वाह री पुलिस...गैंगरेप का आरोपी दरोगा गिरफ्तार:डेढ़ साल से राजनीतिक दबाव के चलते बचता रहा; वाराणसी से इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग के लिए सीतापुर गया था, भेजा गया जेल

वाराणसीएक महीने पहले
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लाल घेरे में दरोगा उमराव खान। यह फोटो 30 अक्टूबर 2017 की वाराणसी की दीवानी कचहरी की है। उस दिन उमराव की अधिवक्ताओं ने पिटाई कर वर्दी फाड़ दी थी। - Dainik Bhaskar
लाल घेरे में दरोगा उमराव खान। यह फोटो 30 अक्टूबर 2017 की वाराणसी की दीवानी कचहरी की है। उस दिन उमराव की अधिवक्ताओं ने पिटाई कर वर्दी फाड़ दी थी।

वाराणसी में गैंगरेप के आरोप में डेढ़ साल से आरोपी दरोगा उमराव खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। भेलूपुर थाने की पुलिस ने उसे सीतापुर स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से पकड़ा है। दरोगा उमराव इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग करने के लिए सीतापुर गया हुआ था। बुधवार को उमराव को वाराणसी की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

फरवरी 2020 में दर्ज हुआ था मुकदमा

दरअसल, भेलूपुर थाना के बजरडीहा क्षेत्र की एक महिला के साथ 2017 में गैंगरेप हुआ था। आरोपियों ने 4 बच्चों की मां को नशीला पदार्थ खिलाकर गैंगरेप किया था और उसका वीडियो भी बना लिया था। इसके बाद एक युवक ने वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कर दिया था। पीड़िता के पास जब वह वीडियो पहुंचा तो वह 3 फरवरी 2020 को भेलूपुर थाने की पुलिस से संपर्क की।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि भेलूपुर थाने की बजरडीहा चौकी पर तैनात दरोगा उमराव खान, बजरडीहा निवासी इब्राहिम, हाजी मैनुद्दीन और एक अन्य ने उसके साथ रेप किया था।

बजरडीहा के कोल्हुआ निवासी मो. शाहिद पर पीड़िता ने गैंगरेप का वीडियो वायरल करने का आरोप लगाया था। अन्य आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए थे, लेकिन दरोगा की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। कारण कि उसका तबादला वाराणसी से दूसरी जगह हो गया था। इसके साथ ही पुलिस का रसूख भी उसके साथ था।

कानून सबके लिए बराबर है

पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश ने बताया कि आरोपी दरोगा मुकदमे में आरोपी था। भेलूपुर थाने की पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है और अदालत में पेश करेगी। मुकदमा चाहे पुलिसकर्मी पर हों या आम आदमी के खिलाफ हों, कानून सभी के लिए बराबर है।

2017 में उमराव की कचहरी में हुई थी पिटाई

दरोगा उमराव खान पहले भी वाराणसी में चर्चित रहा है। 30 अक्टूबर 2017 को दरोगा उमराव एक मुकदमे की पैरवी के लिए कचहरी गया था। उस दौरान पहले के एक विवाद को लेकर एक अधिवक्ता दरोगा से उलझ गए थे। इसके बाद अधिवक्ताओं ने दरोगा उमराव की बुरी तरह से पिटाई की थी। तब किसी तरह से उसने अदालत के कमरे में छुप कर अपनी जान बचाई थी।

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