विश्वनाथ मंदिर के क्षेत्र में कैसे हुआ बदलाव, जानिए:आर्किटेक्ट डॉ. बिमल पटेल से PM मोदी बोले थे- ऐसा रास्ता बनाओ कि मन प्रफुल्लित हो जाए

वाराणसी6 महीने पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का खाका आर्किटेक्ट डॉ. बिमल पटेल ने खींचा था। एक इंटरव्यू के दौरान डॉ. पटेल ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा था कि ऐसा एक रास्ता बनाओ कि मन प्रफुल्लित हो जाए।

बिमल पटेल का कहना है कि श्रीकाशी विश्वनाथ को भव्य आकार देना आसान काम नहीं था। उन्हें इस बात की संतुष्टि है कि मंदिर का मूल स्वरूप बरकरार रखते हुए धाम को दिव्य और भव्य आकार देने में वह और उनकी टीम सफल रही।

प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट का खाका आर्किटेक्ट डॉ. बिमल पटेल ने खींचा है
प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट का खाका आर्किटेक्ट डॉ. बिमल पटेल ने खींचा है

एनिमेटेड फोटो में देखें पहले और अब का अंतर...।

पहले श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर सकरी गली में घनी आबादी के बीच था। तंग गलियों में श्रद्धालु एक-दूसरे से धक्कामुक्की करते हुए बड़ी ही मुश्किल से बाबा दरबार जाकर दर्शन-पूजन कर पाते थे।
पहले श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर सकरी गली में घनी आबादी के बीच था। तंग गलियों में श्रद्धालु एक-दूसरे से धक्कामुक्की करते हुए बड़ी ही मुश्किल से बाबा दरबार जाकर दर्शन-पूजन कर पाते थे।
अब बाबा विश्वनाथ का धाम 5 लाख वर्ग फीट से ज्यादा क्षेत्रफल में विकसित किया गया है। गंगा की ओर के साथ ही गोदौलिया-चौक मार्ग की तरफ से भी बाबा धाम की भव्यता दूर से ही दिखाई देती है।
अब बाबा विश्वनाथ का धाम 5 लाख वर्ग फीट से ज्यादा क्षेत्रफल में विकसित किया गया है। गंगा की ओर के साथ ही गोदौलिया-चौक मार्ग की तरफ से भी बाबा धाम की भव्यता दूर से ही दिखाई देती है।
पहले लाल चौकोर घेरे में लगभग 3000 वर्ग फीट क्षेत्रफल में बाबा विश्वनाथ का मंदिर था। इतनी कम जगह होने के कारण श्रद्धालुओं को सावन में और महाशिवरात्रि को दर्शन-पूजन में काफी दिक्कत होती थी।
पहले लाल चौकोर घेरे में लगभग 3000 वर्ग फीट क्षेत्रफल में बाबा विश्वनाथ का मंदिर था। इतनी कम जगह होने के कारण श्रद्धालुओं को सावन में और महाशिवरात्रि को दर्शन-पूजन में काफी दिक्कत होती थी।
अब बाबा विश्वनाथ का दरबार 350 मीटर से ज्यादा लंबा और 150 मीटर से ज्यादा चौड़ाई में है। अब यहां आराम से दर्शन-पूजन के साथ ही श्रद्धालु सुकून के साथ समय भी गुजार सकते हैं।
अब बाबा विश्वनाथ का दरबार 350 मीटर से ज्यादा लंबा और 150 मीटर से ज्यादा चौड़ाई में है। अब यहां आराम से दर्शन-पूजन के साथ ही श्रद्धालु सुकून के साथ समय भी गुजार सकते हैं।
पहले गंगा के ललिता घाट, जलासेन घाट और मणिकर्णिका घाट की ओर से बाबा दरबार की ओर जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। अतिक्रमण और गंदगी का बोलबाला था। इस वजह से संकरी गलियों से होकर भी इन तीनों घाट से बाबा धाम जाने में श्रद्धालु संकोच करते थे।
पहले गंगा के ललिता घाट, जलासेन घाट और मणिकर्णिका घाट की ओर से बाबा दरबार की ओर जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। अतिक्रमण और गंदगी का बोलबाला था। इस वजह से संकरी गलियों से होकर भी इन तीनों घाट से बाबा धाम जाने में श्रद्धालु संकोच करते थे।
अब गंगा के ललिता घाट, मणिकर्णिका घाट और जलासेन घाट की ओर से बाबा दरबार सीधे जुड़ गया है और अच्छा रास्ता बनाया जा रहा है। श्रद्धालु अब गंगा दर्शन कर सीधे बाबा धाम में हाजिरी लगा सकेंगे।
अब गंगा के ललिता घाट, मणिकर्णिका घाट और जलासेन घाट की ओर से बाबा दरबार सीधे जुड़ गया है और अच्छा रास्ता बनाया जा रहा है। श्रद्धालु अब गंगा दर्शन कर सीधे बाबा धाम में हाजिरी लगा सकेंगे।
गंगा नदी के किनारे लाल घेरे से घिरा हुआ जो क्षेत्र दिखाई दे रहा है, वहीं श्रीकाशी विश्वनाथ धाम को विकसित किया गया है। इसके लिए प्रशासन को 300 से ज्यादा मकान लोगों से खरीदने पड़े।
गंगा नदी के किनारे लाल घेरे से घिरा हुआ जो क्षेत्र दिखाई दे रहा है, वहीं श्रीकाशी विश्वनाथ धाम को विकसित किया गया है। इसके लिए प्रशासन को 300 से ज्यादा मकान लोगों से खरीदने पड़े।
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