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वाराणसी में सूर्य षष्ठी पर उमड़ी आस्था...5 तस्वीरों में देखें:दूसरे साल भी लोलार्क कुंड में स्नान नहीं कर पाए श्रद्धालु, पूरी होती है संतान पूर्ति की कामना, गंगा में लगाई डुबकी

वाराणसी10 दिन पहले

संतान कामना के पर्व सूर्य षष्ठी पर काशी में गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा पड़ा है। कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर लगातार दूसरे साल भी लोलार्क कुंड में स्नान और पूजापाठ पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद शनिवार की देर रात से लोलार्क कुंड पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई। पुलिस और पीएसी ने बैरिकेटिंग करा कर श्रद्धालुओं को समझाना शुरू किया तो सभी अस्सी और तुलसी घाट की ओर रुख कर गए।

तुलसी घाट पर गंगा स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
तुलसी घाट पर गंगा स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

लोलार्केश्वर महादेव के दर्शन का है विधान

भाद्रपद महीने की शुक्ल षष्ठी को सूर्य षष्ठी का पर्व काशी में लोलार्क षष्ठी कहलाता है। लोलार्क षष्ठी पर संतान की कामना से आए हुए लोग भदैनी स्थित लोलार्क कुंड में स्नान कर लोलार्केश्वर महादेव के दर्शन-पूजन करते हैं। संतान की कामना पूरी होने पर भी कुंड में स्नान, बच्चे का मुंडन और लोलार्केश्वर महादेव को पकवान (कढ़ाई) चढ़ाने का विधान है। इसी के मद्देनजर इस बार भी शनिवार की देर रात से ही काशी ही नहीं देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी।

शनिवार की आधी रात बाद प्रतिबंध के बावजूद लोलार्क कुुंड में स्नान के लिए इकट्‌ठा हुए श्रद्धालु।
शनिवार की आधी रात बाद प्रतिबंध के बावजूद लोलार्क कुुंड में स्नान के लिए इकट्‌ठा हुए श्रद्धालु।

फिलहाल कुंड की ओर श्रद्धालु नहीं

एसीपी भेलूपुर प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि लोलार्क कुंड की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस और पीएसी तैनात की गई है। बैरिकेटिंग भी कराई गई है। रातसे सुबह तक जो श्रद्धालु आए थे उन्हें समझा-बुझाकर गंगा घाटों की ओर भेज दिया गया। कोरोना महामारी के कारण लोलार्क कुंड में स्नान पर लगाए गए प्रतिबंध का पूरी तरह से पालन कराया जा रहा है।

शनिवार की रात 1 बजे के बाद लोलार्क कुंड में स्नान और दर्शन-पूजन के लिए उमड़े श्रद्धालु।
शनिवार की रात 1 बजे के बाद लोलार्क कुंड में स्नान और दर्शन-पूजन के लिए उमड़े श्रद्धालु।

लक्खा मेलों में शुमार है लोलार्क षष्ठी

लोलार्क षष्ठी काशी के लक्खा मेलों में शुमार है। कारण कि इस दिन लोलार्क कुंड से लेकर अस्सी और तुलसी घाट तक लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। कोरोना की काली छाया के कारण पिछले साल भी लोलार्क कुंड में स्नान और पूजापाठ पर प्रतिबंध लगाया गया था। लगातार दूसरे साल प्रतिबंध लगाए जाने से देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं में भारी मायूसी दिखी।

लोलार्क कुंड की ओर जाने वाले रास्तों पर शनिवार रात से ही पुलिस और पीएसी के जवान तैनात हैं।
लोलार्क कुंड की ओर जाने वाले रास्तों पर शनिवार रात से ही पुलिस और पीएसी के जवान तैनात हैं।

लोलार्क कुंड में स्नान के लिए श्रद्धालुओं का कहना था कि हम बड़ी उम्मीद से यहां आए थे, लेकिन निराशा हाथ लगी। कोरोना ने हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित करने के साथ ही हमारी आस्था पर भी गहरी चोट की है। अब गंगा में स्नान कर भगवान भास्कर से प्रार्थना करेंगे कि वह हमारी विनती सुनें और हमें संतान सुख प्रदान करें।

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