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वतन वापसी:पाकिस्तान की जेल में 11 साल यातना सहने के बाद अपनों के बीच लौटा युवक, अफसरों ने पूछा- घर चलोगे तो हंस पड़ा

मिर्जापुर9 महीने पहले
यह फोटो मिर्जापुर की है। 11 साल बाद घर वापसी पर पुनवासी का लोगों ने जोरदार स्वागत किया।
  • साल 2009 में बॉर्डर क्रास कर पहुंच गया था पाकिस्तान
  • बहन और बहनोई ने अपनी सुपुर्दगी में लिया, अब इनके सिवा उसका कोई अपना नहीं

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का एक युवक पाकिस्तान की जेल में 11 साल दर्द झेलने के बाद मंगलवार को अपने घर पहुंचा। साथ में उसकी बहन और बहनोई भी थे। उसका वतन वापसी पर भव्य स्वागत हुआ। पुलिस लाइन में प्रभारी जिलाधिकारी अविनाश सिंह और पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिंह ने युवक को पुष्प गुच्छ भेंटकर उसका स्वागत किया। अन्य लोगों ने उसे फूलमाला पहनाई। युवक के परिवार में अब कोई नहीं है। घर जाने की बात पर वह हंस पड़ता है। उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। अफसरों ने युवक की हर मदद करने का आश्वासन उसके अपनों को दिया है।

साल 2009 में पाकिस्तान पहुंचा था

सिटी ब्लाक के भरूहना गांव में रहने वाले पुनवासी (35 साल) की शादी हो चुकी थी। लेकिन पत्नी का गौना आने से पहले ही वह विक्षिप्त हो गया थाा। साल 2009 में वह किसी प्रकार बॉर्डर पार कर पाकिस्तान जा पहुंचा। उस पर पाकिस्तान के नौलखा लाहौर में मुकदमा भी दर्ज है। वहां वह करीब 11 साल जेल में रहा। पाकिस्तान से मिले पते के आधार पर राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए गृह मंत्रालय का विदेशी प्रभाग उसके परिजनों को खोज रहा था। आखिरकार प्रदेश और केंद्र सरकार के साथ ही LIU के अथक प्रयास से उसका सही पता मिल सका। तब कहीं जाकर उसकी वापसी हो सकी।

नवंबर माह में BSF को सौंपा गया

17 नवंबर 2020 को पाकिस्तान ने पुनवासी को पंजाब के अटारी बॉर्डर पर BSF को सौंपा था। इसके बाद क्वारैंटाइन अवधि पूरी करने के बाद उसे उसकी लालगंज थाना क्षेत्र के बसइटा बहुती बलहरा निवासी बहन किरन के हवाले किया गया। मंगलवार को पुनवासी को ट्रेन से वाराणसी लाया गया। सबसे पहले वह पुलिस लाइन पहुंचा।

पुलिस लाइन में डीएम और एसपी ने मिठाई खिलाकर किया पुनवासी का स्वागत।
पुलिस लाइन में डीएम और एसपी ने मिठाई खिलाकर किया पुनवासी का स्वागत।

प्रशासन ने मदद का दिलाया भरोसा

प्रभारी जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि पुनवासी की हर तरह से मदद की जाएगी। वहीं, पुलिस अधीक्षक अजय कुमार ने कहा कि गलत पता होने के कारण उसके परिजनों को तलाशने में काफी वक्त लगा। 11 साल बाद वह अपने घर लौटकर आया है।

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