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वाराणसी पहुंचे राष्ट्रवादी विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ:बोले- जिन मंदिरों को लुटेरों ने लूटा उनकी यथास्थिति क्यों बनी रहे, माइनॉरिटीज कमीशन का कोई आधार नहीं

वाराणसी4 महीने पहले
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पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ। - Dainik Bhaskar
पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ।

राष्ट्रवादी विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने शनिवार को वाराणसी में कहा कि कुछ घोटाले संसद में संविधान के तहत किए गए हैं। कोई लुटेरा आपके घर को लूट ले। आप जब सरकार के पैसे जाएं तो वह कहे कि लूट तो लिया, लेकिन अब यथास्थिति बनी रहने दें। ऐसे ही 1991 प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट इस देश में बना। भारत की संसद को इस बात का कोई अधिकार नहीं है कि मेरे बाप-दादाओं के जिन मंदिरों को लुटेरों ने लूट लिया है उसे हम वापस न ले सकें।

उन्होंने रातों रात अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसी के दबाव में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट बनाया। इस कानून के तहत भारत में काशी और मथुरा सहित अन्य जगहों पर जो 30 हजार मंदिर तोड़े गए हैं, उनकी यथास्थिति बनी रहे। आखिर ऐसा क्यों है। इस पर देश के लोगों को चर्चा करनी चाहिए और सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।

40 हजार वाले अल्पसंख्यसक और 16 करोड़ भी

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि 1992 में सरकार ने किसी कारण से और किसी दबाव में यह अध्यादेश जारी कर दिया कि देश में 5 पंथ अल्संख्यक हैं। 1993 में नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज बना दिया। अब जब आरटीआई से जानकारी मांगी गई तो पता लगा कि नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज का कोई आधार ही नहीं है। उसके तहत 40 हजार पारसी भी अल्पसंख्यक हैं और 17 करोड़ मुसलमान भी अल्पसंख्यक हैं। आखिर कोई तो पारदर्शी नियम होना चाहिए था।

इसी तरह से 1995 में वक्फ प्रॉपर्टी एक्ट में संशोधन किया गया। 2005 में सच्चर कमेटी लाकर खड़ा कर दिया गया। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में राष्ट्रपति के दस्तखत नहीं है। इस कमेटी की सिफारिश पर देश में 5000 करोड़ का सालाना बजट हर साल मुसलमानों को दिया जाता है। इस तरह से भारतीय संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जो लोग टैक्स देते हैं उन्हें सरकार से यह पूछना चाहिए कि आखिर हमारे लिए और हमारे बच्चों के लिए कहां क्या सुविधाएं दे रहे हैं।

हिंदू नगण्य फिर भी मुस्लिम अल्पसंख्यक

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कुछ राज्यों में हिंदुओं की संख्या नगण्य है, इसके बाद भी मुस्लिम ही अल्पसंख्यक हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लक्षद्वीप में 2 प्रतिशत, मेघालय में 11 प्रतिशत, नागालैंड में 8 प्रतिशत, मणिपुर में 31 प्रतिशत, अरुणाचल में 29 प्रतिशत, मिजोरम में 2 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 28 प्रतिशत और पंजाब में 38 प्रतिशत हिंदू हैं। इन राज्यों में वास्तव में हिंदू अल्पसंख्यक हैं लेकिन इसके बाद भी यहां मुसलमान ही अल्पसंख्यक कहलाते हैं और सारी सुविधाएं लेते हैं। आखिर यह कहां का न्याय हैं और संविधान के समानता के अधिकार का पालन कहां हो रहा है।

वैसे तो सुप्रीम कोर्ट भी तमाम मुद्दों पर स्वत: संज्ञान ले लेता है लेकिन ऐसे गंभीर मसलों पर उसका ध्यान नहीं जाता है। ऐसे गंभीर विषयों को सरकार और सुप्रीम कोर्ट को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि देश भर में इन मुद्दों को लेकर वह समाज के लोगों से चर्चा करते रहते हैं और इसी कड़ी में सूरत से वाराणसी आए हैं।

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