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12 से 14 नवंबर तक संस्कृति संसद का आयोजन:देश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में जुटेंगे विद्वान, रूपा गांगुली बोलीं- सांस्कृतिक विमर्श की दिशा तय करने में मिलेगी मदद

वाराणसीएक महीने पहले
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रूपा गांगुली, राज्यसभा सांसद। - Dainik Bhaskar
रूपा गांगुली, राज्यसभा सांसद।

देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में आगामी 12 से 14 नवंबर तक संस्कृति संसद-2021 का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी बुधवार को छोटी गैबी, सिद्धगिरि बाग स्थित ब्रह्मनिवास में अखिल भारतीय संत समित व गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती और राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली ने दी। कहा कि संस्कृति संसद का आयोजन देश के अंदर सांस्कृतिक विमर्श की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अलग-अलग विषयों पर होगा संवाद

रूपा गांगुली ने कहा कि संस्कृति संसद के तीन सफल आयोजन के बाद अब यह एक परंपरा का रूप ले चुका है। पिछली बार संस्कृति संसद का आयोजन 2019 में प्रयागराज में कुंभ के अवसर पर हुआ था। इस बार आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर अखिल भारतीय संत समित और श्री काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में संस्कृति संसद का आयोजन काशी में किया जा रहा है।

इस आयोजन में संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी और अलग-अलग क्षेत्र के विद्वान संवाद कर अपना दृष्टिकोण देश के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए काशी दूसरा घर है। इसलिए काशी हमें सर्वाधिक प्रिय है।

स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती।
स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती।

सनातन धर्म से लेकर शिक्षा नीति तक होगी चर्चा

स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि संस्कृति संसद के पहले दिन सनातन धर्म के अनुत्तरित प्रश्नों पर चर्चा होगी। दूसरे दिन चर्चा के विषय राष्ट्रीय सुरक्षा में आम नागरिकों की भूमिका, हिंदू होलोकास्ट और कलियुग की प्रत्यक्ष तीर्थ मां गंगा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद होगा। संस्कृति संसद के आखिरी दिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति, कला-संस्कृति के आवरण में परोसी जा रही विकृति, योग और मंदिर सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक गतिविधि के केंद्र कैसे बनें जैसे विषयों पर विद्वतजन संवाद करेंगे।

स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि ऐसे आयोजन बहुत जरूरी हैं। इसलिए विद्वतजनों के परामर्श के आधार पर ही इस बार संस्कृति संसद का आयोजन देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में किया जा रहा है।

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