वाराणसी में ग्रीन पटाखों की धूम:दिवाली पर आसमानी करतब दिखाने वाले पटाखों का ट्रेंड, मिर्ची, बुलट, ऊनी बम हुए मार्केट से गायब

वाराणसी8 महीने पहले
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वाराणसी के बाजार में छोटी दिवाली पर ज्वाय-30 और जाली जिंगल पटाखों की मची रही धूम। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के बाजार में छोटी दिवाली पर ज्वाय-30 और जाली जिंगल पटाखों की मची रही धूम।

राज्य सरकार की ओर से ग्रीन पटाखों की छूट क्या मिली वाराणसी में लोग दुकानों पर टूट पड़े। बुधवार को छोटी दिवाली पर पारंपरिक पटाखे मिर्ची, बुलट, ऊनी बम आदि मार्केट से गायब हैं। उनकी जगह आसमानी करतब दिखाने वाले ग्रीन पटाखों ने ले ली है।

शिवपुर स्थित मिनी स्टेडियम, नाटी इमली और संपूर्णानंद यूनिवर्सिटी कैंपस में थोक पटाखा मंडी सज गई है। दुकानदार यहां सुबह से ही आ चुके हैं। साथ ही लोगों की भीड़ भी जुट गई है। उधर, जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कोई मानक नहीं अपनाए गए हैं। पटाखों की दुकानों पर अग्निशमन यंत्र नहीं रखे हुए हैं। न ही अब तक इन मैदानों पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंची हैं। ऐसे में आग लगने के बाद स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल हो सकती है।

शिवपुर स्थित मिनी स्टेडियम, नाटी इमली और संपूर्णानंद यूनिवर्सिटी कैंपस में थोक पटाखा मंडी सज गई है।
शिवपुर स्थित मिनी स्टेडियम, नाटी इमली और संपूर्णानंद यूनिवर्सिटी कैंपस में थोक पटाखा मंडी सज गई है।

चमक से आसमान में बनेगी डिजाइन
फिलहाल पटाखों की बात करें, तो मार्केट में इस दिवाली एक नया ट्रेंड आसमान में रोशनी और चमक से तरह-तरह की डिजाइन दिखाने वाले पटाखों का चल गया है। 400 से 4000 रुपए तक में ये बाजार में मिल रहे हैं। ग्रीन पटाखों की कैटेगरी में आने वाले ज्वाय-30 और जाली जिंगल को लेकर लोगों का अच्छा-खासा रुझान है। ये दोनों पटाखे 30-45 सेकेंड का कारनामा आसमान में पेश करते हैं।

ग्रीन पटाखों की कैटेगरी में आने वाले ज्वाय-30 और जाली जिंगल को लेकर लोगों का अच्छा-खासा रुझान है।
ग्रीन पटाखों की कैटेगरी में आने वाले ज्वाय-30 और जाली जिंगल को लेकर लोगों का अच्छा-खासा रुझान है।

जाली जिंगल में आग लगाएंगे, तो पहले रॉकेट की तरह सीधे आसमान में जाकर छतरीनुमा बन जाएगा। कुछ सेकेंड में छतरी बंद होकर जमीन पर उतरना शुरू कर देगी। जाली जिंगल की 15 वैरायटी है। इसकी कीमत 475 से शुरू होकर 4000 रुपए तक है। कुछ पटाखों से कई प्रकार की रोशनी होगी, जिससे आसमान जगमगा उठेगा। बाजार में 300 लेकर 1300 रुपए तक की रेंज के इस तरह पटाखे मिल रहे हैं। जिसको लेकर लोगों का इंटरेस्ट बढ़ा है। वहीं कई ग्रीन पटाखे तो ऐसे हैं कि सीटी की मद्धम धुन के साथ आकाश में अलग-अलग रोशनी बिखेरेते नजर आएंगे। वहीं पारंपरिक पटाखे शोर और धमाका करने वाली बड़ी चटाइयां, स्नैक, ऊनी बम और खतरनाक बुलट बम इस बार मार्केट से गायब हैं।

कई ग्रीन पटाखे तो ऐसे हैं कि सीटी की मद्धम धुन के साथ आकाश में अलग-अलग रोशनी बिखेरेते नजर आएंगे।
कई ग्रीन पटाखे तो ऐसे हैं कि सीटी की मद्धम धुन के साथ आकाश में अलग-अलग रोशनी बिखेरेते नजर आएंगे।

बच्चों के लिए ग्रीन फुलझड़ी, महताब, चकरघिन्नी और अनार
बच्चों के लिए भी ग्रीन पटाखों के स्टाल इन बाजारों में दिखाई दिए। ग्रीन फुलझड़ी, महताब, चकरघिन्नी और अनार आदि शोर नहीं चमक बिखरेंगे। इनकी कीमत 130 से लेकर 480 रुपए प्रति डिब्बा है। इनके अलावा रॉकेट, स्काई शॉट, छुरछुरी, पैराशूट, बटरफ्लाई की डिमांड ज्यादा है।

पटाखा कारोबारियों ने बनाई चाइनीज पटाखों से दूरी

पटाखा कारोबारी जितेंद्र यादव ने बताया कि ग्रीन पटाखे की कई वैरायटी आ गई हैं। इसके अलावा सल्फ्यूरिक लाताखा और तमाम तरह के पटाखे बाजार में उपलब्ध हैं। थोक कारोबार शुरू हो गया है। छोटी दीपावली की शाम से मार्केट पूरी तरह से बूम होना शुरू हो जाता है जो दीपावली की शाम तक रहता है। पटाखा कारोबारी शिवम कहते हैं कि इस बार दीपावली चाइनीज पटाखों को मार्केट में नहीं लाया गया है। बिल्कुल स्वदेशी, ग्रीन पटाखे हैं जो चाइनीज पटाखों की तरह हानिकारक नहीं हैं। दुकानें लग गई हैं। उम्मीद है कि शाम से भीड़ बढ़ने लगेगी। उधर राजेश चौरसिया कहते हैं कि मार्केट में बच्चों के लिए फुलझड़ी के विभिन्न प्रकार के आइटम के अलावा अनार, चकली, रॉकेट और आसमान को जगमग करने वाले तमाम तरह के पाटखे उपलब्ध हैं। जिनकी खूब डिमांड भी है।