RTI का जवाब मिला 'गूगल पर सर्च कर लो':वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने एक एक्टिविस्ट को नहीं दिया दान और दक्षिणा में मिले पैसों और चढ़ावे का व्यौरा

वाराणसी19 दिन पहले
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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पर खर्च का व्यौरा छिपाने को लेकर 1 RTI एक्टिविस्ट ने उठाए सवाल। इससे पहले भी मंदिर प्रशासन को हाइकोर्ट में घसीट चुका है। - Dainik Bhaskar
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पर खर्च का व्यौरा छिपाने को लेकर 1 RTI एक्टिविस्ट ने उठाए सवाल। इससे पहले भी मंदिर प्रशासन को हाइकोर्ट में घसीट चुका है।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पर खर्च का व्यौरा छिपाने को लेकर 1 RTI एक्टिविस्ट डॉ. रविंद्र सहाय ने आपत्ति जताई है। उन्होंने RTI करके मंदिर प्रशासन के आय-व्यय और एक्ट से संबधित जानकारियां मांगी थी, जिसका जवाब देने से इन्कार कर दिया गया है। वहीं, एक सवाल के जवाब में बताया कि इसका जवाब गूगल बाबा देंगे। वहां से सर्च लें। वहां तो हर सवाल का जवाब है तो क्या RTI की व्यवस्था बंद कर देनी चाहिए।

RTI एक्टिविस्ट डॉ. रविंद्र सहाय
RTI एक्टिविस्ट डॉ. रविंद्र सहाय

RTI एक्टिविस्ट डॉ. सहाय ने यह भी कहा कि काशी विश्वनाथ धाम में हो रहे खर्चों और कर्ज के बारे में जनता को पता होना चाहिए। यह व्यक्ति का अधिकार है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर भक्तों द्वारा चढ़ावे और दान-दक्षिणा से कितना पैसा मिला और इनका किस-किस मद में उपयोग हो रहा है इसे बताए जाने में आखिरकार क्या दिक्कत है। मंदिर प्रशासन को सूचना गुप्त रखने की क्या जरूरत है। विश्वनाथ मंदिर के प्रशासन के बड़े ओहदे पर बैठे लोग जनता को क्यों गुमराह कर रहे हैं।

RTI एक्टिविस्ट द्वारा पूछे गए सवाल।
RTI एक्टिविस्ट द्वारा पूछे गए सवाल।
मंदिर प्रशासन से मिला RTI का जवाब पत्र।
मंदिर प्रशासन से मिला RTI का जवाब पत्र।

4 सवाल का जवाब मिला जीरो
मंदिर कार्यालय के लेखा लिपिक दिनेश कुमार पांडेय के सहायक लेखा अधिकारी बनने की प्रक्रिया,
कॉरिडोर योजना में कुल कितने सेवइतनामा कराए गए। किस मकान नंबर में किस देवी-देवता का मंदिर था। विश्वनाथ मंदिर ने 2019 में एक निजी बैंक से कितना लोन लिया। उस लोन का भुगतान कैसे किया। वहीं अंतिम सवाल में श्रीकाशी विश्वनाथ अधिनियम-1983 की धारा 30 की प्रति मांगी थी। मगर मंदिर प्रशासन ने जवाब में सूचना के अधिकार कानून के धारा 8(1)जी की दुहाई देते हुए किसी भी सवाल की जानकारी देने से मना कर दिया।

धारा 30 में उधार लेने पर शर्तें

एक सवाल में धारा 30 के जवाब में बताया गया कि इस प्रश्न का उत्तर गूगल साइट पर उपलब्ध है। इस धारा में मंदिर के लिए और उसकी ओर से काेई भी उधार बिना राज्य सरकार की सहमति से नहीं लिया-दिया जाएगा। ज्ञात हाे कि RTI कार्यकर्ता डॉ. रविंद्र सहाय कैलाशी एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इन्होंने 2018 में सरस्वती फाटक के पास 150 साल पुराने पीपल का पेड़ अवैध रूप से मंदिर प्रशासन के द्वारा काटे जाने पर धरना दिया गया था। हाईकोर्ट और राज्य सूचना आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लिया था।

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