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विश्व हिंदू सेना अध्यक्ष के खिलाफ धोखाधड़ी का केस:अरुण पाठक पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 4.63 लाख हड़पने का आरोप

वाराणसी4 महीने पहले
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वाराणसी की जिला जेल में बंद विश्व हिंदू सेना के अध्यक्ष अरुण पाठक की मुसीबतें बढ़ने लगी हैं। अरुण पाठक के खिलाफ भेलूपुर थाने में धोखाधड़ी और धमकाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एलएलबी के स्टूडेंट कौस्तुभ त्रिपाठी की तहरीर पर की गई है। भेलूपुर थाने की पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

BHU में पढ़ाई के दौरान हुई थी मुलाकात
कौस्तुभ त्रिपाठी ने बताया, " मैं बीएचयू से ग्रेजुएशन कर रहा था। गरीब किसान का बेटा होने के कारण पैसे की जरूरत थी। इस वजह से शिव सेना के उत्तर प्रदेश के तत्कालीन प्रधान महासचिव अरुण पाठक के यहां 15 हजार रुपए प्रति माह पर पार्ट टाइम नौकरी शुरू कर दी।"

उसने आगे कहा "लगभग दो साल तक अरुण पाठक के यहां नौकरी की। मेरी तनख्वाह 3 लाख 60 हजार रुपए बनी। अरुण पाठक ने यह कहते हुए कभी पैसा नहीं दिया कि तुम्हारी तनख्वाह सहेज कर रखा है। यह तुम्हारी सरकारी नौकरी के काम आएगा।"

यह फोटो बीती 8 अगस्त की अस्सी घाट की है। अरुण पाठक को अस्सी घाट से भेलूपुर थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था।
यह फोटो बीती 8 अगस्त की अस्सी घाट की है। अरुण पाठक को अस्सी घाट से भेलूपुर थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था।

5 लाख रुपए की फिर मांग की
कौस्तुभ त्रिपाठी ने बताया, "जुलाई 2017 में अरुण पाठक ने उससे कहा कि ग्राम विकास अधिकारी की वैकेंसी निकली है। तुम्हारा पैसा मेरे पास है, बस एक लाख रुपए की व्यवस्था कर लो। सरकारी नौकरी का मामला था इसलिए मैंने एक लाख तीन हजार रुपए का इंतजाम कर अरुण पाठक को दे दिए।"

इसके बाद अरुण पाठक ने कहा कि इस नौकरी में सेटिंग नहीं हो पाई है। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा से बात कर रेलवे में नौकरी लगवा दूंगा। इसके साथ ही 5 लाख रुपए की फिर मांग की। उसके बाद से आज तक न नौकरी लगी और न अरुण पाठक पैसा लौटाया। पैसा मांगने पर अरुण पाठक ने बीते दिनों जान से मारने की धमकी भी दी गई।

8 अगस्त को किया गया था गिरफ्तार
अरुण पाठक को बीती 8 अगस्त को अस्सी घाट से पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अरुण पाठक ने घोषणा की थी कि वह मां शृंगार गौरी मंदिर में जाकर जलाभिषेक करेगा। पुलिस की ओर से कहा गया था कि अरुण पाठक ने ज्ञानवापी को लेकर कई विवादित बयान सोशल मीडिया पर जारी किए थे। इसलिए उसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।