बनारस में PM मोदी से अफसरों ने छिपाया नाला:जिन गंगा घाटों पर गिरते हैं शहर भर के नाले, वो जगह फूलों से ढंक दी गई

वाराणसी8 महीने पहलेलेखक: अविनाश रावत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को वाराणसी पहुंचे। वे यहां से कालभैरव के दर्शन कर सड़क के रास्ते खिड़किया घाट गए। इसी घाट से क्रूज में सवार होकर गंगा में प्रवेश किया और रविदास घाट पर उतरे, लेकिन मोदी से इन दोनों घाटों की सच्चाई फूलों की सुगंध और सजावट से छिपा ली गई। इन दोनों ही घाटों के किनारे सालों से शहर की गंदगी गंगा में गिराई जा रही है। खिड़किया घाट पर बड़ा नाला गंगा में मिलता है।

वहीं, रविदास घाट पर नदी में पूरे शहर की गंदगी लाकर गंगा में गिराया जा रहा है। दोनों ही घाटों के आसपास का पानी काला हो चुका है। लोग बदबू से परेशान रहते हैं। लोग बताते है कि इन दोनों घाटों पर कोई जाना तक पसंद नहीं करता।

12 महीने काला ही रहता है शाही नाले के पानी

मोदी जिस खिड़किया घाट से क्रूज में सवार हुए, वहीं पास में शाही नाला पूरे वाराणसी का सीवरेज समेटते हुए गंगा में मिल रहा है। यहां का पानी 24 घंटे और 12 महीने काला ही रहता है। लोग इसके आसपास भी गंगा स्नान करने से बचते हैं। यहां सीवरेज की बदबू इतनी तेज होती है कि यहां से गुजरने वाले अपनी नाक बंद कर लेते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी घाट से महज कुछ मीटर की दूरी से मोदी ने क्रूज में सवार होकर गंगा में प्रवेश किया।

शाही नाला पूरे वाराणसी का सीवरेज समेटते हुए गंगा में मिल रहा है।
शाही नाला पूरे वाराणसी का सीवरेज समेटते हुए गंगा में मिल रहा है।

पीएम मोदी दो बार और आएंगे वाराणसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में दो बार और आएंगे। उनके दौरे की तैयारियां भले ही जोर-शोर से हुई, लेकिन मंदिर उद्घाटन के लिए मोदी के क्रूज में चढ़ने और उतरने की जगहों को लेकर को लेकर चर्चाओं का दौरा शुरू हो गया है। मोदी बनारस के दो दिनों के दौरे पर आए हैं। इसके बाद 17 दिसंबर को काशी में महापौर सम्मेलन का उद्घाटन करने फिर से आएंगे। 23 को दिसंबर 1500 करोड़ की योजनाओं को लेकर वे तीसरी बार काशी आएंगे।

यहां का पानी 24 घंटे और 12 महीने काला ही रहता है।
यहां का पानी 24 घंटे और 12 महीने काला ही रहता है।

असि नदी नाले में तब्दील

मंदिर का लोकार्पण करने मोदी गंगा के रास्ते जिस रविदास घाट तक पहुंचे, वहां असि नदी शहर की गंदगी ढोकर गंगा में मिल रही है। असि कहने को नदी है लेकिन यह बड़े नाले में तब्दील हो चुकी है। यहां 200 क्यूबिक मीटर से ज्यादा सिल्ट जमा है। पानी काला हो चुका है। पूरे इलाके में बदबू फैली रहती है।

असी कहने को नदी है लेकिन यह बड़े नाले में तब्दील हो चुकी है।
असी कहने को नदी है लेकिन यह बड़े नाले में तब्दील हो चुकी है।

सजावट और फूलों से छिपाई गंदगी

गंगा में गंदगी मिलने की सच्चाई छिपाने के लिए अधिकारियों ने इन दोनों घाटों के आस-पास इतनी ज्यादा सजावट करवा दी कि नाला दिखाई ही न दे। वहीं मोदी के आने और जाने के लिए क्रूज को ऐसी जगह खड़ा कराया गया, जहां से उनकी नजर यहां तक पहुंचे ही नहीं। इतना ही नहीं, नालों की बदबू छिपाने के लिए यहां फूलों की सजावट के साथ खुशबूदार केमिकल का छिड़काव भी आज सुबह से ही किया जा रहा था।

लोग बताते हैं कि नाले की वजह से इस रास्ते से गुजरना तक कोई पसंद नहीं करता।
लोग बताते हैं कि नाले की वजह से इस रास्ते से गुजरना तक कोई पसंद नहीं करता।