महिलाएं खुद की पूजा नहीं सम्मान चाहती हैं:वाराणसी में सुप्रीम कोर्ट के जज बोले- महिला सशक्तिकरण का मुख्य आधार नारी शिक्षा

वाराणसीएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कार्यक्रम शुरू होने से पहले दीप प्रज्ज्वलित करते सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश। - Dainik Bhaskar
कार्यक्रम शुरू होने से पहले दीप प्रज्ज्वलित करते सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने शनिवार को वाराणसी में कहा, धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जहां नारी की पूजा होती है] देवता भी वहीं निवास करते हैं। लेकिन, आज की नारी अपनी पूजा नहीं चाहती है। बल्कि पुरुष के समान दर्जा दिए जाने और अपनी योग्यता के अनुसार समाज में अपना स्थान बनाने और सम्मान पाने का अधिकार चाहती है। महिला सशक्तिकरण का मुख्य आधार नारी शिक्षा ही है। इसके लिए समाज को निरंतर सामूहिक प्रयास करते रहना होगा।

15 लाख महिलाएं लाभान्वित हुईं

नदेसर स्थित एक होटल में विधिक जागरूकता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया गया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डीवाई चन्द्रचूड़ ने कहा कि जबसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण अस्तित्व में आया है तब से महिला जागरूकता में राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से अब तक जो कार्यक्रम आयोजित किए गए है उनसे लगभग 15 लाख महिलाएं लाभान्वित हुई हैं।

कार्यक्रम में मौजूद सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश।
कार्यक्रम में मौजूद सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश।

रेलवे स्टेशनों पर स्थापित किए गए कियॉस्क

उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने कहा कि आज का दिन महिला साक्षरता एवं सशक्तिकरण के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए। महिलाओं से संबंधित अनेक कानून अस्तित्व में हैं लेकिन उनके बारे में महिलाओं को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में रेलवे स्टेशनों पर कियॉस्क स्थापित किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से महिला अधिकारों और विधिक सहायता की जानकारी लाखों यात्रियों को प्रतिदिन प्रदान की जा रही है। शीघ्र ही वैवाहिक विवादों के समाधान के लिए प्रीलिटिगेशन स्तर पर विशेष लोक अदालतों का आयोजन किया जाएगा।

पढ़ी-लिखी महिलाओं का उत्पीड़न ज्यादा

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया कि हमारे देश में पढ़ी-लिखी महिलाओं का उत्पीड़न ज्यादा होता है। ऐसी महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति आवाज उठानी चाहिए। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी ने बताया कि विगत 10 जुलाई और 11 सितम्बर 2021 को आयोजित की गई लोक अदालतों में उत्तर प्रदेश के द्वारा अधिकतम वादों का निस्तारण करते हुये देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया गया है।

कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश कृष्ण मुरारी, विक्रम नाथ और उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायाधीश प्रितींकर दिवाकर, सुनीता अग्रवाल, केजे ठाकर व मंजू रानी चौहान, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव अशोक कुमार जैन, निदेशक पुनीत सहगल, अवर सचिव कमल सिंह, निदेशक जेटीआरआई आरएमएन मिश्रा, वाराणसी के जिला जज अनिल कुमार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कुमुदलता त्रिपाठी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अपर निदेशक जेटीआरआई राजीव महेश्वरम के द्वारा और धन्यवाद ज्ञापन न्यायाधीश प्रितींकर दिवाकर के द्वारा किया गया।

खबरें और भी हैं...