2 दिन बाद कॉलोनी पहुंचे विधायक, धरना कराया समाप्त:लापरवाही के लिए अधिकारियों को फटकारा, पास पाइनलाइन में फिर से लीकेज; विस्थापित हो रहे लोग

वाराणसी10 दिन पहले
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वाराणसी के अस्सी घाट स्थित गंगोत्री विहार काॅलाेनी में खंडहर बन चुके मकानों के लोग धरने पर बैठ गए हैं। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के अस्सी घाट स्थित गंगोत्री विहार काॅलाेनी में खंडहर बन चुके मकानों के लोग धरने पर बैठ गए हैं।

वाराणसी के अस्सी घाट स्थित गंगोत्री विहार काॅलाेनी में खंडहर बन चुके मकानों के लोग धरने पर बैठ गए। रात से ही यहां पर कई लोग अपना सामान लेकर विस्थापित होने लगे थे। वहीं जिस पाइपलाइल लीकेज की मरम्मत हुई थी, वह फिर से खराब हो गया और सुबह के वक्त पानी ओवरफ्लो करने लगा। इससे नाराज होकर कॉलोनी वासी धरना देने लगे। इसमें घर की महिलाएं भी शामिल थीं।

कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने 2 दिन बाद गंगोत्री विहार का किया निरीक्षण।
कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने 2 दिन बाद गंगोत्री विहार का किया निरीक्षण।

हालांकि घटना के 2 दिन बाद आज देर शाम पहुंचे कैंट विधायक ने आश्वासन देकर धरना खत्म करा दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि समस्या का कोई समाधान प्रशासन नहीं निकाल रहा है।

कोई अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहा है। इस पर शाम तक धरनास्थल पर पहुंचे कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने जलनिगम और ESEL के अधिकारियों को फटकार लगाई। ESEL के प्रोजेक्ट मैनेजर पल्लव श्रीवास्तव और जलनिगम के इंजीनियर एसके वर्मन से कहा कि लाइन के नीचे स्टोन और दीवाल खड़ी की जाए। कहा कि जलनिगम और कार्यदाई संस्था के लोगों की लापरवाही से ऐसा मामला सामने आया है। उन्होंने लोहे के पाइप में लगी सीमेंट का ज्वाइंट देख अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई।

क्षतिग्रस्त मकान में कुछ इस तरह से सो रहा व्यक्ति।
क्षतिग्रस्त मकान में कुछ इस तरह से सो रहा व्यक्ति।

धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि जांच की बात कहकर सभी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। देर रात लोगों का यहां से पलायन होने लगा था। करीब 2 दर्जन से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। थोड़ी देर तक चले वार्ता के बाद अधिकारियाें ने पाइप के साइड में पायलिंग कर प्लांट के सामने से लेकर 70 मीटर के दूरी तक के दीवार चढ़ाने का फैसला लिया। यह काम गुरुवार को दोपहर से शुरू करने की बात कहकर विधायक सौरभ और अधिकारियों लोगों का धरना समाप्त कराया।

इसी पाइपलाइन में फिर से हुआ लीकेज।
इसी पाइपलाइन में फिर से हुआ लीकेज।

ध्ररनारत लोगों का कहना है कि प्लांट चल रहा है। पाइपलाइन में फोर्स से पानी आ रहा है और रिसाव भी तेज है। पीड़ित परिवार कॉलोनी के मंदिर और दूसरों के घरों में अपना दिन-रात काट रहे हैं। मंगलवार को निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने कहा था कि IIT-BHU और जलकल विभाग इस समस्या का समाधान खोजेंगे। फिलहाल, अभी फौरी राहत इन प्रभावित लोगों को अभी तक नहीं दी गई।

विस्थापन को मजबूर हुए लोग।
विस्थापन को मजबूर हुए लोग।

टूटे मकानों की हो रिपेयरिंग

धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि पाइपलाइन को बंद कर उनकी समस्या का निदान किया जाए। जो घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं उनकी रिपेयरिंग कराई जाए। घर टूटने के बावजूद लोग वहां पर रहने को मजबूर हैं। ऐसी क्या मजबूरी है कि वाराणसी प्रशासन हमारी मांगों को दरकिनार कर रहा है। मानक के विपरीत यहां पर पाइपलाइन लाई गई जिससे यह संकट आ खड़ा हुआ है।

खंडहर बन चुके मकानों के लोगों ने मंदिर में शरण ले रखा है।
खंडहर बन चुके मकानों के लोगों ने मंदिर में शरण ले रखा है।

इस तट पर भी टकराता है गंगा का पानी

IIT-BHU में सिविल इंजीनियरिंग के एक वैज्ञानिक ने बताया कि इस तबाही के पीठे महज पाइपलाइन ही नहीं बल्कि और भी कई कारण हैं। यह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है, यहां पर पानी का दबाव बना हुआ है। वहीं इस क्षेत्र के तटों से गंगा का पानी तेजी से टकराता है, जिस कारण यहां पर किनारों की कटाई भी तेज होती है। ऐसे में यहां पर आबादी का रहना ही सुरक्षित नहीं है।