BHU के 3 प्रोफेसरों को 'पद्मश्री':बम हाउस के जनक प्रो. सूद, ध्रुपद महारथी पं. सान्याल और आयुर्वेदाचार्य प्रो. साहू को सम्मान

वाराणसी2 दिन पहले
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पंडित ऋत्विक सान्याल प्रो,. मनोरंजन साहू और प्रो. पीसी सूद। (बाएं से दाएं) - Dainik Bhaskar
पंडित ऋत्विक सान्याल प्रो,. मनोरंजन साहू और प्रो. पीसी सूद। (बाएं से दाएं)

इस गणतंत्र दिवस पर पद्म पुरस्कारों में आर्ट, साइंस और मेडिकल तीनों क्षेत्रों में काशी का स्थान है। BHU के 3 रिटायर प्रोफेसरों को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। इसमें देश के प्रख्यात न्यूक्लियर फिजिक्स के साइंटिस्ट प्रो. पीसी सूद, संगीत संकाय के पूर्व डीन प्रख्यात ध्रुपद गायक पंडित ऋत्विक सान्याल और BHU में क्षार सूत्र विशेषज्ञ रहे प्रो. मनोरंजन साहू के नाम हैं। तीनों विभूतियों को भारत सरकार ने पद्मश्री के लिए चुना है। प्रो. सान्याल और साहू ने प्राचीन भारत की खोती हुई कला और विज्ञान को पुनर्जीवित किया है। तो वहीं, प्रो. सूद ने BHU में कंप्यूटर सेंटर और पहले एटॉमिक रिसर्च लैब की स्थापना की थी। 93 साल के पीसी सूद वर्तमान में आंध्रप्रदेश में रहते हैं। मगर, उन्होंने BHU को तकनीक और आधुनिकता में काफी ऊंचाइयों पर लाकर खड़ा कर दिया है।

यह फोटो BHU के फिजिक्स डिपार्टमेंट की है। सबसे बीच में सफेद शर्ट में प्रो. पीसी सूद हैं, जिन्होंने 1972 के दौरान पीछे दिख रहे गुंबदाकार भवन यानी कि बम हाउस का निर्माण कराया था।
यह फोटो BHU के फिजिक्स डिपार्टमेंट की है। सबसे बीच में सफेद शर्ट में प्रो. पीसी सूद हैं, जिन्होंने 1972 के दौरान पीछे दिख रहे गुंबदाकार भवन यानी कि बम हाउस का निर्माण कराया था।

21वीं सदी में पंडित सान्याल ने ध्रुपद गायन शैली, तो वहीं, प्रो. साहू ने आयुर्वेद के क्षारसूत्र विधा को आधुनिक तरीके से प्रचलित किया। ये दोनों ही विधाएं साठ के दशक में लुप्त हो चुकीं थीं। इसे फिर से युवा भारत में पापुलर करने का श्रेय इन्ही दोनों हस्तियों को जाता है। सबसे खास बात कि दोनों की विभूतियाें का जन्म भी 1953 में ही हुआ था।

आइए तीनों विभूतियों के बारे एक-एक करके पढ़ते हैं ...

प्रो. पीसी सूद

प्रो. पीसी सूद।
प्रो. पीसी सूद।

BHU में 25 साल तक सेवा देते हुए 300 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित किए। BHU में 1972 में एटॉमिक रिसर्च लैब की स्थापना की। यह आज भी फिजिक्स डिपार्टमेंट में बम हाउस के नाम से जाना जाता है। प्रो. सूद 1980 में कंप्यूटर सेंटर के संस्थापक निदेशक भी रहे। शिक्षाविद के तौर पर 67 राष्ट्रीय और 62 अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों का हिस्सा रह चुके हैं। 90 के दशक में उन्होंने BHU छोड़ दिया था। इसके बाद वह आंधप्रदेश के सत्य साईं आश्रम में शिक्षक बने।रिटायर होने के बाद करीब 3 दशक से वह PhD छात्रों के सलाहकार के तौर पर काम करते हैं।

प्रो. मनोरंजन साहू

इलाज और शिक्षा के क्षेत्र में करीब 34 साल गुजारने के बाद प्रो. मनोरंजन साहू को एक बड़ा सम्मान मिला है। प्रो. साहू के प्रयासों से ही BHU में 2013 में देश का पहला क्षार सूत्र केंद्र बना था। वे ही इस सेंटर के कोआर्डिनेटर बनाए गए थे। प्रो. साहू BHU के अलावा सामाजिक संस्थाओं में भी बवासीर और भगंदर का मुफ्त इलाज किया करते थे। वे BHU आयुर्वेद संकाय के डीन और नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के संस्थापक निदेशक भी रह चुके हैं।

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में हुआ जन्म

2 मार्च, 1953 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में जन्म हुआ। प्रो. साहू ने जेबी रॉय स्टेट आयुर्वेदिक कॉलेज, कोलकाता से साल 1977 में स्नातक किया। 1982 और 1986 में BHU से आयुर्वेद में MD और PhD करने के बाद काठमांडू चिकित्सा संस्थान में लेक्चरर नियुक्त हुए। फिर, वाराणसी के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में प्रवक्ता बने। 1993 में BHU के आयुर्वेद फैकल्टी के शल्य तंत्र विभाग में रीडर नियुक्त हुए। इसके बाद 2003 में प्रोफेसर बने। 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) में आयुष संचालन समिति, केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं।

विदेशों में किया भारत का प्रतिनिधित्व

दो रिसर्च का पेटेंट और 32 अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन भी उनके नाम हैं। मलेशिया, इजिप्ट, पेरिस, ऑस्ट्रिया, चीन, दक्षिण कोरिया, बैंकॉक, नेपाल, वियतनाम और श्रीलंका आदि देशों में हुए आयुर्वेद सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

अब तक मिले सम्मान

आयुष विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, सरकार द्वारा 2008 में सम्मान, 2014 में वैद्य सुंदरलाल जोशी मेमोरियल अवार्ड और 2016 में हरिभाऊ परांजपे पुरस्कार शल्य शालाक्य पुरस्कार मिला।

पंडित ऋत्विक सान्याल ने 600 से ज्यादा संगीत कार्यक्रमों में ध्रुपद गायन की शिक्षा दी है।
पंडित ऋत्विक सान्याल ने 600 से ज्यादा संगीत कार्यक्रमों में ध्रुपद गायन की शिक्षा दी है।

पंडित सान्याल 50 देशों में कर चुके हैं ध्रुपद शो

बिहार के कटिहार में 12 अप्रैल, 1953 को जन्मे पंडित ऋत्विक सान्याल ने 600 से ज्यादा संगीत कार्यक्रमों में ध्रुपद गायन की शिक्षा दी है। विगत 40 साल में विश्व के 50 अलग-अलग देशों में ध्रुपद शो कर चुके हैं। प्रो. सान्याल के 50 से ज्यादा शिष्य दुनिया भर में ध्रुपद की लौ जला रहे हैं। धुपद की डागर परंपरा को आत्मसात कर धुपद आलाप की विशिष्ट तकनीक, कंठ संस्कार, परंपरागत और संस्थागत शिक्षण की अपनी विशिष्ट पद्धति विकसित की। पंडित सान्याल ध्रुपद गायक के साथ ही प्रोफेसर, रचनाकार और लेखक भी हैं।

मां ने दी संगीत की शिक्षा, पिता ने पढ़ाई फिलॉसफी

पंडित सान्याल के संगीत की शिक्षा गायिका और लेखिका माता रानू सान्याल के द्वारा शुरू हुई। IIT-BHU बांबे में फिलॉसफी के प्रोफेसर और पिता बटुक सान्याल से दर्शन की शिक्षा ली। संगीत में डागर घराने के विख्यात वीणा वादक उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर और गायक उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डागर के सान्निध्य में हुई। दर्शन शास्त्र में MA करने के बाद संगीत में MA और PhD प्रो. प्रेमलता शर्मा के निर्देशन में की। BHU के संगीत एवं मंच कला संकाय में डीन भी रहे।

अब तक पंडित सान्याल को मिले पुरस्कार...

  • केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2013
  • उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2002
  • उत्तर प्रदेश रत्न 2016
  • घ्रुपद सम्मान जयपुर 2007
  • धुपद मेला वाराणसी द्वारा स्वाति तिरुनल सम्मान 1995।