'हे नवदुर्गा तुम्हें प्रणाम' गीत गाकर मां की विदाई:वाराणसी में नवरात्र की अंतिम रात मां के अंतिम दर्शन को पंडालों में उमड़ा आस्था का जन सैलाब

वाराणसीएक वर्ष पहले
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वाराणसी में नवरात्र के अंतिम रात में मां के दर्शन को उमड़ा भक्तों का रेला। - Dainik Bhaskar
वाराणसी में नवरात्र के अंतिम रात में मां के दर्शन को उमड़ा भक्तों का रेला।

वाराणसी में दुर्गापूजा की अंतिम रात पूरा शहर जगमगा उठा। पंडालों में बजते डमरू और सड़कों पर टिमटिमाते लाइट और रंग-बिरंगे झालर ने शहर में रौनक बढ़ा दी। नवमी पर शारदीय नवरात्र की पूर्णाहुति के बाद मां दुर्गा की विदाई की तैयारी की जाने लगी। इस दौरान माता नवदुर्गा की विदाई गीत ने लोगों को काफी भावुक कर गई। इस दौरान रूंधे गले से महिलाओं ने हे नवदुर्गा तुम्हें प्रणाम गाकर मां को अगले साल फिर से आने का आमंत्रण भी दिया।

माता की आराधना और भजन सुनने को नगर के पूजा पंडालों में लोगों का अच्छा-खासा हुजूम उमड़ गया। यहां तक कि दिन में आए कई लोग शाम का इंतजार होने तक पंडालों में भी अड्डा जमाए रहे और भजन में लीन रहें। कोरोना के कारण इस साल दुर्गा पूजा कें पंडालों की भव्यता तो पहले जैसे नहीं रही, लेकिन भक्तों में उत्साह और खुशी 2 साल पहले वाली ही दिखाई दी।

बंगीय पूजा पंडाल में गूंजी ढाक की थाप

वाराणसी के बंगाली टोला इलाके में बंगीय पूजा पंडालों में ढाक गूंज ने भक्तों का मन मोह लिया। वहीं कई अन्य पूजा पंडालों के बाहर देवी के भजन, पचरा और हिंदी व भोजपुरी गीतों ने माहौल को भक्तिमय कर दिया। नई सड़क स्थित सनातन धर्म, मछोदरी, प्रह्लाद घाट, अर्दली बाजार और शिवपुर के क्षेत्र में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक लाइटों की सजावट चंकाचौध कर दिया।

वहीं, रात 7 बजते-बजते शहर के सभी पूजा पंडाल भक्तों से पट गया। रात होते-हाेते जन सैलाब और भी बढ़ने लगा। हर साल नवरात्र पर रौनक रहने वाले हथुआ मार्केट, जगतगंज, बाबा मछोदरानाथ का पूजा पंडाल इस बार नहीं सजाया गया। इस वजह से यहां काफी सूनापन छाया रहा।

रात से ही विसर्जन

मां का विसर्जन कल सुबह से शुरू हो जाएगा। वहीं, बंगीय समाज के लोग प्रतिमा को आज रात से ही विसर्जित कर देंगे। इस दौरान मां के विदा होने से पहले पंडालों में लोगों में फोटोग्राफी लेने की होड़ लगी रही।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की लगी झड़ी

इन सबके अलावा आज नवमी की रात शहर में कई जगह पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए। BHU के संगीत एवं मंच कला संकाय से लेकर शहर के कई मशहूर कलाकारांें की प्रस्तुतियाें को सुनने लोग बड़ी दूर-दूर से आए थे।

बंगाली लोगों के पूजा पंडालों में पुरुषों ने धुनुची नृत्य तो वहीं महिलाओं के बीच शंखध्वनि की प्रतियोगिता हुई। इसमें गैर-बंगाली भी हिस्सा ले रहे थे। वहीं दूसरी ओर पंडालों के बाहर सजे बनारसी अंदाज के जलपान स्टालों पर काफी भीड़ जुटी थी। यहां पर मोमोज और बर्गर से लेकर बाटी-चोखा, दही-रसगुल्ला, रबड़ी, लस्सी, चाट पकौड़ी आदिक व्यंजनों के लुत्फ उठा रहे थे। इसके साथ ही तीर धनुष, तलावार, गुब्बारे बेचने वालों की भी आज काफी बल्ले-बल्ले रही।

इन जगह के पंडाल में उमड़ा सैलाब

छित्तूपुर, मंडुवाडीह, लहरतारा, पितांबरपुरा, आदमपुर, सदर बाजार, गोलगड्डा, जैतपुरा, लहरतारा, औरंगाबाद, भारत सेवा आश्रम संघ सिगरा, रामकृष्ण मिशन लक्सा, अकाल बोधन, लक्सा रोड, वाराणसी दुर्गोत्सव सम्मिलनी पांडेय हवेली, जिम स्पोर्टिंग क्लब भेलूपुर, काशी दुर्गोत्सव सम्मिलनी शिवाला, यंग ब्वायज क्लब पांडेय धर्मशाला, गिरजाघर आदि इलाकों में पूजा पंडालों पर मां दुर्गा के अंतिम दर्शन के लिए लोगों में काफी उत्साह देखा गया।

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