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BHU IIT की उपलब्धि:सड़कों की गुणवत्ता सुधारने के लिए MOU पर हुआ हस्ताक्षर; केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा- सड़कों को बनाने में क्वालिटी से समझौता न हो

वाराणसी4 दिन पहले
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बीएचयू में आयोजित वर्चुअल बैठक में शामिल हुए नितिन गड़करी। - Dainik Bhaskar
बीएचयू में आयोजित वर्चुअल बैठक में शामिल हुए नितिन गड़करी।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित BHU IIT में जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड की ओर से सड़कों की गुणवत्ता सुधारने के लिए सड़क अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इसके लिए शुक्रवार की शाम वर्चुअल बैठक में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर BHU IIT के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन और जीआरआईएल के अध्यक्ष विनोद कुमार अग्रवाल ने हस्ताक्षर किया। इस मौके पर वर्चुअल बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस उपलब्धि पर BHU IIT और ग्रिल को बधाई देते हुए कहा कि क्वालिटी को कम किए बगैर सड़कों की गुणवत्ता को सुधारा जाए।

स्टील और सीमेंट का उपयोग कम करने के लिए करें शोध

वर्चुअल बैठक में गडकरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को भी मदद मिले, यही हमारा प्रमुख उद्देश्य है। ग्रिल जैसी निजी सेक्टर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान का इस विषय पर साथ काम करना बेहद गर्व की बात है। साॅलिड वेस्ट मैटैरियल का सड़क निर्माण में उपयोग बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने आईआईटी के शोधकर्ताओं का आह्वान किया कि सड़क और पुलों के निर्माण में स्टील और सीमेंट का उपयोग कम करने के लिए शोध करें। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि यह एमओयू सड़क निर्माण की गुणवत्ता बढ़ाने और खर्चों को कम करने के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा।

5 साल के लिए किया गया है समझौता

प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि यह समझौता ज्ञापन 5 साल की अवधि के लिए है। संस्थान के शिक्षाविद और देश के अन्य एक्सपर्ट राजमार्ग सुरक्षा विकास परियोजना के तहत सड़क सुरक्षा, पर्यावरण और सामाजिक प्रभावों से संबंधित अध्ययन करेंगे। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य देश में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल सड़कों के निर्माण के प्रति शोध करना है।

इसमें बिटुमिनस (डामरी) मिक्स की रिसाइक्लिंग, भारतीय सड़कों के लिए मैकेनिस्टिक फुटपाथ डिजाइन और साॅलिड वेस्ट मैटेरियल्स से पेवमेंट बनाने पर शोध, बिटुमिनस मिक्स के लिए पर्फामेंस बेस्ड मिक्स डिजाइन का विकास करना प्रमुख लक्ष्य रहेगा। उन्होंने बताया इस प्रोजेक्ट को संस्थान में लाने में सिविल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. निखिल साबू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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