13 दिसंबर को PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट का लोकार्पण:काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं के लिए खास सुविधाएं, सुविधा केंद्र और योग केंद्र से लेकर फूड कोर्ट तक

वाराणसी5 महीने पहले
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श्रीकाशी विश्वनाथ धाम इस तरह से बनाया गया है कि यहां से लौट कर जब श्रद्धालु जाएं तो इसका बखान किए बगैर न रह पाएं। 800 करोड़ रुपए से ज्यादा के इस प्रोजेक्ट में श्रद्धालुओं की सहूलियतों का विशेष ध्यान रखा गया है। - Dainik Bhaskar
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम इस तरह से बनाया गया है कि यहां से लौट कर जब श्रद्धालु जाएं तो इसका बखान किए बगैर न रह पाएं। 800 करोड़ रुपए से ज्यादा के इस प्रोजेक्ट में श्रद्धालुओं की सहूलियतों का विशेष ध्यान रखा गया है।

उत्तर भारतीय स्थापत्य कला की नागर शैली में बना वाराणसी स्थित श्रीकाशी विश्वनाथ धाम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सहूलियतों वाला होगा। 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पित होने वाले उनके ड्रीम प्रोजेक्ट विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं के लिए यात्री सुविधा केंद्र बनाए गए हैं। इसके साथ ही म्यूजियम, स्प्रिचुअल बुक सेंटर, आभासी म्यूजियम, गंगा व्यू गैलरी, धरोहर केंद्र, फूड कोर्ट, वैदिक केंद्र, सांस्कृतिक केंद्र, भोगशाला, ओडीओपी प्रोडॅक्ट शॉप और मुमुक्षु भवन के लिए सुरक्षा संबंधी इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल रूम बनाया गया है।

सबसे बड़ी बात यह है कि मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव लगभग ना के बराबर होगा। इसके चलते पवित्र सावन मास के साथ ही प्रत्येक सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन-पूजन और सुकून के साथ कुछ समय बिताने का अवसर मिल सकेगा। वहीं, श्रद्धालु अब सीधे गंगा स्नान करने के बाद बाबा दरबार में मत्था टेकने आ सकेंगे।

जानें क्या सुविधाएं मिलेंगी विश्वनाथ धाम में...।

विश्वनाथ धाम का क्षेत्रफल पहले लगभग 3500 वर्ग फीट था। अब इसका क्षेत्रफल 5 लाख वर्ग फीट से ज्यादा है। मंदिर चौक में हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकसाथ खड़े हो सकते हैं। इसके चलते सावन मास में श्रद्धालुओं की कतारें गोदौलिया और मैदागिन तक नहीं लगेंगी।
विश्वनाथ धाम का क्षेत्रफल पहले लगभग 3500 वर्ग फीट था। अब इसका क्षेत्रफल 5 लाख वर्ग फीट से ज्यादा है। मंदिर चौक में हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकसाथ खड़े हो सकते हैं। इसके चलते सावन मास में श्रद्धालुओं की कतारें गोदौलिया और मैदागिन तक नहीं लगेंगी।
धाम में बनाई गई भोगशाला में बैठकर अब श्रद्धालु बाबा का प्रसाद भी ग्रहण कर सकेंगे। बाबा धाम में एक बार में 150 से अधिक श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की व्यवस्था भोगशाला में बनाई गई है।
धाम में बनाई गई भोगशाला में बैठकर अब श्रद्धालु बाबा का प्रसाद भी ग्रहण कर सकेंगे। बाबा धाम में एक बार में 150 से अधिक श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की व्यवस्था भोगशाला में बनाई गई है।
धाम में योग और ध्यान केंद्र के रूप में वैदिक केंद्र बनाया गया है। इसके अलावा धाम परिसर में ही श्रद्धालुओं को विभिन्न धार्मिक पुस्तकें भी आसानी से मिल सकेंगी। इसके अलावा काशी के कलाकारों और कला प्रेमियों को देखते हुए यहां 2 मंजिला इमारत सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बनाई गई है। बनारस गैलरी और आभासी म्यूजियम भी धाम परिसर में बनाया गया है।
धाम में योग और ध्यान केंद्र के रूप में वैदिक केंद्र बनाया गया है। इसके अलावा धाम परिसर में ही श्रद्धालुओं को विभिन्न धार्मिक पुस्तकें भी आसानी से मिल सकेंगी। इसके अलावा काशी के कलाकारों और कला प्रेमियों को देखते हुए यहां 2 मंजिला इमारत सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बनाई गई है। बनारस गैलरी और आभासी म्यूजियम भी धाम परिसर में बनाया गया है।
बालेश्वर, मकराना, कोटा, ग्रेनाइट, चुनार, मैडोना स्टोन और मार्बल सहित 7 तरह के पत्थरों से बने विश्वनाथ धाम के गंगा छोर पर गेटवे ऑफ कॉरिडोर बनाया जा रहा है। जलासेन घाट, मणिकिर्णका और ललिता घाट की ओर से बाबा धाम में आने का सुगम रास्ता बनाया जा रहा है। जलासेन घाट पर भव्य गेट बनाया जा रहा है और यह आकर्षण का केंद्र होगा।
बालेश्वर, मकराना, कोटा, ग्रेनाइट, चुनार, मैडोना स्टोन और मार्बल सहित 7 तरह के पत्थरों से बने विश्वनाथ धाम के गंगा छोर पर गेटवे ऑफ कॉरिडोर बनाया जा रहा है। जलासेन घाट, मणिकिर्णका और ललिता घाट की ओर से बाबा धाम में आने का सुगम रास्ता बनाया जा रहा है। जलासेन घाट पर भव्य गेट बनाया जा रहा है और यह आकर्षण का केंद्र होगा।
काशी आनंद कानन के नाम से भी जानी जाती थी। इसे देखते हुए धाम में भगवान शिव को प्रिय रुद्राक्ष, पारिजात, अशोक और बेल जैसी विशिष्ट किस्मों के वृक्षों के साथ-साथ ही तरह-तरह के फूल भी लगाए जा रहे हैं। मंदिर परिसर से लेकर मंदिर चौक और गंगा तट तक ये पेड़ हरियाली फैलाएंगे और पूरे क्षेत्र में ऊर्जा भर देंगे।.
काशी आनंद कानन के नाम से भी जानी जाती थी। इसे देखते हुए धाम में भगवान शिव को प्रिय रुद्राक्ष, पारिजात, अशोक और बेल जैसी विशिष्ट किस्मों के वृक्षों के साथ-साथ ही तरह-तरह के फूल भी लगाए जा रहे हैं। मंदिर परिसर से लेकर मंदिर चौक और गंगा तट तक ये पेड़ हरियाली फैलाएंगे और पूरे क्षेत्र में ऊर्जा भर देंगे।.
काशी में कई लोग मोक्ष की कामना से आते हैं। इसे देखते हुए धाम परिसर में में मुमुक्षु भवन भी बनाया गया है। मुमुक्षु भवन से लगभग 100 गज की दूरी पर काशी के अति पवित्र क्षेत्र में स्थित महाश्मशान मणिकर्णिका है।
काशी में कई लोग मोक्ष की कामना से आते हैं। इसे देखते हुए धाम परिसर में में मुमुक्षु भवन भी बनाया गया है। मुमुक्षु भवन से लगभग 100 गज की दूरी पर काशी के अति पवित्र क्षेत्र में स्थित महाश्मशान मणिकर्णिका है।