श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर में 18 दंपतियों को मिलेगा मोक्ष:वाराणसी में भक्ति और सुख-सुविधा संग छूटेंगे प्राण; मुमुक्षु भवन की मंदिर प्रशासन करेगा देखरेख

वाराणसीएक वर्ष पहले
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वाराणसी के श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

वाराणसी के श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यहां पर गंगा घाट से बाबा के गर्भगृह तक हुआ निर्माण कार्य बहुत ही भव्य है। इन्हीं के भव्यता के बीच एक ऐसा भी भवन है, जहां पर लोग अपनी-अपनी मौत का इंतजार करते हैं।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मुमुक्षु भवन तैयार हो गया है, जहां पर 18 दंपती (36 लोग) अपनी मृत्यु का इंतजार करेंगे। काशी को मोक्ष की नगरी कहा गया है, इसलिए दूसरे राज्यों से लोग यहां पर मरने के लिए आते हैं। नियमित दिनचर्या का पालन करते हुए एक दिन पंचतत्व में वे विलीन हो जाते हैं।

श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मुमुक्षु भवन का हॉल।
श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मुमुक्षु भवन का हॉल।

मौत से पहले जिंदगी जीने की इच्छा होगी पूरी
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस मुमुक्षु भवन में कई तरह की आधुनिक सुविधाएं भी दी गईं हैं। AC और NON-AC कमरे, लंच-डिनर की व्यवस्था, कपड़े, इलाज, काशी में घूमना, मनोरंजन के हर संसाधन इस भवन में रहने वाले लोगों को मिलेगा। मौत से पहले जिंदगी जी लेने की इच्छा भी यहां पर पूरी होगी। इस भवन का एक शर्त है कि यहां पर केवल दंपती ही रह पाएंगे। वह भी जो बनारस का नहीं हो। मान्यता है कि काशी में कहीं भी प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां तो बाबा के धाम में ही मुमुक्षु भवन बनाया गया है, जो कि बेहद ही विशेष है। वहीं, खर्च की जिम्मेदारी अगर मोक्ष के लिए आए दंपती का परिवार नहीं उठा पाता है तो मंदिर प्रशासन व्यवस्था करेगा।

एडवांस सुख-सुविधाओं का भोग ही नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जीवन का भी पालन करना होगा। यहां हर रोज ब्रह्म मुहूर्त (भोर) में उन्हें शिवाष्टकम, शिवमहिम्न्न स्तोत्र, शिवतांडव स्तोत्र, शिवमहापुराण की कथा सुनाई जाएगी। गंगास्नान, जल का उपयोग, गीता का पाठ आदि रोजाना करना होगा। वहीं, धार्मिक कार्यों में भी उन्हें हाथ बंटाना होगा।

विश्वनाथ धाम में ही मुमुक्षु भवन बनाया गया है। जिसमें AC और NON-AC कमरे हैं।
विश्वनाथ धाम में ही मुमुक्षु भवन बनाया गया है। जिसमें AC और NON-AC कमरे हैं।

अस्सी पर 100 साल पुराना मुमुक्षु भवन
वाराणसी में इससे पहले भी कई मुमुक्षु भवन 100 साल से संचालित हो रहे हैं। मगर, काशी विश्वनाथ वाला भवन सबसे खास और आधुनिक होगा। अस्सी स्थित मुमुक्ष भवन में सामान्य लोगों के साथ दंडी संयासी भी रहते हैं। यहां की स्थिति अब खराब हो रही है। डोनर भी पीछे हटने लगे हैं। पहले यहां पर 200 से अधिक लोग मोक्ष की कामना लिए रहते थे। मगर, आज महज 70 लोग ही मोक्ष की प्राप्ति के लिए रहते हैं।

1 महीने से ज्यादा नहीं रह सकते यहां
नई सड़क स्थित मुक्ति भवन में मौत के अंतिम पड़ाव पर आ चुके लोग ही आते हैं। यहां कोई भी व्यक्ति अधिकतम 1 महीने ही रह सकता है। यदि इतने में उनके प्राण नहीं छूटे तो 2 दिनों के लिए भवन को छोड़ देना होता है। दो दिन बाद दोबारा आकर रह सकते हैं। इस भवन की भी आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। इसके अलावा गुरुबाग में एक शंकर आश्रम है, जहां पर 28 लोग मोक्ष की कामना लेकर रहते हैं। इसका संचालन दक्षिण भारतीय करते हैं और वे ही लोग इसमें निवास भी करते हैं।

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