काशी से गंगा-गोमती संगम यात्रा की बुकिंग शुरू:26 सितंबर को सैम मानिक शॉ क्रूज वाराणसी में डॉल्फिन की अठखेलियां और शैव-वैष्णव एकता के प्रतीक मारकंडेय महादेव के कराएगी दर्शन

वाराणसीएक महीने पहले
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गंगा के कैथी घाट से डॉल्फिन मछलियां अठखेलियां करते देखीं जा सकती हैं। - Dainik Bhaskar
गंगा के कैथी घाट से डॉल्फिन मछलियां अठखेलियां करते देखीं जा सकती हैं।

वाराणसी में गंगा के रास्ते चुनार की आध्यात्मिक यात्रा कराने के बाद अब सैम मानिक शॉ क्रूज विश्व प्रसिद्ध मारकंडेय महादेव और डॉल्फिन सफारी कराने को तैयार है। साथ ही गंगा-गोमती संगम, नवनिर्मित भव्य अर्द्धचंद्राकार घाट और ढाका के प्राचीन गौरी शंकर मंदिर में भी श्रद्धालु मत्था टेक सकेंगे। अलकनंदा क्रूज लाइन ने 26 सितंबर से शुरू हो रहे इस यात्रा की बुकिंग भी शुरू कर दी है। अलकनंदा क्रूज लाइन के संचालक विकास मालवीय ने बताया कि प्रति व्यक्ति टिकट कर रेट 3000 रुपए रखा गया है, जिसमें नाश्ता, लंच, गाइड, मंदिर के दर्शन और शाम को लजीज जलपान शामिल होगा।

चुनार की यात्रा शुरू करने के बाद सैम मानिक शॉ क्रूज अब गंगा-गोमती संगम तक कराएगी विहार।
चुनार की यात्रा शुरू करने के बाद सैम मानिक शॉ क्रूज अब गंगा-गोमती संगम तक कराएगी विहार।

राजघाट के पुरावशेष और वरुणा-गंगा संगम भी होगा खास

म्यूजिक और बनारसी व्यंजन के साथ सैलानी इस रोमांचक यात्रा में काशी के 84 घाटों से लेकर आदि केशव घाट की प्राचीनता और खूबसूरती को निहारेंगे। वहीं राजघाट के एतिहासिक पुरावशेषों और वरुणा-गंगा संगम भी पहली बार गंगा के बीच देखने का अवसर मिलेगा।

वाराणसी के चौबेपुर स्थित गंगा-गोमती के पास तैयार हो रहा अर्द्धचंद्राकार घाट।
वाराणसी के चौबेपुर स्थित गंगा-गोमती के पास तैयार हो रहा अर्द्धचंद्राकार घाट।

कैथी घाट पर होगा डॉल्फिन का शानदार नजारा

राजघाट से थोड़ा आगे बढ़ने पर कैथी घाट वाला इलाका शुरू होगा, जहां हर साल डॉल्फिन और कछुओं का प्रजनन होता है।

वाराणसी में गंगा के कैथी इलाके में प्रजनन करती हैं डाल्फिन मंछलियां।
वाराणसी में गंगा के कैथी इलाके में प्रजनन करती हैं डाल्फिन मंछलियां।

यहां गंगा में किनारों पर से ही डॉल्फिन अठखेलियां करती दिख जाती हैं। क्रूज से ही पर्यटकों को प्रकृति का यह अनोखा नजारा देखने को मिलेगा।

वाराणसी में गंगा में कैथी के पास स्थित प्राचीन घाट।
वाराणसी में गंगा में कैथी के पास स्थित प्राचीन घाट।

विकास मालवीय के अनुसार गंगा में उत्तर की ओर करीब 35 किलोमीटर की यह यात्रा चुनार से भी अधिक एडवेंचर वाली होगी। यह यात्रा संत रविदास घाट से सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगी।

वाराणसी में मारकंडेय महादेव मंदिर स्थित शिवलिंग।
वाराणसी में मारकंडेय महादेव मंदिर स्थित शिवलिंग।

प्रदेश का सबसे बेहतर जल सफारी है यहां पर

कैथी घाट की व्यवस्था देखने वाले गंगा प्रहरी नागेंद्र निषाद ने बताया कि प्रदेश में गंगा सफारी का सबसे बेहतर स्थान यही है। यहां पर पहले से ही पर्यटकों का काफी दबाव रहता है।

वाराणसी में ढाका स्थित गौरी-शंकर का मंदिर।
वाराणसी में ढाका स्थित गौरी-शंकर का मंदिर।

लोग निजी तौर पर बोट बुक डॉल्फिन, रंग-बिरंगी मछलियां और अन्य जलीय जीवों को देखने आते हैं। बताया कि यहां पर 70 किलोग्राम भार के कछुए दिखते हैं।

वाराणसी स्थित मारकंडेय महादेव मंदिर का मुख्य द्वार।
वाराणसी स्थित मारकंडेय महादेव मंदिर का मुख्य द्वार।

मारंकडेय महादेव का शिखर स्वर्ण का होगा

काशी के मारकंडेय महादेव को शैव-वैष्णव एकता का प्रतीक माना जाता है। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर और संत रविदास मंदिर के बाद यह वाराणसी का तीसरा मंदिर होगा, जिसका शिखर स्वर्ण मंडित होगा। इस पर कार्य शुरू हो चुका है। यह मंदिर वाराणसी, जौनपुर और गाजीपुर 3 जिलों का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है।

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