सरसों में काशी के किसानों ने राजस्थान को छोड़ा पीछे:किसान एक हेक्टेयर में उगा रहे 32 कुंतल सरसों; राष्ट्रीय औसत 17 कुंतल का

वाराणसी16 दिन पहले
BHU के एग्रीकल्चर फॉर्म में कृषि वैज्ञानिक और रिसर्चर। यहां पर गिरिराज सरसों की प्रजाति लगाई गई है। यह रिसर्च कार्य में ही इस्तेमाल होती है।

काशी के किसान अब सरसों की खेती में राजस्थान के किसानों से भी आगे निकल गए हैं। यहां पर 10-12 किसान BHU और सरसों निदेशालय में विकसित प्रजाति की बुवाई कर रहे हैं। उनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 32 कुंतल है। वहीं, भारत का औसत 17 कुंतल प्रति टन और राजस्थान में 26-28 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक सरसों का उत्पादन है। ये बातें आज सरसों अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर के निदेशक प्रो. पीके राय ने आज दैनिक भास्कर को बताईं।

प्रो. राय BHU स्थित कृषि विज्ञान संस्थान में आयोजित वैज्ञानिक-किसान संगोष्ठी में हिस्सा लेने आए थे। उन्होंने कहा कि अब हमें सरसों का आयात बंद कर हाई क्वालिटी के बीजों की वैज्ञानिक ढंग से बुवाई करनी चाहिए। वाराणसी जैसा जिला सरसों के उत्पादन में मानक बन सकता है।

BHU के प्रो. कार्तिकेय श्रीवास्तव और उनकी टीम द्वारा सरसों पर किए जा रहे रिसर्च पर उन्होंने कहा, ''वाराणसी के रामबलि, नकहरा और नारायणपुर इलाकों में ऐसा देखने को मिला है एक हेक्टेयर जमीन पर 32 कुंतल सरसों की पैदावार किसान ले रहे हैं। यह आश्चर्यजनक है। यूपी सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।''

BHU के कृषि विज्ञान संस्थान स्थित एग्रीकल्चर फार्म। यहां पर वैज्ञानिक ढंग से की गई खेती की वजह से सरसों की उपज 35 कुंतल प्रति हेक्टेयर से ज्यादा है।
BHU के कृषि विज्ञान संस्थान स्थित एग्रीकल्चर फार्म। यहां पर वैज्ञानिक ढंग से की गई खेती की वजह से सरसों की उपज 35 कुंतल प्रति हेक्टेयर से ज्यादा है।

हम इंडोनेशिया से मंगाते हैं खाने का तेल
प्रो. राय ने कहा कि भारत में सरसों के तेल का आयात हम इंडोनेशिया और मलेशिया से करते हैं। यदि सरसों की नई प्रजातियों पर काम करें, तो बेवजह आयात पर रोक लगा सकते हैं। सरसों के तेल और इससे बनने वाले खाद्य पदार्थों का बाजार तैयार हो रहा है। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरसों काफी कारगर फसल है। वाराणसी, चंदौली और गाजीपुर के आसपास की मिट्टी, जलवायु और जमीन राई सरसों के लिए काफी बेहतर है।

गेहूं और सरसो की खेती में कौन है ज्यादा फायदेमंद?
सरसों की फसल में प्रति हेक्टेयर 5 किलो उर्वरक, जो वहीं गेहूं में 60 किलो प्रति हेक्टेयर की जरूरत पड़ती है। सरसों के पकने तक केवल दो सिंचाई की जरूरत होती है। वहीं, गेहूं को तीन। एक कुंतल सरसों 8500 रुपए और, जबकि गेहूं का दाम 1975 रुपए ही किसानों को मिलता है।

ये फोटो प्रो. पीके राय की है। वह सरसों अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर, राजस्थान में निदेशक के पद पर तैनात हैं।
ये फोटो प्रो. पीके राय की है। वह सरसों अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर, राजस्थान में निदेशक के पद पर तैनात हैं।

37 साल पहले सरसों उत्पादन में यूपी नंबर-1 था
प्रो. राय ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के बाद वेस्ट यूपी में भी किसानों की आय में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। यहां के किसान एमएसपी पर ही आधारित थे। 1984-85 में यूपी सरसों उत्पादन में नंबर 1 पर था। उसके बाद से सरसों को लेकर कोई पॉलिसी भी नहीं आई है।

सरसों के किसानों की हालत काफी खराब थी। पिछली सरकारों ने इंपोर्ट ड्यूटी जीरो कर रखा था। लिहाजा, विदेशों से आयतित तेल ही भारत के लोग खाते थे। अब सरकार ने आयात कर लगाया है, जिससे किसान प्रोत्साहित हो रहे हैं।

खबरें और भी हैं...