पूर्व छात्र के बेटे ने IIT-BHU को दिए 7.76 करोड़:संस्थान की मुख्य लाइब्रेरी होगी श्रीनिवास पांडे के नाम; 1948 में किया था BSc

वाराणसी4 महीने पहले
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श्रीनिवास देशपांडे (कुर्सी पर) साथ में उनके बेटे देश देशपांडे और उनकी पत्‍नी जयश्री देशपांडे। - Dainik Bhaskar
श्रीनिवास देशपांडे (कुर्सी पर) साथ में उनके बेटे देश देशपांडे और उनकी पत्‍नी जयश्री देशपांडे।

IIT-BHU के पूर्व छात्र के बेटे ने संस्थान को 1 मिलियन डॉलर यानी कि 7 करोड़ 76 लाख 30 हजार रुपए दान में दिए। अब IIT-BHU ने फैसला लिया है कि संस्‍थान का मुख्य पुस्तकालय श्रीनिवास देशपांडे के नाम पर होगा। देश पांडे 1948 बैच के पुरा छात्र रहे हैं। उनके बेटे देश देशपांडे और पत्नी जयश्री देशपांडे द्वारा यह धनराशि IIT-BHU फाउंडेशन को दी गई। वे दोनों USA के ही बोस्टन में रहते हैं। वहीं IIT-BHU फाउंडेशन यूएस बेस्ड एक स्वयं सेवी और गैर-लाभकारी संस्था हैं। पुस्तकालय नामकरण समारोह 24 जून को होगा। समारोह का प्रसारण ऑनलाइन मीडियम से किया जाएगा, जिसे IIT-BHU फाउंडेशन के सोशल मीडिया हैंडल पर भी देखा जा सकता है।

IIT-BHU की मुख्य लाइब्रेरी।
IIT-BHU की मुख्य लाइब्रेरी।

एक नजर में श्रीनिवास की प्रोफाइल
श्रीनिवास देशपांडे का जन्म 2 मार्च, 1925 को हुआ था। साल 1948 में इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री से फर्स्ट डिविजन से BSc पूरा किया। इसके बाद 31 साल तक वह पब्लिक सेक्टर में कार्यरत रहे। वहीं, 1980 में वह संयुक्त श्रम आयुक्त के पद पर कर्नाटक सरकार से रिटायर हुए । इसके बाद उन्होंने हुबली में चिन्मय मिशन के अध्यक्ष, शरीफ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों के लिए देशपांडे काफी प्रेरणा के स्रोत रहे हैं।

IIT-BHU की मुख्य लाइब्रेरी के अंदर का दृश्य।
IIT-BHU की मुख्य लाइब्रेरी के अंदर का दृश्य।

संयोग से पिता आ गए BHU
बेटे देश देशपांडे ने कहा कि बीएचयू के प्राचार्य डॉ. गोडबोले के साथ एक संयोगवश मुलाकात ने मेरे पिता को इस विश्वविद्यालय में शिक्षा के लिए प्रेरित किया। इस विश्‍वविद्यालय ने उनका और हमारे परिवार का जीवन बदल दिया। हमें उम्मीद है कि इस विनम्र उपहार का भविष्य में पुस्तकालय के सैकड़ों लोगों के जीवन पर समान प्रभाव पड़ेगा। IIT-BHU फाउंडेशन के अध्यक्ष अरुण त्रिपाठी ने कहा कि हम देशपांडे और उनकी पत्नी जयश्री के आभारी हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि श्रीनिवास देशपांडे हमारे पूर्व छात्र रहे और दूसरों की मदद करने की उनकी प्रतिबद्धता से हम प्रेरित भी हुए। फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने भी इस दौरान खुशी जताई। IIT-BHU के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने कहा कि यह विशिष्ट पूर्व छात्रों की उपलब्धियां हैं जो फ्यूचर में टेक्नोलॉजी लीडरों को ट्रेंड करने में प्रेरित करेंगी। हमें उनके सम्मान में पुस्तकालय का नामकरण करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। क्योंकि वह समाज को बदलने के लिए ज्ञान की शक्ति के जीवंत उदाहरण हैं।

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