5 दिन बाद आएंगे PM और BHU अस्पताल में हड़ताल:इलाज नहीं, तो वेतन भी नहीं; महामारी एक्ट लगते ही JR को खाली करने होंगे हॉस्टल

वाराणसीएक महीने पहले
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BHU अस्पताल के इमरजेंसी से निराश होकर मरीज के साथ लौटते जौनपुर से आए परिजन। - Dainik Bhaskar
BHU अस्पताल के इमरजेंसी से निराश होकर मरीज के साथ लौटते जौनपुर से आए परिजन।

5 दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी विजिट होने वाली है। इधर, पूर्वी UP के एम्स कहे जाने वाले BHU अस्पताल में इलाज कार्य लगभग बाधित हो चुका है। वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में करीब 200 से अधिक जूनियर डॉक्टरों (JR) का हड़ताल जारी है। अस्पताल प्रशासन के तमाम मान-मनौव्वल और धमकियों के बावजूद भी जूनियर डॉक्टर समझने को तैयार नहीं हो रहे हैं। डॉक्टर NEET-PG कांउंसिलिंग से कम कुछ भी मानने को तैयार नहीं हो रहे हैं। इधर BHU ने जूनियर रेजिडेंट के इंटर्न के रूप में अस्थाई नियुक्ति का विज्ञापन भी निकाल दिया है।

BHU अस्पताल की इमरजेंसी में खाली पड़े रहे स्ट्रेचर बता रहे हैं मरीजों के आने की संख्या घट गई है। सामान्य दिनों में यहां पर मरीजों को स्ट्रेचर मिलता ही नहीं है।
BHU अस्पताल की इमरजेंसी में खाली पड़े रहे स्ट्रेचर बता रहे हैं मरीजों के आने की संख्या घट गई है। सामान्य दिनों में यहां पर मरीजों को स्ट्रेचर मिलता ही नहीं है।

वहीं BHU के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के डायरेक्टर प्रो. बीआर मित्तल और डीन ने जूनियर रेजीडेंट्स को जारी एडवाइजरी में कहा है कि एकेडमिक और इलाज कार्य न करने के लिए उनके ऊपर महामारी एक्ट की कार्रवाई हो सकती है। जिला प्रशासन को संस्तुति भेज दी गई है। ऐसे में उन्हें अपने हॉस्टल भी खाली करने होंगे। अब अस्पताल और विभाग में न आने से उन्हें अनुपस्थित किया जा रहा है। जिस वजह से उनका वेतन भी नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा जूनियर रेजिडेंट द्वारा की जा रही इस अवैध गतिविधि से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को भी अवगत कराया जाएगा। इन सबके बावजूद डॉक्टर मानने को तैयार नहीं हुए हैं।

500 मरीज नर्स और सीनियर रेजिडेंट के भरोसे
अस्पताल के सबसे संवेदनशील अंग इमरजेंसी में अभी भी जूनियर रेजिडेंट नहीं आ रहे हैं। यहां पर मौजूद कुछ विभागों के सीनियर रेजिडेंट और नर्सों पर आपातकाल इलाज की पूरी व्यवस्था है। इमरजेंसी में रोजाना 500 से अधिक मरीज आते हैं, जिनमें से 50 को वार्ड में भर्ती किया जाता है। वहीं अस्पताल की OPD में कल तक 3898 मरीज रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 50 मरीजों को भर्ती किया गया और 39 को डिस्चार्ज कर दिया गया।

OPD और OT पर पड़ रहा बुरा असर

जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल की वजह से जनरल OPD और OT में सर्जरी का भी काम प्रभावित हो रहा है। डॉक्टरों की कमी से रोजाना कई मरीज लौटा दिए जा रहे हैं। उनकी देखभाल करने वाले हाथ की कमी हो गई है। मरीजों को BHU से वापस दूसरे निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। इससे अस्पताल में इलाज की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। यहां पर पूर्वांचल के 17 जिलों, आधा बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और नेपाल तक से मरीज रोजाना अपने इलाज के लिए आते हैं। उनका उतनी दूर से आना यहां पर उनके लिए भारी पड़ रहा है।

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