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वाराणसी के गंगा घाटों से ग्राउंड रिपोर्ट:चारों ओर पसरा सन्नाटा, अस्थि विसर्जन और पिंडदान करने लोग पहुंच रहे; नाविकों, फूल बेचने वालों और पंडा समाज पर रोजी का संकट गहराया

वाराणसी2 महीने पहले
अस्सी घाट पर पिंडदान करते परिजन।  
  • 10 हजार से ज्यादा नाविक, पंडा और तीर्थ पुरोहितों के परिवार घाटों किनारे रहते हैं
  • बंदी की वजह से गंगा पूजा करने नवदम्पत्ति भी न के बराबर पहुंच रहे हैं

काशी दुनिया में गंगा घाटों के लिए मशहूर है। कोरोना के चलते गुलजार रहने वाले 84 गंगा घाटों पर सन्नाटा पसरा है। यहां तक कि लगन के महीने में नवदंपती तक गंगा पूजा को करने बहुत कम पहुंच रहे हैं। दशाश्वमेध, शीतला, राजेंद्र प्रसाद, दरभंगा, मानमहल, अस्सी, भदैनी, तुलसी घाटों का भ्रमण किया गया तो अजीब सी खामोशी इन घाटों पर देखने को मिली। तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और नाविक परेशान दिखे। उनका कहना है कि जमा पैसा भी खत्म होने को है। नाविक बताते हैं कि पिंड दान और अस्थि विसर्जन करने वाले ही घाटों पर दिख रहे हैं।

पंडा और तीर्थ पुरोहित की जीविका घाटों से चलती है

तीर्थ पुरोहित सीताराम शास्त्री ने बताया रोज कुआं खोदना पानी पीना है। परिवार चलाने में अब दिक्कत शुरू हो गयी है। चहल पहल वाले घाटों पर लग रहा कोई अप्रिय घटना घट गई हो। पंडितों, पुरोहितों का परिवार परेशान हो रहा है। यजमान घाटों की ओर आ ही नही रहे हैं। अस्सी से लेकर राजघाट तक पांच हजार से ज्यादा परिवार घाटों पर होने वाले पूजा पाठ पर ही आश्रित रहता है। जिनमें माला फूल, छोटे दुकानदार, पंडा, पुरोहित शामिल हैं। पंडा भरत पांडेय ने बताया सब कुछ ठप्प है। केवल अस्थि कलश वाले लोग ही आ रहे। कोरोना ने हम जैसे लोगो और परिवारों पर दोबारा प्रहार आर्थिक रूप से किया है।

गुलजार रहने वाले अस्सी घाट पर पसरा सन्नाटा।
गुलजार रहने वाले अस्सी घाट पर पसरा सन्नाटा।

1500 से ज्यादा नावे गंगा में खड़ी है

बनारस नौकायन सेवा समिति के अध्यक्ष शंभूनाथ माझी ने बताया 10 हजार लोग करीब नावों से जुड़े हैं। एक लाख से ज्यादा परिजन परेशानी को झेल रहे हैं। महामारी के चलते बंदी ने रोजी रोटी को बंद सा कर दिया है। अस्सी घाट पर नाव चलाने वाले नाविक ने बताया पर्यटकों का आना बंद हो गया है। घाट पर केवल अस्थि विसर्जन, पिंड दान और वैवाहिक कार्यक्रम वाले लोग ही आ रहे हैं। घाट के बेंच टेबल सब खाली पड़े हैं। सूरज का कहना है कि पुश्तैनी काम छोड़ना न पड़ जाये।

कुछ नवदम्पत्ति गंगा पूजन करते दिखे।
कुछ नवदम्पत्ति गंगा पूजन करते दिखे।

फोटोग्राफरों और दुकानदारों की जीविका पर संकट

फोटोग्राफी करने वाले मनोहर ने बताया रोज सुबह से शाम हो जाता दो कस्टमर भी मिल जाए तो बहुत। पिंडदान वाले कुछ लोग याद के लिए फोटो खिंचवा रहे हैं। बहुत हालत खराब है। दुकानदार मुन्ना ने बताया बर्तन, पूजा सामग्री, फूल माला की दुकान है। खरीदार तो है ही नहीं और चोरी छिपे खोलने पर पुलिस वाले बहुत बोलते हैं। चालान काटने की बात कहते हैं। रोज कमाने वाले हम लोग तो सड़क पर आ जायेंगे।

घाटों पर खाली पड़ी नावे।
घाटों पर खाली पड़ी नावे।