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कायाकल्प ने बदली सरकारी स्कूलों की छवि:अभिभावकों को भा रहे तकनीकी रूप से स्मार्ट हो रहे वाराणसी के सरकारी स्कूल, 17565 ने कान्वेंट से नाम कटवाकर लिया दाखिला, शिक्षकों में खुशी

वाराणसी15 दिन पहले
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वाराणसी के सरकारी स्कूल में एलईडी स्क्रीन पर चल रही कक्षा। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के सरकारी स्कूल में एलईडी स्क्रीन पर चल रही कक्षा।

वाराणसी में सरकारी स्कूलों की छवि अब बदलने लगी है। इस सत्र में 17565 छात्रों ने कॉन्वेंट स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में एडमिशन ले लिया है। जिले में ऐसा पहली बार हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्र बेसिक स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। वाराणसी के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि सरकारी स्कूलों को तकनीकी रूप से अत्याधुनिक बनाया जा रहा है।

वाराणसी के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाते शिक्षक।
वाराणसी के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाते शिक्षक।

अंग्रेजी माध्यम के सरकारी शिक्षकों की बढ़ी नियुक्तियां

राकेश सिंह ने बताया कि इस तब्दीली से सरकारी स्कूलों के शिक्षक काफी उत्साहित हैं। उन्होंने इसके पीछे मुख्य वजह विद्यालयों में चल रही प्रदेश सरकार की कायाकल्प योजना को बताया है। अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूलों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं अंग्रेजी माध्यम सहित ज्यादातर शिक्षक जो विगत 2-3 साल में नियुक्त हुए हैं, उनकी वजह से भी यह सकारात्मक परिणाम देखने को मिला। कहा कि अब परिजनों का विश्वास और उत्साह बढ़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई नई नियुक्तियों से अब सरकारी स्कूलों का आधार मजबूत हो रहा है। योगी सरकार वाराणसी के परिषदीय स्कूलों में हर तरह की प्राइवेट स्कूलों जैसी बुनियादी और अत्याधुनिक सुविधाएं निजी स्कूल से कई गुना कम फीस पर सुनिश्चित करा रही है।

काशी विद्यापीठ ब्लॉक स्थित पी एस केशरीपुर खास स्कूल।
काशी विद्यापीठ ब्लॉक स्थित पी एस केशरीपुर खास स्कूल।

सरकारी शिक्षक चला रहे मोहल्ला पाठशाला

माॅडल इंग्लिश प्राइमरी स्कूल, मंडुवाडीह की अध्यापिका नीलम राय के अनुसार स्कूलों की कायाकल्प योजना में बच्चों को विद्यालय में अच्छा परिवेश मिल रहा है। अच्छा फर्नीचर, स्मार्ट क्लास, प्रोजेक्टर ,बाला पेंटिंग ,गतिविधि आधारित शिक्षा, शौचालय ,रनिंग वाटर ,ऐप आधारित शिक्षा अभिभावकों को सरकारी स्कूलों के द्वार तक खींच के ला रहा है।

वाराणसी के एक परिषदीय स्कूल में कक्षा लेती शिक्षिका।
वाराणसी के एक परिषदीय स्कूल में कक्षा लेती शिक्षिका।

प्राथमिक स्कूल केशरीपुर खास के सहायक अध्यापक राजीव कुमार का कहना है कि जब निजी स्कूल ऑनलाइन क्लास चला रहे थे, तो ऐसे में तब परिषदीय स्कूल के शिक्षक मोहल्ला पाठशाला चलाकर गांव-कस्बे में जाकर बच्चों को शिक्षा दे रहे थे।

मंडुआडीह स्थित मॉडल इंग्लिश प्राइवेट स्कूल।
मंडुआडीह स्थित मॉडल इंग्लिश प्राइवेट स्कूल।

सरकारी स्कूलों में ये बदलाव आए हैं

  • वाराणसी के अधिकतर सरकारी स्कूलों के क्लास को स्मार्ट बना दिया गया है।
  • अंग्रेजी मीडियम के स्कूलाें की संख्या बढ़ाई गई।
  • अंग्रेजी के शिक्षकाें की बड़ी संख्या में नियुक्तियां की गईं हैं।
  • सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क एडमिशन से कान्वेंट स्कूलों को मोटी फीस चुकाने से मुक्ति।
  • परिषदीय स्कूलाें में दाखिला से लेकर कॉपी, किताब, यूनिफाॅर्म और जूते सब कुछ मुफ्त में मिलते हैं।
  • गुणवत्तापूर्ण मिड डे मील में आवश्यकतानुसार भोजन।
  • ऐप के कारण तकनीकी रूप से सरकारी स्कूल के बच्चे एडवांस हो रहे हैं।
  • कॉन्वेंट स्कूल के महंगे ऐप के बजाय परिषदीय स्कूलों के ऐप प्रेरणा, दीक्षा और रीड एलॉन्ग की लोकप्रियता बढ़ रही है। इन ऐप के माध्यम से बच्चों को तकनीकी रूप से भी एडवांस किया जा रहा है
  • इंटरनेट की सुविधा से दुरूह सवालों को आसानी से समझाया जाता है।
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