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गजब है... चंदौली का ये चावल:इसे खाने से शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ता नहीं, बल्कि कंट्रोल होता है, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों में हो रहा सप्लाई; PM मोदी भी तारीफ कर चुके

चंदौली5 महीने पहले
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खाने में चावल का नाम सुनते ही सेहत के प्रति सचेत लोगों को मोटापा और शुगर बढ़ने का खतरा सताने लगता है। लेकिन चंदौली के शुगर फ्री ब्लैक राइस को अब ऐसे लोग भी बड़े चाव से खा सकते हैं। इससे सेहत बिगड़ती नहीं बल्कि बनती है। विशेष औषधीय गुणों से लबरेज इस चावल की लगातार डिमांड बढ़ रही है। मौजूदा समय में एशिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में इसकी सप्लाई हो रही है। वहीं, यूपी के 14 जिलों में भी इसके उत्पादन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश के चंदौली ने अपनी एक नई पहचान बना ली है। शुगर फ्री ब्लैक राइस की वजह से चंदौली को एक बार फिर धान का कटोरा कहा जाने लगा है। 2018 में पहले कुछ गिने-चुने किसानों ने इसकी खेती की लेकिन 2020 तक जनपद में बड़े पैमाने पर किसान इसकी खेती से जुड़ गए और लाभ कमा रहे हैं। चंदौली से बीज लेकर यूपी के 14 जनपदों में अब इसकी खेती हो रही है।

चंदौली के डीएम संजीव सिंह ने बताया कि जनपद में शुगर फ्री ब्लैक राइस के निर्यात से किसानों की आय में वृद्धि को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री ने सराहा है। वहीं, यूएनडीपी ने भी शुगर फ्री ब्लैक राइस की खेती को लेकर चंदौली के किसानों की तारीफ की है।

चंदौली के शुगर फ्री ब्लैक राइस को देश-विदेश से लोग देखने आ रहे हैं। विशेष खूबियों को देखते हुए उत्पादन प्रक्रिया को अब बाकी जिले में भी अपनाया जा रहा है।
चंदौली के शुगर फ्री ब्लैक राइस को देश-विदेश से लोग देखने आ रहे हैं। विशेष खूबियों को देखते हुए उत्पादन प्रक्रिया को अब बाकी जिले में भी अपनाया जा रहा है।

यूएनडीपी की रैंकिंग में दूसरा स्थान
शुगर फ्री ब्लैक राइस के कारण जनपद चंदौली पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) ने आकांक्षात्मक जनपदों में नीति आयोग के विभिन्न पैरामीटर्स पर 2018 से 2020 तक विभिन आयामों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते जनपद चंदौली को शीर्ष द्वितीय स्थान दिया है।

ऐसे हुई चंदौली में ब्लैक राइस की शुरुआत

  • मणिपुर राज्य से 2018 में तत्कालीन डीएम नवनीत सिंह चहल ने अपने प्रयास से शुगर फ्री ब्लैक राइस का सैंपल बीज मंगाया।
  • जनपद के महज 30 किसानों से शुगर फ्री ब्लैक राइस की खेती कृषि विभाग के माध्यम से कराई।
  • 2019 में जनपद में एक हजार से अधिक किसानों ने शुगर फ्री ब्लैक राइस का उत्पादन किया।
  • अन्य चावल की किस्म के उत्पादन से शुगर फ्री ब्लैक उत्पादन में किसानों की लागत भी कम आई।

ऐसे मिली इंटरनेशनल ख्याति
2018 में पहली बार उत्पादन किए जा रहे शुगर फ्री ब्लैक राइस को जानने और समझने के लिए इंटरनेशनल राइस रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों की टीम को भी तत्कालीन डीएम नवनीत सिंह चहल ने बुलाया, ताकि इस चावल के औषधीय गुणों के बारे में और जानकारी इकट्ठी की जाए और इसे पेटेंट कराकर वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट के तहत चंदौली जिले को देश विदेश में स्थापित किया जा सके। खेतों में शुगर फ्री ब्लैक राइस तैयार होने के बाद डीएम के निवेदन पर इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट की वाराणसी हेड और फिलीपींस की डॉक्टर अहमद जरीना के नेतृत्व में एक टीम ने सदर तहसील के डिघवट गांव का दौरा किया और खेतों में खड़ी शुगर फिर ब्लैक राइस का निरीक्षण किया और उत्पादन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

पीएम ने चुनाव के दौरान किया था जिक्र
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान चंदौली के धानापुर में चुनावी सभा के दौरान पीएम मोदी ने शुगर फ्री ब्लैक राइस की तारीफ़ की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि चंदौली सहित पूर्वांचल का ये क्षेत्र धान के लिए मशहूर है, यहां के शुगर फ्री चावल की बड़ी चर्चा रही है।

शुगर फ्री ब्लैक राइस के फायदे

  • शुगर फ्री ब्लैक राइस लगभग अठारह सौ रुपए किलो मार्केट में बेचा जा सकता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, अर्थराइटिस एलर्जी के साथ कैंसर जैसे रोगों में लड़ने में सहायक है।
  • विशेष औषधीय गुण होने के कारण इस चावल का रंग काला होता है।
  • इस चावल में जिंक और आयरन की मात्रा काफी पाई जाती है, जो मानव शरीर के लिए काफी जरूरी है।
  • न्यूट्रीशन वॉल्यूम से भरपूर है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट प्रोटीन जींस फाइबर और आयरन प्रचुर मात्रा में है।
  • यह डायबिटीज जैसी बीमारियों से लड़ने में बहुत सहायक है।
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