ज्ञानवापी मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा:कल से शुरू होने वाले सर्वे पर तुरंत रोक लगाने की मांग, कोर्ट ने कहा- पहले फाइलें देखेंगे

वाराणसी5 दिन पहले

वाराण्सी की ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शनिवार से शुरू होने वाले सर्वे पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसमें वाराणसी कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें पूरे परिसर का सर्वे और वीडियोग्राफी के आदेश दिए गए हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एनवी रमना ने इस याचिका पर कहा है कि वे पहले फाइलें देखेंगे। फिर फैसला लेंगे। उन्होंने इस मामले से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानवापी से जुड़ी यह याचिका सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने दायर की है। हुजेफा अहमदी ज्ञानवापी केस से नहीं जुड़े हैं। इससे पहले वह धारा-370, गौरी लंकेश, वन रैंक-वन पेंशन, लॉकडाउन और कश्मीर घाटी से जुड़ी समस्याओं पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं।

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ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने दैनिक भास्कर को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट गए हैं। मगर उनके आधिकारिक वकील का नाम फुजैल अहमद अयूबी है। वह याचिका दायर करने वाले हुजेफा अहमदी को नहीं जानते हैं।

अगले हफ्ते SC में हो सकती है सुनवाई
CJI की कोर्ट में एडवोकेट हुजेफा ने अपील की कि वाराणसी कोर्ट के फैसले पर शुक्रवार से कार्रवाई शुरू हो जाएगी इसलिए मामले को तत्काल सुना जाए। कम से कम मामले पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी कर दिया जाए। इसके बाद CJI रमन्ना ने कहा कि अभी हमने पेपर नहीं देखे हैं। बिना पेपर देखे कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगले हफ्ते से सुनवाई कर सकता है।

यह फोटो ज्ञानवापी के बाहर की शुक्रवार की है। जुमा होने के चलते यहां मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ने पहुंचे हैं।
यह फोटो ज्ञानवापी के बाहर की शुक्रवार की है। जुमा होने के चलते यहां मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ने पहुंचे हैं।

पीस पार्टी भी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में
उधर, पीस पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने भी कहा है कि हम ज्ञानवापी मस्जिद जैसे मसलों पर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व षड्यंत्र रच के ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा जैसे मुद्दों के जरिए नफरत फैला रहे हैं। देश को नुकसान पहुंचाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है, उसके खिलाफ पीस पार्टी सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ेगी।

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ताला खुलवाकर या तुड़वाकर सर्वे करें: वाराणसी कोर्ट
इससे पहले गुरुवार को ज्ञानवापी परिसर मामले में वाराणसी कोर्ट ने फैसला सुनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि तहखाने से लेकर परिसर के चप्पे-चप्पे का सर्वे किया जाए। जहां ताला लगा है, वहां खुलवाकर या तुड़वाकर वीडियोग्राफी और सर्वे कराया जाए। सर्वे का काम सुबह 8 से 12 बजे तक किया जाए। कोर्ट में इस मामले की अगली कार्रवाई 17 मई को रखी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि तब तक एडवोकेट कमिश्नर अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे।

यह फोटो गुरुवार की है। ज्ञानवापी पर कोर्ट के फैसले के दौरान यहां तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।
यह फोटो गुरुवार की है। ज्ञानवापी पर कोर्ट के फैसले के दौरान यहां तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।

इस केस में कब क्या हुआ?
6 मई:
अदालत के आदेश पर नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्र ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को लेकर 6 मई से ज्ञानवापी का सर्वे कराना शुरू किया। इस दिन केवल शृंगार गौरी के विग्रह और दीवारों की वीडियोग्राफी ही हो पाई। पहले दिन बड़ी संख्या में मुसलमान मस्जिद में नमाज को आए और सर्वे को लेकर बवाल और नारेबाजी हुई थी। मुस्लिम पक्ष का आरोप था कि एडवोकेट कमिश्नर वादी पक्ष की तरह पार्टी बनकर सर्वे कर रहे हैं।

7 मई: दोपहर में सर्वे का काम दोबारा शुरू हुआ। वादी पक्ष ने आरोप लगाया कि 500 से ज्यादा मुस्लिम मस्जिद के अंदर ही हैं और सर्वे के लिए प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं। न ही प्रशासन कोई सहयोग दे रहा। विवाद के बाद सर्वे रुक गया और मामला फिर से कोर्ट में चला गया।

9 मई: अदालत में सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने कहा कि एडवोकेट कमिश्नर अपना काम सही से कर रहे हैं। सर्वे में अड़ंगा डालने के लिए उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। ज्ञानवापी के अंदर वीडियोग्राफी और सत्यापन की अनुमति दे दी जाए।

10 मई: अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच डेढ़ घंटे तक बहस हुई थी। इस दौरान वकीलों ने एडवोकेट कमिश्नर के बदले जाने और ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे पर दलील पेश की। मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने तैयारी के साथ कुछ और तथ्य देने के लिए 11 मई तक का समय मांगा था। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 12 मई की तारीख तय कर दी। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ने पर जज स्वयं मौके पर जाएंगे।

पिछले साल कोर्ट में दायर हुआ केस
राखी सिंह सहित पांच महिलाओं ने वाराणसी की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अगस्त 2021 में एक मुकदमा दाखिल किया। अदालत से मांग की थी कि मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति मिले। इसके साथ ही ज्ञानवापी परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं के सुरक्षा की भी बात अदालत के सामने उठाई गई। इस मसले पर आठ महीने तक सुनवाई और दलीलें चलतीं रहीं, अब अप्रैल से यह मामला निष्कर्ष की तरफ बढ़ा है।

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