वाराणसी में 9 साल के बच्चे ने किया सुसाइड:पिता ने नए कपड़े नहीं दिलाए तो फांसी लगाकर जान दी; कक्षा 3 में पढ़ाई कर रहा था

वाराणसी5 महीने पहले
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वाराणसी की साकेत नगर कॉलोनी में पिता ने नए कपड़े नहीं दिलाए, तो 9 साल के मासूम शानू ने फांसी लगाकर जान दे दी। मासूम को फंदे पर लटका देखकर परिवार के लोगों को यकीन ही नहीं हुआ। उसकी जान बचाने के लिए बीएचयू ट्रामा सेंटर पहुंचे, लेकिन तब तक जिंदगी की डोर टूट चुकी थी।

ये सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि फंदे पर लटकती लाश अपने पीछे एक बड़ा सवाल भी छोड़ गई है। सिर्फ 9 साल की उम्र के मासूम के दिमाग में आखिर इतना आत्मघाती विचार कहां से आया। क्या ये समय से पहले मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में खोए रहने का दुष्परिणाम था। परिवार के सदस्य रोते हुए सिर्फ इतना ही बता सके कि मासूम नए कपड़े मांग रहा था।

बड़े भाई के लिए पिता ने खरीदे थे कपड़े

शानू की मां बेटे की लाश देख बेसुध हो गईं।
शानू की मां बेटे की लाश देख बेसुध हो गईं।

परिवार लंका थाना की साकेत नगर कॉलोनी में रहता है। मासूम के पिता नौशाद अहमद एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी करते हैं। गुरुवार को उन्होंने अपने बड़े बेटे आरिफ को नए कपड़े दिलाए थे। वहीं, छोटे बेटे शानू (9) को बाद में नया कपड़ा दिलाने के लिए कहा था। इसे लेकर शानू नाराज हो गया। शानू की मां रिंकी घरेलू कामकाज में व्यस्त थी। इसी बीच, शानू अपने घर की छत पर बने टिन शेड के कमरे में गया और नीचे टेबल रख कर लोहे के एंगल में रस्सी बांध कर उसके सहारे झूल गया।

कलेजे के टुकड़े को फंदे पर लटकते देख मां हुई बेसुध

काफी देर तक शानू घर में नहीं दिखा तो उसकी मां ने उसकी खोजबीन शुरू की। छत पर बने टिनशेड कमरे की ओर जाने पर शानू को फंदे के सहारे लटकता देख उसकी मां की चीख निकल गई। वो बेसुध हो गईं। चीख-पुकार सुनकर आस-पास के लोग भी जुट गए। आनन-फानन शानू को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कक्षा तीन में पढ़ता था शानू

परिजनों ने बताया कि शानू कक्षा 3 में पढ़ता था। किसी को यकीन ही नहीं हो रहा कि मासूम बच्चा ऐसा आत्मघाती कदम उठाएगा। नौशाद बार-बार खुद को कोस रहे थे। तो रिंकी कह रही थी कि कोई हमारे लाल के पास हमें ले चलो।

परिजन बड़ी ही मुश्किल से दोनों को संभाले हुए थे। वहीं, इस संबंध में लंका इंस्पेक्टर वेद प्रकाश राय ने बताया कि बच्चे के परिजनों ने घटना की जानकारी नहीं दी थी। उसके शव को दफना दिया गया है। बाद में अस्पताल से मेमो आने पर घटना की जानकारी हुई।

मजबूत काउंसलिंग से बच्चों को मजबूत बनाएं

बरेली कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग डॉ. हेमा खन्ना के मुताबिक बच्चे के मूड को अभिभावकों को भांपना चाहिए। उसकी काउंसलिंग करनी चाहिए। अभिभावक को बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित प्रयोग के विषय में जानकारी देनी चाहिए। साथ ही, बच्चों को इंटरनेट का प्रयोग सीमित समय के लिए करना चाहिए। अभिभावकों को 18 साल से कम के बच्चों को इंटरनेट के प्रयोग के लिए स्मार्ट फोन नहीं देना चाहिए, बल्कि उनको घर के कंप्यूटर पर ही इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए कहना चाहिए।

लगातार मजबूत प्रेरणा देनी वाले किरदारों की कहानी सुनाने, अच्छे विचारों के बारे में बताने के भी नतीजे बेहतर मिलते हैं। अगर बच्चे की गतिविधियों पर थोड़ा भी संदेह हो, तो उसको अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

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