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ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई अब 2 नवंबर को:पार्टी बनने के लिए दी गई सभी एप्लिकेशन खारिज; मसाजिद कमेटी पर 100 रुपए का जुर्माना लगा

वाराणसीएक महीने पहले
मां श्रृंगार गौरी केस में पार्टी बनने के लिए दी गई 5 एप्लिकेशन को बीती 17 अक्टूबर को सुनवाई के बाद जिला जज की कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई आज वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने मां श्रृंगार गौरी केस में पार्टी बनने के लिए दी गई सभी एप्लिकेशन को खारिज कर दिया। इसके अलावा ज्ञानवापी परिसर में कमीशन की कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए वादी हिंदू पक्ष की मांग पर कोर्ट ने सुनवाई की।

वादी पक्ष की मांग पर प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के एडवोकेट के द्वारा आपत्ति न दाखिल करके समय मांगा गया। इस पर कोर्ट ने 100 रुपए का जुर्माना लगाया। इसके साथ ही केस की सुनवाई की अगली डेट 2 नवंबर फिक्स कर दी।

ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में पत्थर की यह संरचना मिली है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह शिवलिंग है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह खराब पड़ा पुराना फव्वारा है।
ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में पत्थर की यह संरचना मिली है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह शिवलिंग है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह खराब पड़ा पुराना फव्वारा है।

17 अक्टूबर को 5 एप्लिकेशन हुई थी खारिज

मां श्रृंगार गौरी केस में पार्टी बनने के लिए दी गई 5 एप्लिकेशन को बीती 17 अक्टूबर को सुनवाई के बाद जिला जज की कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि इस मामले में पहले से समर्थ लोग पक्षकार हैं। वादी को बाध्य नहीं किया जा सकता है कि वह किसी अन्य को पक्षकार बनाए।

शेष 4 अन्य एप्लिकेशन पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना ऑर्डर 21 अक्टूबर के लिए सुरक्षित रख लिया था। आज कोर्ट ने कहा कि वादिनी 5 महिलाओं के अलावा इस केस में किसी अन्य के पार्टी बनने की कोई जरूरत नहीं है।

इसके अलावा वादिनी महिलाओं ने ज्ञानवापी में मिले कथित शिवलिंग की पूर्वी दीवार और नंदी के मुंह के सामने वाले तहखाने की उत्तरी दीवार को हटाकर कमीशन की कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग की। साथ ही, ज्ञानवापी में बैरिकेडिंग की पश्चिमी दीवार के बंद दरवाजे को तोड़ कर एडवोकेट कमिश्नर को कमीशन की कार्रवाई करने का आदेश देने की मांग कोर्ट से की।

इस मांग पर भी सुनवाई के लिए कोर्ट ने 21 अक्टूबर की डेट फिक्स की थी। वादिनी महिलाओं की मांग पर आपत्ति पेश करने की बारी आई तो मसाजिद कमेटी की ओर से उनके सीनियर एडवोकेट पेश नहीं हुए और समय मांगा गया। वादिनी महिलाओं की ओर से कहा गया कि हमने बीती 17 मई को ही यह एप्लिकेशन दी थी।

इस पर कोर्ट ने मसाजिद कमेटी पर 100 रुपए का जुर्माना लगाते हुए सुनवाई की अगली डेट 2 नवंबर नियत कर दी। वहीं, वादिनी राखी सिंह द्वारा दाखिल एप्लिकेशन पर भी कोर्ट 2 नवंबर को सुनवाई करेगी। इस एप्लिकेशन के माध्यम से कारमाइकल लाइब्रेरी में मिली गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति को संरक्षित करने की मांग की गई है।

ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस साल भर पहले 5 महिलाओं ने दाखिल किया था।
ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी केस साल भर पहले 5 महिलाओं ने दाखिल किया था।

एक साल पहले दाखिल हुआ था केस

अगस्त 2021 में विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन के नेतृत्व में दिल्ली की राखी सिंह और वाराणसी की सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक व लक्ष्मी देवी ने सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया था।

पांचों महिलाओं ने मांग की थी कि ज्ञानवापी परिसर स्थित मां शृंगार गौरी के मंदिर में नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति मिले। इसके साथ ही ज्ञानवापी परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा के लिए मुकम्मल इंतजाम हो। कोर्ट ने मौके की स्थिति जानने के लिए कमीशन गठित करते हुए अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त करने और 3 दिन के अंदर पैरवी का आदेश दिया था।

इसके विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी का कहना था कि मां श्रृंगार गौरी केस सुनवाई के योग्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के क्रम में वाराणसी के जिला जज की कोर्ट ने आदेश दिया कि मां श्रृंगार गौरी केस सुनवाई योग्य है।

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