काशी आएंगे अनुवादक, सिखाएंगे तमिल बोलना-पढ़ना:हिंदी-तमिल में 60% शब्द एक जैसे; वाक्य रचना भी सेम टू सेम; तो इंग्लिश का क्या है काम

वाराणसी6 महीने पहले
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संस्कृत भारती के सहसंस्थापक और काशी-तमिल संगमम के आयोजक डॉ. चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा तमिल सीखने-जानने का शौक हो तो एक महीने चलने वाले इस काशी-तमिल संगमम में जरूर आएं। - Dainik Bhaskar
संस्कृत भारती के सहसंस्थापक और काशी-तमिल संगमम के आयोजक डॉ. चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा तमिल सीखने-जानने का शौक हो तो एक महीने चलने वाले इस काशी-तमिल संगमम में जरूर आएं।

उत्तर और दक्षिण भारत के बीच इंग्लिश ही क्यों कम्युनिकेशन ब्रिज का काम करती है। हम क्यों नहीं हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और असमिया में ही एक-दूसरे से बातचीत कर पाते हैं। ब्रिटिश शासन के देश से जाने बाद भी यही मानक सेट रहा कि राष्ट्र एकता के लिए इंग्लिश बहुत जरूरी है। यह उत्तर को दक्षिण से जोड़ने के लिए और कम्युनिकेशन गैप को भरने के लिए एक पुल है।

अगर आजादी के 75 साल बाद भी आपकी मानसिकता यही है, तो फिर आप गलत सोचते हैं। उत्तर के 8 हिंदी भाषी राज्यों में एक तो आधारभूत ढांचे की कमी की वजह से हिंदी, इंग्लिश के अलावा कोई दूसरी भाषा पढ़ाई ही नहीं जाती। वहीं, हम भी हिंदी भाषी दूसरी कोई भाषा को लिखना-पढ़ना नहीं चाहते। आपकी गलत फहमी दूर करते हुए बता दूं कि किसी भी भारतीय भाषा में 50-60% शब्द समान हैं। भारतीय भाषाओं की पैटर्न एक ही है। अक्षरमाला से लेकर वर्णमाला सब कुछ एक समान है। जबकि, इंग्लिश के साथ ऐसा नहीं है। जैसे I go to School में इंग्लिश की वाक्य रचना है, कर्ता, क्रिया, कर्मा। वहीं सभी भारतीय भाषाओं में-मैं स्कूल जाता हूं की वाक्य रचना में पहले कर्ता, कर्म और क्रिया आती है।

ये बातें संस्कृत भारती के सहसंस्थापक और काशी-तमिल संगमम के आयोजक डॉ. चमू कृष्ण शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि आज से काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शुरू हो रहे काशी-तमिल संगमम में आपको हिंदी के तमिल अनुवादक और तमिल के हिंदी अनुवादक मिलेंगे। काशी-तमिल संगमम में तमिल, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम सीखेंगे। पूरे महीने भर 200 से ज्यादा अनुवादक एंफीथिएटर ग्राउंड पर आएंगे। यहां पर सजे अलग-अलग 75 स्टालों पर वो हिंदी भाषियों को तमिल में बातचीत करना सिखाएंगे। आपको यहां पर तमिल भाषा की वर्णमाला, अक्षर, लिपि और वाक्य रचनाएं देखने-पढ़ने को मिलेंगी।

10% भी हिंदी भाषी नहीं भारतीय भाषा

डॉ. चमू शास्त्री ने कहा कि दक्षिण भारत के 60% लाेग हिंदी तो जानते हैं, मगर 10% भी हिंदी भाषी तमिल और दूसरी भाषा नहीं जानते। 8 हिंदी मातृभाषी राज्यों में आपको हिंदी और इंग्लिश के अलावा संस्कृत कहीं-कहीं पढ़ाई जाती है। हर एक भाषा को जब नहीं अपनाएंगे तब तक पूरा नहीं कर पाएंगे। जब तक भाषा के साथ आत्मीयता नहीं आएगी, तब तक हम नहीं सीख पाएंगे।

तमिल से हिंदी अनुवाद की हुई किताबें होंगी यहां

काशी-तमिल संगमम में नेशनल बुक ट्रस्ट, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेज के बुक स्टाल लग रहे हैं। यहां पर आपको तमिल लिट्रेचर और फिक्शन की किताबें हिंदी में ही होंगी। तमिलनाडु में बिकने वाली बच्चों की किताबें भी आप हिंदी में पा सकेंगे।

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