दौरान गंगा किनारे शव देख चिंतित हुए जितेंद्रानंद सरस्वती; केंद्रीय जलशक्ति मंत्री को पत्र लिखकर कहा- दोनों किनारों पर बनाए जाएं शवदाह गृह

वाराणसी10 दिन पहले
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गंगा के दोनों ओर प्रदूषण से मुक्त विद्युत शवदाह गृह बनाए जाने की मांग को लेकर जितेंद्रानंद सरस्वती ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को पत्र लिखा है। - Dainik Bhaskar
गंगा के दोनों ओर प्रदूषण से मुक्त विद्युत शवदाह गृह बनाए जाने की मांग को लेकर जितेंद्रानंद सरस्वती ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को पत्र लिखा है।

भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित गंगा महासभा ने केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मांग की है कि वह गंगा के दोनों ओर प्रदूषण से मुक्त विद्युत शवदाह गृह बनवाएं। यह शवदाह गृह ऐसी जगह हों जहां किसी भी मौसम में लोग आसानी से आ-जा सकें। इस संबंध में गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री को पत्र लिखा है।

कोरोना महामारी के दौरान गंगा किनारे शव देख हुए चिंतित

स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान गंगा किनारे शवों का बड़ी मात्रा में पाया जाना चर्चा का विषय रहा। सगे-संबंधियों द्वारा परिजनों के शव की अंत्येष्टि न कर उसे गंगा में बहा देना मानवीय रिश्तों को तार-तार करता दिखा। शवों को जलाए जाने वाली लकड़ी के काम में बड़े-बड़े माफिया लगे हैं।

पत्र के माध्यम से आग्रह किया है कि वह नहीं चाहते हैं कि परंपरागत श्मशान स्थल पर विद्युत शवदाह गृह बनें। इसलिए परंपरागत श्मशान स्थल से इतर गंगा के दोनों छोर पर विद्युत शवदाह गृह बनाए जाएं। यह शवदाह गृह ऐसे हों कि लोग बिना किसी की मदद के सीधे शव को भट्ठी पर ही उतारें। इस कवायद से शव की अंत्येष्टि के दौरान लोगों की भीड़, श्रम, समय और धन की बचत होगी।

प्राकृतिक आपदा में नष्ट हुए मठ-मंदिरों को क्षतिपूर्ति दिलाएं गृह मंत्री

गंगा महासभा और अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखा है। कहा है कि हाल ही में आए चक्रवाती तूफानों के कारण समुद्र तटीय इलाकों में मठ-मंदिरों को काफी नुकसान हुआ है।

उड़ीसा के राज्यपाल को क्षतिपूर्ति के लिए ज्ञापन दिया गया तो राजभवन से बताया गया कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं अगर मस्जिद या चर्च का मामला होता तो तत्काल सरकारी आर्थिक मदद मिल जाती। इसलिए गृह मंत्री से यह अनुरोध है कि वह चक्रवाती तूफान के दौरान क्षतिग्रस्त हुए मठ और मंदिरों की क्षति का आंकलन कर क्षतिपूर्ति दिलाएं।

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