केदारनाथ में PM बोले- विश्वनाथ धाम का काम लगभग पूरा:बहुत तेजी से हो रहा काशी का कायाकल्प, 40 दिन में बन जाएगा कॉरिडोर

वाराणसी3 महीने पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ धाम में कहा कि सारनाथ को बोधगया, कुशीनगर और श्रावस्ती समेत सभी शहरों से जोड़कर बौद्ध सर्किट का स्वरूप दिया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ धाम में कहा कि सारनाथ को बोधगया, कुशीनगर और श्रावस्ती समेत सभी शहरों से जोड़कर बौद्ध सर्किट का स्वरूप दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ धाम में कहा कि उत्तर प्रदेश में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ काशी का भी कायाकल्प जारी है। PM मोदी ने बताया कि वाराणसी में विश्वनाथ धाम पर बहुत तेज गति से काम चल रहा है। धाम का काम अब पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। बनारस से सारनाथ को बोधगया, कुशीनगर और श्रावस्ती समेत सभी नगरों से जोड़कर बौद्ध सर्किट का स्वरूप दिया जा रहा है। विश्व में बुद्ध से जुड़े पर्यटकों को आमंत्रित करने के लिए बड़े-बड़े कार्य यहां पर किए जा रहे हैं।

केदारनाथ मंदिर के बाहर परियोजनाओं के लोकार्पण के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि देश के चारो धाम में पर्यटन को बेहतर परिवहन के साथ जोड़ा जा रहा है। चार धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है। कोविड महामारी न आती तो अब तक काफी बेहतर स्थिति होती।

15 दिसंबर को पूरा होगा प्रोजेक्ट
वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम का 80% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट को 15 दिसंबर तक पूरा किया जाना है। पीएम मोदी ने नवंबर की शुरूआत में काशी में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की थी। उम्मीद है कि पीएम मोदी दिसंबर में ही या फिर नए साल की शुरुआत में विश्वनाथ धाम दुनिया भर के श्रद्धालुओं को समर्पित करेंगे। कॉरिडोर बन जाने से अब बाबा के गर्भगृह की छत से मां गंगा का दीदार होगा।

कंकर-कंकर में जगाना है शंकर का भाव
केदारनाथ धाम में प्रधानमंत्री ने कहा कि समय के दायरे से निकल कर भयभीत होना अब भारत को मंजूर नहीं है। स्वामी शंकराचार्य ने जो ऊर्जा प्रज्ज्वलित की थी, आज भारत उसे गतिमान बनाए है। स्वामी विवेकानंद और महान विभूतियां यहां पर प्रकट हुईं। ये भारत इन्हीं महान लोगों की प्रेरणा पर जीवित है। हम शाश्वत पर विश्वास करके आगे चलने वाले लोग हैं। स्वाधीनता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों से लोगों को परिचित कराएं। आजादी के अमृत काल में कंकर-कंकर में शंकर का भाव जग सकता है।