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BHU के 400 डॉक्टर मुश्किल में:1 कमरे का देते हैं 10 हजार, वाईफाई और पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं; सीढ़ी से चढ़ते 7 मंजिल

वाराणसी3 महीने पहले
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सुश्रुत हॉस्टल का निर्माण 2014 में हुआ था। तब से ही यहां पर सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। - Dainik Bhaskar
सुश्रुत हॉस्टल का निर्माण 2014 में हुआ था। तब से ही यहां पर सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल में फर्श के ऊपर फर्श बिछाकर बेवजह पानी की तरह से पैसा बहाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर डॉक्टर्स के हॉस्टल में पीने के लिए साफ पानी तक नसीब नहीं है। सीनियर और जूनियर रेजिडेंट की 7 मंजिल की हॉस्टल बिल्डिंग में लगी लिफ्ट खराब पड़ी है।

सुश्रुत हॉस्टल की खराब लिफ्ट के सामने कुर्सियां रख दी गई हैं।
सुश्रुत हॉस्टल की खराब लिफ्ट के सामने कुर्सियां रख दी गई हैं।

यह हाल 'पूर्वांचल के एम्स' का दर्जा प्राप्त BHU अस्पताल के डॉक्टरों का है। ट्रॉमा सेंटर कैंपस में बने 7 मंजिल के सुश्रुत हॉस्टल में BHU के करीब 400 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर रहते हैं। एक कमरे का चार्ज 10 हजार रुपए (HRA से) देते हैं। मगर, फ्री वाईफाई और फ्रेश मिनरल वाटर जैसी मूलभूत सुविधा तक नसीब नहीं है। हॉस्टल से 50 मीटर दूर ट्रॉमा सेंटर अस्पताल परिसर में फुल स्पीड से BHU का वाईफाई काम करता है। लेकिन, हॉस्टल और ऑप्टिकल फाइबर का कनेक्शन पहुंचाने में विश्वविद्यालय के कंप्यूटर सेंटर की ओर से 90 लाख रुपए का खर्च बता दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि इतने पैसे में तो एक नया हॉस्टल ही खड़ा किया जा सकता है।

मिनरल वाटर निकालने वाली मशीन खराब पड़ी है।
मिनरल वाटर निकालने वाली मशीन खराब पड़ी है।

24 घंटे रिसर्च कार्य, मगर नहीं है इंटरनेट
आज BHU का पूरा कैंपस वाईफाई से लैस है। लेकिन, जहां सबसे ज्यादा जरूरी है, वहां डॉक्टरों के हॉस्टल तक यह सुविधा नहीं है। इस हॉस्टल में BHU के मेडिकल, आयुर्वेद और डेंटल तीनों फैकल्टी के सीनियर और जूनियर रेजिडेंट रहते हैं। इन्हें डॉक्टरी के अलावा 24 घंटे रिसर्च कार्य के लिए हाई स्पीड इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। लेकिन, वाईफाई के केबल सेंट्रल ऑफिस के फाइलों से निकलकर यहां तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। इस असुविधा ने डॉक्टरों को काफी परेशान कर रखा है। हॉस्टल में 410 कमरे हैं, मगर अब उसमें से 68 खाली हो चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इससे बेहतर 10 हजार में कैंपस के बाहर पूरे सुख-सुविधा के साथ रहा जा सकता है।

7 साल पहले बना था सुश्रुत हॉस्टल
सुश्रुत हॉस्टल में 3 लिफ्ट हैं, जिनमें से 2 खराब और 1 जर्जर है। इसका इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है। सुश्रुत हॉस्टल का निर्माण 2014 में हुआ था। तब से ही यहां पर ये सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। हाल ही में 2 मेस और 2 कैंटीन स्टार्ट किए गए। इस बारे में IMS-BHU के निदेशक प्रो. बीआर मित्तल से जानकारी लेने के लिए फोन किया गया तो नंबर स्विच ऑफ था। हालांकि सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कंप्यूटर सेंटर को जल्द इस व्यवस्था को बहाल करने की जिम्मेदारी दी है।

टेंडर के बाद खर्च हो जाएगा कम
कंप्यूटर सेंटर के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में 3 जगह हैं, जहां पर ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का काम अभी तक नहीं हुआ है। यहां के लिए 1 करोड़ 37 लाख रुपये खर्च आएगा। सुश्रुत हॉस्टल में 15 लाख के स्विच, 35 लाख के केबल और तमाम कागजी प्रक्रिया पर खर्च मिलाकर 90 लाख का इस्टीमेट आया है। हालांकि टेंडर लगने के बाद 20 लाख रुपए के आसपास कम हो जाएगा। BHU कैंपस में 2018 से फ्री वाईफाई की सुविधा है।