उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ महापर्व संपन्न:वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज के घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, रातभर गूंजे छठी मैया के गीत

वाराणसी/प्रयागराज/लखनऊ8 महीने पहले

लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर पूरे यूपी में उत्साह है। वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर में घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। छठी व्रतियों और श्रद्धालुओं ने गुरुवार को पूजा-पाठ करके व्रती महिलाओं ने उगते (उदीयमान) भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। अर्घ्य देकर महिलाएं परिवार के मंगल की कामना कीं। इसी के साथ चार दिनों तक चलने वाला सूर्योपासना का पर्व छठ संपन्न हो गया।

काशी के 84 घाटों और अन्य घाटों पर 5 लाख से ज्यादा व्रती महिलाएं पूजा-पाठ में जुटीं। लखनऊ के गोमतीघाट पर 11 लाख से अधिक महिलाओं ने अर्घ्य दिया। गोरखपुर, सहारनपुर और प्रयागराज के संगमघाट पर भी आस्था में सराबोर व्रती महिलाएं पूजन करने पहुंची।

तकरीबन प्रदेश के सभी शहरों में प्रशासन ने सुरक्षा के लिए इंतजाम किए गए। पूरी रात छठ घाट छठी मैया के गीतों से गूंजते रहे। इस साल छठ महापर्व की शुरुआत 8 नवंबर से हुई है। 11 नवंबर को इसका चौथा दिन है। इस दिन उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ महापर्व का समापन हुआ।

गुरुवार की भोर गंगा किनारे अस्सी घाट पर सूर्योदय होने का इंतजार करतीं व्रती महिलाएं।
गुरुवार की भोर गंगा किनारे अस्सी घाट पर सूर्योदय होने का इंतजार करतीं व्रती महिलाएं।

वाराणसी में गुड़ और अदरक खाकर व्रत का किया पारण

वाराणसी में सुबह लगभग 5 बजे से ही गंगा-गोमती और वरुणा नदी के घाटों के अलावा कुंडों-तालाबों के किनारे पानी में खड़े व्रती महिलाओं-पुरुषों के मुंह से -उगा हे सुरुज देव, भेल भिनसरवा, अरग के रे बेरवा- जैसे पारंपरिक गीत सुनाई दे रहे थे। लगभग 6:30 बजे पूर्व दिशा से भगवान भास्कर की किरणें दिखाई दीं तो उन्हें अर्घ्य देकर 36 घंटे से निराजल व्रतधारियों ने अपना व्रत पूरा किया। इसके बाद गुड़ और अदरक खाकर व्रत का पारण किया।

4 बजे से घाटों पर नहीं बची थी पैर रखने की जगह

पुत्र और परिवार की मंगल कामना के साथ ही सुख-समृद्धि के लिए उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने की खातिर वाराणसी में कई व्रती रात भर गंगा घाटों के किनारे ही बैठे रहे। वहीं, कई व्रती भोर 4 बजे गंगा, गोमती और वरुणा घाटों के अलावा तालाबों और कुंडों के किनारे पहुंच गए थे। 4 बजे के बाद गंगा-गोमती और वरुणा के घाटों के साथ ही अन्य जलाशयों के किनारे पैर रखने की जगह नहीं बची थी। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रतधारियों ने पारण किया तो ठोकवा और खजूर के प्रसाद का वितरण शुरू हुआ। इसी के साथ सुबह-सुबह शहर में जमकर आतिशबाजी भी हुई।

काशी में गुरुवार की सुबह भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए गंगा के पानी में खड़ी व्रती महिलाएं।
काशी में गुरुवार की सुबह भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए गंगा के पानी में खड़ी व्रती महिलाएं।

व्रतियों का पैर छूकर प्रसाद लेने की मची होड़

उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सुहागिन महिलाएं व्रती महिलाओं से अपनी मांग में सिंदूर भरवाती दिखीं। इस दौरान व्रतियों का पैर छूकर प्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम नदियों और जलाशयों के किनारे उमड़ा रहा। प्रसाद वितरण के बाद व्रती वाराणसी में गंगा के 84 घाटों के किनारे से अपने परिजनों के साथ घर की ओर रुख किए तो सुबह-सुबह लंका से अस्सी, शिवाला, गोदौलिया, मैदागिन होते हुए राजघाट पर जाम लग गया था। इस बीच मुख्य मार्गों से लेकर गंगा घाटों तक जगह-जगह पुलिस-पीएसी और 11 बटालियन एनडीआरएफ के जवान तैनात रहे।

वाराणसी के सिंधिया घाट पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़े श्रद्धालु।
वाराणसी के सिंधिया घाट पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़े श्रद्धालु।
उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए काशी में गंगा किनारे उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम।
उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए काशी में गंगा किनारे उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम।
वाराणसी में गुरुवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम।
वाराणसी में गुरुवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम।
उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद एक-दूसरे की मांग भरकर महिलाएं अपने सुहाग की सलामती की कामना करते हुए।
उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद एक-दूसरे की मांग भरकर महिलाएं अपने सुहाग की सलामती की कामना करते हुए।
वाराणसी में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा किनारे खड़ी व्रती महिलाएं।
वाराणसी में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा किनारे खड़ी व्रती महिलाएं।

लखनऊ के गोमती घाट पर उगते सूर्य को दिया अर्घ्य
लखनऊ के गोमती घाट पर गुरुवार की सुबह उगते सूर्य की आराधना के लिए महिलाएं इकट्‌ठा हुईं। पांच बजे से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई। सूर्य के उगते ही महिलाओं ने अर्घ्य दिया। अर्घ्य देकर व्रती महिलाओं ने संतान की सुख समृद्धि और दीर्घायु की कामना की।

लखनऊ के गोमती घाट पर छठ पूजा करतीं महिलाएं।
लखनऊ के गोमती घाट पर छठ पूजा करतीं महिलाएं।

गोरखनाथ मंदिर और मानसरोवर में भी दिखी छठा
गोरखपुर में छठ महापर्व के चौथे दिन 11 नवंबर की सुबह 5 बजे से ही घाटों, कुंडों और तालाबों पर व्रती महिलाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी पहुंचे थे। गोरखनाथ मंदिर, सूर्यकुंड और मानसरोवर मंदिर में भी छठ व्रत की छटा देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं भीम सरोवर पहुंची और अर्घ्य देकर संतान की लंबी उम्र की कामना की। शहर की विभिन्न कॉलोनियों और पार्कों में भी छठ व्रत के लिए विशेष आयोजन किया गया। बड़े पार्क में पूजा-पाठ की व्यवस्था की गई।

गोरखपुर में सूर्योदय के बाद सभी व्रतियों ने सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही 36 घंटों के निर्जला व्रत का समापन हो गया।
गोरखपुर में सूर्योदय के बाद सभी व्रतियों ने सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही 36 घंटों के निर्जला व्रत का समापन हो गया।

प्रयागराज में संगम तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब
प्रयागराज में छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया। भोर से ही घाटों पर भीड़ जुटना शुरू हो गई। सबसे ज्यादा भीड़ संगम के तट पर दिखी। यहां बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ उनके परिवार के अन्य सदस्य भी पहुंचे थे। गंगा में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। यहां लोगों ने आतिशबाजी भी की। संगम से लेकर वीआईपी घाट तक का पूरा नजारा मेले जैसा रहा। इसके बाद प्रसाद वितरण के साथ 4 दिवसीय पर्व का समापन हुआ।

प्रयागराज में संगम तट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ी भीड़।
प्रयागराज में संगम तट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ी भीड़।
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