वाराणसी में चाइल्डलाइन टीम ने बालिका वधू बनने से बचाया:नाबालिग किशोर-किशोरी का होने जा रहा था निकाह, और पहुंच गई पुलिस

वाराणसी8 महीने पहले
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नाबालिग किशोर-किशोरी का निकाह रुकवाया गया और उनके मां-बाप को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। - Dainik Bhaskar
नाबालिग किशोर-किशोरी का निकाह रुकवाया गया और उनके मां-बाप को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

वाराणसी के बजरडीहा क्षेत्र में एक किशोरी को बालिका वधू बनने से चाइल्डलाइन की टीम ने बचाया। चाइल्ड लाइन के हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना मिली कि बजरडीहा में नाबालिग का बाल विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही चाइल्ड लाइन के निदेशक मजू मैथ्यू ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी निरूपमा सिंह से संपर्क किया। टीम जब पुलिस के साथ वहां पहुंची तब वहां निकाह चल रहा था। मेहमान दावत खा रहे थे। पुलिस टीम को साथ देख वहां भगदड़ मच गई।

भराया गया बांड

पुलिस किशोरी और उसके होने वाले शौहर के परिजनों को बजरडीहा पुलिस चौकी लाकर पूछताछ की तो पता चला कि किशोरी नाबालिग है। इसके साथ ही निकाह रोक दिया गया। किशोरी को बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत किया गया। समिति की अध्यक्ष स्नेहा उपाध्याय, सदस्य अखिलेश मौर्या व किशोर चंद्र समक्ष दोनों पक्षों ने निकाह रोकने का लिखित बांड भरा। इसके बाद उनको बच्ची को घर ले जाने की अनुमति दे दी गई।
एक लाख का लग सकता है जुर्माना
किसी भी लड़के का विवाह 21 साल और लड़की का 18 साल के होने के बाद ही किया जा सकता है। यदि कोई भी व्यक्ति इस उम्र से कम उम्र के होने से पहले शादी करता है तो उसे बाल विवाह करार दिया जायेगा। भले ही वह सहमति से ही क्यों न किया गया हो। सहमति से किया गया बाल विवाह भी कानूनी रूप से वैध नहीं होता। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम -2006 के अंतर्गत बाल विवाह होने पर दो वर्ष की सजा अथवा 1 लाख का जुर्माना अथवा दोनों का प्राविधान है।
चार माह में चौथा मामला
3 दिन पहले भी वाराणसी के इसी क्षेत्र में पुलिस की मदद से बाल विवाह रोका गया था। 4 माह के अंदर चाइल्ड लाइन ने यह चौथा बाल विवाह रोकवाया है। नेशनल फैमिली हेल्थ के सर्वे में वाराणसी में 100 में से 15 लड़कियों की शादी कम उम्र में होने का खुलासा हुआ है।

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