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श्रीमहंत की हत्या या आत्महत्या:प्रयागराज में नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में मौत, 5 सवालों के जवाब किसी के पास नहीं; हैंडराइटिंग एक्सपर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आएगा सच

वाराणसीएक वर्ष पहले
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प्रयागराज में संदिग्ध हाल में फंदे से लटके मिले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की हत्या हुई या उन्होंने आत्महत्या की, इसे लेकर राज बरकरार है। श्रीमहंत की मौत से जुड़े 5 सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब अब तक किसी के पास नहीं है। पुलिस और प्रशासन भी अभी सुनी-सुनाई बातों को ही बता रहे हैं। प्रयागराज की पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम फिलहाल किसी ठोस नतीजे पर नहीं है।

प्रयागराज, काशी, हरिद्वार और उज्जैन से लगायत देश भर के संत, महंत और पीठाधीश्वरों का दावा है कि श्रीमहंत एक जीवट शख्सियत थे। समाज का मार्गदर्शन करने वाला श्रीमहंत जैसा संन्यासी आत्महत्या किसी भी सूरत में नहीं कर सकता है। ऐसे में श्रीमहंत की मौत की गुत्थी सुलझाने में अब हैंडराइटिंग एक्सपर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अहम भूमिका होगी।

शिष्यों ने शव फंदे से नीचे क्यों उतारा

श्रीमहंत के शिष्यों के अनुसार प्रयागराज के अल्लापुर स्थित श्री मठ बाघम्बरी गद्दी के उनके कमरे का दरवाजा बंद था। शिष्य कमरे का दरवाजा तोड़ कर घुसे और पुलिस के आए बगैर ही श्रीमहंत का शव फंदे से नीचे उतार दिए गए। इस तरह से घटनास्थल और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई। ऐसा क्यों किया गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

दोपहर में बिल्कुल सामान्य प्रतीत हो रहे थे

श्रीमहंत के साथ सोमवार की दोपहर भोजन करने वाले शिष्यों के अनुसार वह बेहद ही सामान्य प्रतीत हो रहे थे। किसी तरह की उलझन उनके चेहरे पर नहीं दिखाई दे रही थी। ऐसे में चंद घंटों में महंत के साथ आखिरकार क्या हो गया कि उन्हें आत्मघाती निर्णय लेने के लिए बाध्य होना पड़ा। गौरतलब है कि श्रीमहंत बेबाकी से अपनी राय रखने के साथ ही कड़े निर्णय लेने में भी हिचकते नहीं है। ऐसा संन्यासी अचानक अवसादग्रस्त होकर जान नहीं हो सकता है।

श्रीमहंत बमुश्किल लिख-पढ़ पाते थे

अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के महासचिव स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती का दावा है कि श्रीमहंत बमुश्किल अपना हस्ताक्षर कर पाते थे। इतना लंबा-चौड़ा सुसाइड नोट लिखने में उन्हें वर्षों लग जाते। श्रीमहंत के शिष्य आनंद गिरि का भी यही दावा है कि उनके गुरु को लिखने-पढ़ने में शिष्यों की मदद लेनी पड़ती थी। ऐसे में सुसाइड नोट आखिरकार किसने लिखा।

हादसे और आशीष की मौत से तो कड़ी जुड़ी नहीं

श्रीमहंत बीती जुलाई महीने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ जा रहे थे। सुल्तानपुर-लखनऊ हाइवे पर उनकी कार हादसे का शिकार हो गई थी। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के साथ कार में अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि भी सवार थे। यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि श्रीमहंत की कार के साथ हादसा कैसे हुआ था। इससे पहले नवंबर 2019 में निरंजनी अखाड़े के सचिव रहे आशीष गिरि की संदिग्ध हालात में हो गई थी। सड़क हादसा और आशीष गिरि की मौत की कड़ी कहीं श्रीमहंत की मौत से जुड़ी तो नहीं है, इस सवाल का जवाब पुलिस ने ढ़ूढने का प्रयास नहीं किया।

आनंद गिरि के सवालों की जांच क्यों नहीं

श्रीमहंत के शिष्य आनंद गिरि ने सोमवार को हिरासत में लिए जाने के दौरान कहा कि प्रयागराज के आईजी रेंज से उनके गुरु की नजदीकियां थी। सिपाही अजय सिंह भी श्रीमहंत की कृपा की बदौलत ही मालामाल हुआ। मनीष शुक्ला को श्रीमहंत ने 5 करोड़ रुपए का मकान दिया था। अभिषेक शुक्ला पर भी श्रीमहंत की अपरंपार कृपा रहती थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पुलिस आनंद गिरि की बातों को भी आधार मान कर जांच क्यों नहीं कर रही है।

हमें पूरा विश्वास है कि सच सामने आएगा

अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि हमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा है। पूरी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस प्रकरण में पुलिस और इंटेलिजेंस की बड़ी एजेंसियों को शामिल कर सब कुछ स्पष्ट कराएंगे। सनातन धर्म से जुड़ी एक बड़ी संस्था के प्रमुख की संदिग्ध हाल में हुई मौत का सच सभी जानना चाहते हैं।

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