वोटिंग से पहले आया नेहा सिंह का नया गाना:किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा, बोलीं- फसलों को नहीं मिलता है यूपी में दाम

वाराणसी9 महीने पहले

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 'यूपी में का बा' गाने से सुर्खियों में रहीं लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने शनिवार की सुबह अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर 4 मिनट 19 सेकेंड का नया गाना पोस्ट किया। नेहा का यह गाना किसानों की हाड़तोड़ मेहनत पर आधारित है। उन्होंने इस गाने का शीर्षक रखा है भादो-आषाढ़ चाहे जेठ के घाम केहू बूझे नाहीं हो। गाने के माध्यम से उन्होंने बताया है कि किसान साल के बारहों महीने काम करता है। घर छोड़ कर ज्यादातर समय खेत पर ही बिताता है। इसके बाद भी किसान को उसकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पाता है। मंत्री-विधायक सिर्फ अपना हित साधने में लगे रहते हैं और जब उनसे कोई काम कहा जाता है तो उसे न सुनने के साथ ही वह चुप्पी भी साध लेते हैं।

लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने पांचवें चरण के मतदान से पहले अपना एक और गाना लांच किया है।
लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने पांचवें चरण के मतदान से पहले अपना एक और गाना लांच किया है।

यह है नेहा का नया गाना

भादो-आषाढ़ चाहे जेठ के घाम केहू बूझे नाहीं हो...। बारहों महीना नाहीं करे आराम केहू बूझे नाहीं...। खेतवा में रोपनी किसनवा करेला हो...। खून-पसीना से माटी के सींचेला हो...। बद से बद करबा बिजली-पानी के झाम केहू बूझे नाहीं...। बारहों महीना नाहीं करे आराम केहू बूझे नाही...। घरवा-दुआर छोड़ सीवाने में सुतेला हो...। सुते-उठे, उठे-सुते रात भर जागेला हो...।

घरवा-दुआर छोड़ सीवाने में सुतेला हो...। फसल के मिले नाहीं उचित दाम केहू पूछे नाहीं...। बारहों महीना नाहीं करे आराम केहू बूझे नाहीं...। मंत्री-विधायक, नेता डीलिंग मारेले हों...। कुर्सी पे बैठ के कुर्सी तोड़ेले हो...। गूंग-बहिर होई जाबें जब पड़े काम केहू बूझे नाहीं...। बारहों महीना नाहीं करे आराम केहू बूझे नाही...। भादो-आषाढ़ चाहे जेठ के घाम केहू बूझे नाहीं हो...।

गानों से लगातार थीं हमलावर
नेहा सिंह राठौर 'यूपी में का बा' पार्ट-1, पार्ट-2 और पार्ट-3 से बीते दिनों उत्तर प्रदेश सरकार पर लगातार हमलावर रही थीं। इन गानों को लेकर सोशल मीडिया पर अन्य लोक गायकों से उनकी भिड़ंत भी चर्चा का विषय रही और सरकार के पक्ष-विपक्ष में एक से बढ़ कर एक गाने लोगों को सुनने को मिले। नेहा कहती हैं कि वह लोक गायिका हैं, इसलिए जन समस्याओं को आवाज देना उनका काम है। वह किसी एक दल के समर्थन और किसी अन्य दल के विरोध के लिए नहीं गाती हैं।

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