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  • Responsibility Of River Conservation On The Ganga Watchmen And Fishermen Of Varanasi; If Only 10% Of The Fishes Survive, The Ecosystem Will Remain Healthy.

75 हजार मछलियां बनेंगी 40 हजार मछुआरों का सहारा:वाराणसी के गंगा प्रहरियों व मछुआरों पर गंगा की रखवाली की जिम्मेदारी; 10% मछलियां ही बच जाएं तो दुरुस्त रहेगा इकोसिस्टम

वाराणसीएक वर्ष पहले
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गंगा में मछली छोड़ते अधिकारी और NDRF के जवान। - Dainik Bhaskar
गंगा में मछली छोड़ते अधिकारी और NDRF के जवान।

वाराणसी में 75 हजार मछलियां गंगा में छोड़े जाने से मछुआरों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। शुक्रवार शाम मत्स्य विभाग द्वारा कई प्रजातियों (रोहू, भाकुर, नयन और कतला) की मछलियों को छोड़ा गया है। अब वाराणसी के 40 हजार मछुआरों ने कहा है कि ये काम उनकी माली हालात को बेहतर करेगा। निषाद, साहनी, मल्लाह, मछुआरा केवट, कोल, तियर, बथवा और चांईं समुदाय के लाखों लोगों के जीवन निर्वाह का साधन ही गंगा और मछलियां हैं।

मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने गंगा प्रहरियों और इन समुदाय के लोगों को गंगा रखवाली और गंगा इकोसिस्टम को बेहतर रखने की जिम्मेदारी दी है। कहा है कि 75 हजार में से 10 प्रतिशत भी मछलियां बच जाती हैं तो यह गंगा और उस पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित होगा। वहीं गंगा में रोजाना 40,000 से ज्यादा मछुआरे मछली पकड़ते हैं और यह रिवर रांचिंग इनके जीवन निर्वाह की वजह बनने जा रहा है।

विलुप्त होने के कगार पर मछलियां

पिछले दशक में गंगा में 80 फीसदी मछलियां समाप्त हो चुकीं हैं, इससे मछुआरों का गुजारा बेहद मुश्किल से हो पा रहा है। रिवर रांचिंग उनके लिए उम्मीद बनकर आया है। गंगा प्रहरी संयोजक दर्शन निषाद ने बताया कि गंगा में रोहू, भाकुर, नयन और कतला विलुप्त होने की कगार पर हैं। काफी प्रयास राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन और कछुओं को बचाया जा रहा है। सुजाबाद, सराय मुहाना, कैथी और डॉल्फिन सेंटर पर इनकी ठीक-ठाक संख्या देखी जा सकती है। नदी, तालाब, पोखरे आदि में एक्वेटिक एनिमल में इनके संरक्षण के लिए कैंपेन चलाया जा रहा है।

गंगा प्रहरी और मछुआरा समुदाय के लाेग।
गंगा प्रहरी और मछुआरा समुदाय के लाेग।

गंगा को रखें साफ तो आपकी अर्थव्यवस्था रहेगी बेहतर

मत्स्य विभाग उपनिदेशक एनएस रहमानी व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद प्रसाद, वनाधिकारी महावीर कौलजगी, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण केरल के निदेशक एम कार्थिकेयन समेत कई अधिकारियों ने अस्सी से लेकर राजघाट तक मछलियां छोड़ी। अधिकारियों ने कहा कि गंगा में मछलियों की संख्या बढ़ाने के लिए जरूरत है साफ-सफाई की। मछुआरे मछली पकड़ने के साथ ही गंगा में होने वाली गंदगी और प्रदूषण के बारे में अधिकारियों को सूचित करते रहें। उनकी रिपोर्ट के आधार पर गंगा के पारिस्थितिक तंत्र को बचाया जा सकेगा। वहीं इससे मछलियों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी भी होगी और मछुआरों की अर्थव्यवस्था पर कोई चोट नहीं पहुंचेगा।

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