डॉक्टरों ने फेफड़े से निकाला 7 इंच का लोहा:बनारस में 3 घंटे चला ऑपरेशन, युवक के साथ पटाखा फोड़ते वक्त हुआ था हादसा

वाराणसीएक वर्ष पहले
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉक्टरों ने एक रेयर ऑपरेशन किया है। पटाखे से घायल हुए युवक के फेफड़े से लोहे का एक प्लेटनुमा टुकड़ा निकाला गया। टुकड़े की साइज (रेडियस) करीब 7 सैंटीमीटर है। यह युवक के दाएं फेफड़े की हड्डियों में फंस गया था। इससे उसका सीना बुरी तरह से चोटिल हो चुका था। ऑपरेशन में तीन घंटे का समय लगा। मऊ में आतिशबाजी के दौरान घायल हुए इस युवक को BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

IMS-BHU के कार्डियो थोरैसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के डॉक्टर प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया की टीम ने इस ऑपरेशन सफलता पूर्वक अंजाम दिया। 18 साल का यह युवक अब ठीक है। उसके नाम को गोपनीय रखा गया है।

फेफड़े की हड्डी में फंसा मेटल।
फेफड़े की हड्डी में फंसा मेटल।

पटाखा लांचर से आतिशबाजी कर रहा था युवक
मऊ जिले के मठमहमदपुर गांव का रहने वाले इस लड़के ने एक देसी पटाखा लांचर से आतिशबाजी कर रहा था। जो विस्फोटक नली के मुंह से निकलना था, वह अचानक से उल्टा दग गया और दाएं सीने को छेद कर अंदर चला गया। इससे उसका फेफड़ा बुरी तरह से घायल हो गया। दाहिने फेफड़े की पसलियों में जाकर लोहे का नली का पिछला हिस्सा घुस गया।

मऊ से BHU रेफर किया गया
सीने में दर्द से कराह उठा। श्वांस तेजी फूलने लगी। उसे मऊ के अस्पताल से रेफर करके BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल के इमरजेंसी में भर्ती किया गया। यहां पर डॉक्टरों की टीम ने युवक की जांच-परख करके ऑपरेशन करने का मन बनाया। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि फेफड़े की हड्डियों या पसलियों के बीच में कोई चीज फंसी है। वहीं उसी के पास दाहिने फेफड़े में खून जमा हुआ इन्हें हटाना जरूरी समझते हुए डॉक्टरों ने आपातकालीन ऑपरेशन किया।

लोहे का गोल टुकड़ा।
लोहे का गोल टुकड़ा।

प्लूरल कैविटी में बहता रहा खून
चोट अधिक होने के कारण उनके दाहिने फेफड़े का ऊपरी हिस्सा सबसे पहले हटाया। फिर, दाहिनी ओर प्लूरल कैविटी में काफी मात्रा में खून का रिसाव हुआ था। वहां ब्लड के जमे थक्के हटाए गए। गनीमत थी कि लोहे की प्लेट हड्डियों में ही फंसी थी। उसके हार्ट तक नहीं पहुंच पाया। जिससे उसकी जान बची।

करीब तीन घंटे तक चली सर्जरी में धातु के टुकड़े को हटाने के बाद, फेफड़े की सफाई की गई। इसके बाद खून के अनकंट्रोल बहाव को रोका गया। टांके लगाकर मरीज को घर भेज दिया गया। इस सर्जिकल टीम में प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया के डॉ. नरेंद्र नाथ दास, एनेस्थीसिया के प्रो. एसके माथुर भी शामिल थे।