नवंबर में काशी आएंगी ममता बनर्जी:TMC ज्वाइन करने के बाद ललितेशपति त्रिपाठी बोले- जिन ताकतों से असहमति उनसे समझौता नहीं

वाराणसी8 महीने पहले
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पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी (बाएं) और टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राय। - Dainik Bhaskar
पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी (बाएं) और टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राय।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITMC) पूरे दमखम के साथ लड़ेगी। पार्टी के चुनाव प्रचार की दिशा और दशा तय करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी नवंबर महीने में वाराणसी आएंगी। यह जानकारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राय ने दी। वहीं, कांग्रेस छोड़ हाल ही में AITMC ज्वाइन करने वाले मिर्जापुर के पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने रविवार को पहली बार खुल कर बातचीत की।

ललितेशपति ने कहा कि हमने बीते दिनों कहा था कि कांग्रेस की विचारधारा और संस्कृति हमारा संस्कार है। हम कांग्रेस से दूर नहीं जा सकते। यही कारण है कि मैंने बनारस, मिर्जापुर, चंदौली एवं प्रदेश के अन्य जनपदों के अपने सहयोगियों और साथियों की सलाह पर तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

लोकतंत्र विरोधी ताकतों से सीधा टकराने की मिसाल
ललितेशपति ने कहा कि जिन ताकतों से मैं असहमत रहा उनसे समझौता संभव नहीं है। मैं काशी की धरती का बेटा हूं और काशी की पहचान कभी राम सत्तात्मक नहीं बल्कि जन संस्कृति के आदर्शों को जीने की रही है। इसलिए कांग्रेस छोड़ने का फैसला मेरे लिये पद और सत्ता की किसी सौदेबाजी के लिए उठाया गया कदम नहीं था। अन्य दूसरे विकल्प होने के बावजूद भी मैंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा है, क्योंकि मैं उन ताकतों के साथ समझौता नहीं कर सकता जिनकी राजनीतिक विचारधारा से मैं हमेशा असहमत रहा हूं।

हमारा उद्देश्य साफ है कि हम गांधी-नेहरू की विचारधारा और अपने परदादा पं. कमलापति त्रिपाठी से मिले आदर्शों के माध्यम से जनसेवा की राजनीतिक भूमिका निभा सकें। ममता बनर्जी जी के नेतृत्व में यह कार्य बखूबी संभव है। क्योंकि उन्होंने साम्प्रदायिक और लोकतंत्र विरोधी राजनीतिक शक्तियों से सीधा टकराने की मिसाल हम सबके सामने रखी है।

ललितेशपति ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में हमारी सदस्यता की घोषणा के साथ पार्टी की अध्यक्ष ने साफ कहा था कि गहरी धर्मनिष्ठा के साथ धर्मनिरपेक्षता का स्पष्ट विश्वास जीने वाले पं. कमलापति त्रिपाठी हमारे लिये एक आदर्श राजनेता रहे हैं।

उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी और उसके बाद देश व कांग्रेस की महत्वपूर्ण सेवा की थी। काशी और बंगाल का वही आध्यात्मिक रिश्ता है, जो शिव और शक्ति का है। जो तैलंग स्वामी और रामकृष्ण परमहंस का है।

काशी को नागपुर और गंगा घाटों को चौपाटी बनाने की कोशिश
पूर्व विधायक ने कहा कि काशी अपने आप में पूरे देश की संस्कृति को समेटे हुए है। काशी अखंड भारत की नींव रखने वाले चाणक्य की सामरिक नीति का केंद्र है। काशी भक्ति काल के संतों द्वारा सींची गई तपोभूमि है। काशी महामना के तप से बनी आधुनिक भारत की सर्वविद्या की राजधानी है।

काशी भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के साथ अभिन्नता का संदेश है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से काशी के स्वरूप को, काशी के मिज़ाज को बदलने की जो कोशिश हो रही है वह एक चिंता का विषय है। कई रसों से बने अपने इस शहर बनारस को एकरस किया जा रहा है।

काशी को नागपुर और गंगा घाटों को चौपाटी बनाने की साजिश चल रही है। इसका प्रतिरोध काशी को करना ही होगा। मुझे विश्वास है कि काशी वासी काशी की कीमत पर हो रहे इस बदलाव को कतई स्वीकार नहीं करेंगे। एक बोलता हुआ शहर चुप नहीं रह सकता। इस दौरान कई पुराने कांग्रेसियों ने तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

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