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रोमांच संग बेहद सुरक्षित है सैम मानिक शॉ क्रूज यात्रा:चुनारगढ़ किला से काशी की तरफ बढ़ रहा क्रूज, पर्यटकों ने शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर और फांसी घर को देखा; 140 KM की है ये ऐतिहासिक यात्रा

वाराणसीएक महीने पहले
सैम मानिक शॉ क्रूज में सवार 250 लोग बने 140 किलोमीटर की बेहद रोमांचक यात्रा के साक्षी।

सैम मानिक शॉ क्रूज की चुनार यात्रा जारी है। सुबह कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर हर-हर महादेव की गूंज के साथ यह गंगा यात्रा प्रारंभ किया। बेला और गुलाब संग कई खुशबूदार फूलों से क्रूज की सजावट की गई। अलकनंदा क्रूज लाइन संचालक विकास मालवीय, कैप्टन प्रदीप अधिकारी और टेक्निकल हेड गोपल चंद्रा कायल के साथ कुल 15 स्टाफ की टीम है।

यात्रा शुरू होते ही क्रूज पर नाश्ता का स्टाल लग गया। इसमें बनारस के पारंपरिक फूड बाटी चोखा परोसा गया। इसके साथ ही इडली सांभर, हलवा, चाट, टिकिया व छोले भी परोसा गया। यात्रियों ने जमकर लज्जतदार नाश्ते का लुत्फ उठाया। जिसकी खुशबू अंदर कॉकपिट से आ रही है। बाबा काशी विश्वनाथ और हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ सैम मानिक शॉ अब 140 किलोमीटर की बेहद रोमांचक यात्रा शुरू हुई है।

धर्म का भ्रमण तो कई बोले...गंगा सफारी
आज सुबह 9 बजे से भारत में पहली बार किसी नदी के रास्ते इतना बड़ा नौकायन शुरू हुआ है। इस यात्रा के साक्षी बनने वाले 250 लोगों में कोई इसे धर्म का भ्रमण तो कोई गंगा सफारी बता रहा है। वहीं, कुछ इसे विरासत और कल्चर विहार का भी नाम दे रहे हैं। वाराणसी के संत रविदास घाट से होकर बाबा शूलटंकेश्वर पर मत्था टिकाते हुए यह क्रूज पर्यटकों को चुनारगढ़ के किले तक ले गई। यहां पुराने फांसी घर, सोनवा मंडप की सैर के बाद क्रूज वापस वाराणसी की तरफ बढ़ रहा है।

कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर हर-हर महादेव की गूंज के साथ यह गंगा यात्रा प्रारंभ किया।
कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर हर-हर महादेव की गूंज के साथ यह गंगा यात्रा प्रारंभ किया।

क्रूज में सुरक्षा के तमाम इंतेजाम, बिस्किट का 1 बाइट मिटा देगा हफ्ते भर की भूख
सबसे गौर करने वाली बात है कि यह यात्रा जितनी अधिक आध्यात्मिक है, उससे भी कहीं ज्यादा सुरक्षित। इस क्रूज पर एक लाइफ रेफ्ट बॉक्स है। इसे आपातकालीन स्थिति में नदी में छोड़ दिया जाता है तो वह एक बंद बोट की शक्ल में आ जाती है। इस बोट में 20 व्यक्ति आराम से रेस्क्यू किए जा सकते हैं।

वहीं, इसमें एक खास किस्म की बिस्किट भी होती है, जिसका 1 बाइट खा लिया तो सप्ताह भर भूख ही नहीं लगती। इसके साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स, डेली इस्तेमाल के सामान और सैटेलाइट को सिग्नल देने का एक यंत्र भी फिट किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से क्रूज पर कई फ्लोटिंग रोप भी हैं, जो कि तैरता रहता है। पानी में अगर कोई गिर जाए तो इस रोप को पकड़कर वह सुरक्षित रहेगा। वहीं, सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट भी रखा गया है।

सोनवा मंडप और भर्तृहरि की समाधि का दर्शन होगा खास
दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर लंच की थालियां सज जाएंगी। एयर कंडीशन से लैस हॉल में सामूहिक भोजन करते-करते करीब 2 बजकर 30 मिनट पर क्रूज चुनार के किले पर पहुंचेगा। वहां से किले में सोनवा मंडप, भर्तृहरि की समाधि, बाबर और औरंगजेब का हुक्मनामा, शेरशाह सूरी का शिलालेख, आलमगीरी मस्जिद, बावन खंभा और रहस्मयी बावड़ी, जहांगीरी कक्ष, रनिवास, मुगलकालीन बारादरी, तोपखाना व बंदी गृह, लाल दरवाजा, सोलर क्लॉक और वारेन हेस्टिंग के बंग्ले के बारे में गाइड से जानकारियां लेंगे। इसके बाद क्रूज दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर वाराणसी के लिए वापस निकलेगी और शाम 5 बजे तक रविदास घाट पर इस ऐतिहासिक यात्रा का पहला पड़ाव पूरा होगा।

अलकनंदा क्रूज लाइन संचालक विकास मालवीय, कैप्टन प्रदीप अधिकारी और टेक्निकल हेड गोपल चंद्रा कायल के साथ कुल 15 स्टाफ की टीम है।
अलकनंदा क्रूज लाइन संचालक विकास मालवीय, कैप्टन प्रदीप अधिकारी और टेक्निकल हेड गोपल चंद्रा कायल के साथ कुल 15 स्टाफ की टीम है।
140 किलोमीटर की बेहद रोमांचक यात्रा के पहले पड़ाव में 250 लोग साक्षी बनेंगे।
140 किलोमीटर की बेहद रोमांचक यात्रा के पहले पड़ाव में 250 लोग साक्षी बनेंगे।

उपेक्षित चुनार को मिलेगा पर्यटकों का हौसला
अरसे से शूलटंकेश्वर और चुनार का किला उपेक्षित अवस्था में रहा। मगर, अब इस गंगा की यात्रा के बाद यहां के पर्यटन कारोबार को भी पंख लग सकते हैं। वहीं, रास्ते में पड़ने वाले हर छोटे-बड़े घाटों, मंदिरों, गंगा के जलीय जीवों और गंगा की विशालता से रूबरू कराएगा।

क्रू मेंबर के लिए बने कमरे।
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