7 फोटो में देखें...काशी में नवरात्रि का पहला दिन:बाबा विश्वनाथ की नगरी में आज घर-घर विराजीं मां जगदंबा, शिव से रूठ कर काशी आई थीं मां शैलपुत्री, फिर यहीं हो गईं विराजमान

वाराणसी10 दिन पहले
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वाराणसी के अलईपुरा स्थित मंदिर में विराजमान मां शैलपुत्री देवी। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के अलईपुरा स्थित मंदिर में विराजमान मां शैलपुत्री देवी।

शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो गए हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी में नवरात्रि के पहले दिन अलईपुरा स्थित मां शैलपुत्री देवी का भव्य पूजन किया गया। सुबह 4 बजे से ही देवी के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओें की लंबी कतारें लग गईं। मान्यता है कि शैलपुत्री देवी के दर्शन मात्र से ही भक्तों की इच्छा पूरी हो जाती है।

मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है।
मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है।
अलईपुरा स्थित शैलपुत्री देवी के बारे में कहा जाता है कि नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा ने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसी वजह से वह शैलपुत्री कहलाईं।
अलईपुरा स्थित शैलपुत्री देवी के बारे में कहा जाता है कि नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा ने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसी वजह से वह शैलपुत्री कहलाईं।
एक बार मां किसी बात से भगवान शिव से नाराज होकर कैलाश से काशी चली आईं। इसके बाद भोलेनाथ उन्हें मनाने आए, तो उन्होंने कहा कि यह स्थान उन्हें बेहद प्रिय लग रहा है और वह यहां से जाना नहीं चाहती हैं। इसके बाद से माता यहीं विराजमान हैं।
एक बार मां किसी बात से भगवान शिव से नाराज होकर कैलाश से काशी चली आईं। इसके बाद भोलेनाथ उन्हें मनाने आए, तो उन्होंने कहा कि यह स्थान उन्हें बेहद प्रिय लग रहा है और वह यहां से जाना नहीं चाहती हैं। इसके बाद से माता यहीं विराजमान हैं।
अलईपुरा का यह एक ऐसा मंदिर है जहां तीन बार मां की आरती के साथ ही उन्हें तीन बार सुहाग का सामान भी चढ़ाया जाता है। मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है।
अलईपुरा का यह एक ऐसा मंदिर है जहां तीन बार मां की आरती के साथ ही उन्हें तीन बार सुहाग का सामान भी चढ़ाया जाता है। मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्रा ने बताया कि प्रतिपदा तिथि में घट स्थापना के साथ ही देवी पूजन शुरू होता है। इस बार मां दुर्गा गुरुवार को झूले पर सवार होकर आ रही हैं। देवी दुर्गा का प्रस्थान 15 अक्टूबर को दशमी तिथि पर हाथी पर होगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्रा ने बताया कि प्रतिपदा तिथि में घट स्थापना के साथ ही देवी पूजन शुरू होता है। इस बार मां दुर्गा गुरुवार को झूले पर सवार होकर आ रही हैं। देवी दुर्गा का प्रस्थान 15 अक्टूबर को दशमी तिथि पर हाथी पर होगा।
षष्ठी तिथि का क्षय होने से इस बार नवरात्र आठ दिन का है। नवरात्र में घर में स्थापित किया जाने वाला कलश मिट्‌टी या चांदी या सोने का होना चाहिए। जल से भरे कलश पर स्वास्तिक बना हो और ऊपर कलावा या मौली बंधा होना चाहिए।
षष्ठी तिथि का क्षय होने से इस बार नवरात्र आठ दिन का है। नवरात्र में घर में स्थापित किया जाने वाला कलश मिट्‌टी या चांदी या सोने का होना चाहिए। जल से भरे कलश पर स्वास्तिक बना हो और ऊपर कलावा या मौली बंधा होना चाहिए।
कलश को मां जगदंबा का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। उसमें फूल, नकदी, चावल और रोली डाला जाता है। कलश के चौतरफा जो मिट्‌टी रहती है उसमें जौ के दाने बोए जाते हैं।
कलश को मां जगदंबा का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। उसमें फूल, नकदी, चावल और रोली डाला जाता है। कलश के चौतरफा जो मिट्‌टी रहती है उसमें जौ के दाने बोए जाते हैं।
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