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88 घाटों को पार कर शहर में पहुंची गंगा:काशी के हजारों मंदिर जलमग्न; प्रयागराज में केशव मौर्य ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया

वाराणसी5 महीने पहले

पहाड़ों पर हो रही बारिश से यूपी में गंगा-यमुना नदी उफान पर हैं। इसी बीच डिप्टी सीएम केशव मौर्य मंगलवार को प्रयागराज पहुंचे। वहां छोटा बघाड़ा में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 4 बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री बांटी। डिप्टी सीएम के साथ सांसद केशरी देवी पटेल, डीएम संजय कुमार खत्री, एडीएम जगदंबा प्रसाद, शहर उत्तरी के विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी मौजूद थे।

यह फोटो डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने नाव पर बैठकर छोटा बघाड़ा में बाढ़ का जायजा लिया। उन्होंने परिवारों को राहत सामग्री भी बांटी।
यह फोटो डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने नाव पर बैठकर छोटा बघाड़ा में बाढ़ का जायजा लिया। उन्होंने परिवारों को राहत सामग्री भी बांटी।

हमीरपुर में स्वतंत्र देव सिंह ने हेलिकॉप्टर से बाढ़ का जायजा लिया

वहीं हमीरपुर में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने अस्थाई बाढ़ राहत केंद्र में पहुंचकर बाढ़ प्रभावित लोगों का हाल जाना। इसके अलावा उन्होंने राहत सामग्री भी बांटी।

हमीरपुर में बाढ़ का जायजा लेते जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह।
हमीरपुर में बाढ़ का जायजा लेते जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह।

अब आइए आपको वाराणसी और प्रयागराज में बाढ़ का हाल बताते हैं...
वाराणसी में गंगा का पानी 88 घाटों को पार कर शहर में घुस गया है। इससे लोग डरे हुए हैं। गंगा मणिकर्णिका घाट होते हुए विश्वनाथ कॉरिडोर तक पहुंच गई है। गंगा बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह से 100 मीटर दूर है। श्रद्धालुओं को गंगा में स्नान से रोका जा रहा है।

ये वीडियो प्रयागराज की है। ड्रोन से लिए गए वीडियो में हम आपको शहर में बाढ़ का हाल दिखा रहे हैं।
ये वीडियो प्रयागराज की है। ड्रोन से लिए गए वीडियो में हम आपको शहर में बाढ़ का हाल दिखा रहे हैं।

वाराणसी में बाढ़ से 2 लाख लोग प्रभावित
वाराणसी में वरुणा और गंगा की बाढ़ से 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। वाराणसी का पंचतीर्थ भी अब गंगा में डूब चुका है। गंगा के 88 घाटों में से पांच घाटों को सामूहिक रूप से 'पंचतीर्थ' कहा जाता है। ये हैं अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, आदिकेशव घाट, पंचगंगा घाट और मणिकर्णिका घाट। अस्सी का प्राचीन शिव मंदिर भगवान अस्‍सींगमेश्‍वारा और जगन्नाथ मंदिर तक गंगा पहुंच गई है। राहत की बात यह है कि प्रयागराज में गंगा का जलस्तर अब स्थिरता की ओर है।

यह तस्वीर वाराणसी की है। मंगलवार सुबह से ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में NDRF की टीम ने मोर्चा संभाला हुआ है।
यह तस्वीर वाराणसी की है। मंगलवार सुबह से ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में NDRF की टीम ने मोर्चा संभाला हुआ है।

वाराणसी में गंगा किनारे वाले करीब 10 हजार से ज्यादा दुकानदार, नाविक और पुजारी बेरोजगार हो गए हैं। अब वाराणसी में गंगा का कोई किनारा नहीं बचा है, जहां बैठा जा सके। हर ओर जल सैलाब है। वाराणसी के सभी 85 घाट और वहां मौजूद हेरिटेज भवन गंगा में समा चुके हैं।

अस्सी घाट के आगे सड़क पर गंगा का पानी। लोगों को नाव से रेस्क्यू किया जा रहा है।
अस्सी घाट के आगे सड़क पर गंगा का पानी। लोगों को नाव से रेस्क्यू किया जा रहा है।

घाटों पर मौजूद हजारों छोटे-बड़े मंदिर, बिजली के पोल डूब चुके हैं। इसलिए यहां पर स्नान या तैराकी करने से चोटिल होने का डर बना रहता है। गंगा स्नान के बाद लोगों को टीका चंदन और पूजा कराने वाले पूजारी अब गंगा के थमने की विनती कर रहे हैं। गंगा के मंत्रों को जप रहे हैं। राजघाट, दशाश्वमेध घाट और अस्सी पर गंगा का पानी सड़क पर आ गया है। कई लोग तो सड़क पर ही गंगा स्नान कर रहे हैं।

मणिकर्णिका घाट पर सब कुछ गंगा में डूब चुका है, इसलिए मजबूरी वश लोगों को चिता के पास की रहना पड़ रहा है।
मणिकर्णिका घाट पर सब कुछ गंगा में डूब चुका है, इसलिए मजबूरी वश लोगों को चिता के पास की रहना पड़ रहा है।

काशी विश्वनाथ और गंगा में 100 मीटर का फासला
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, धाम के सभी भवन HFL (हाई फ्लड लेवल) से ऊपर बनाए गए हैं। अभी भी गंगा घाट पर बने प्रवेश द्वार से करीब दो मीटर नीचे ही गंगा का जलस्तर है। हालांकि सामान्य तौर पर गंगा मंदिर से 22 मीटर नीचे रहती है।

अब तक केवल रैंप और सीढ़ी पर ही बाढ़ का पानी पहुंचा हुआ है। वहीं 80 में से 50 सीढ़ियां डूब चुकी हैं। कहा जाता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर बनारस की पीक है। पूरा शहर डूबेगा उसके बाद ही मंदिर में पानी आएगा।

मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए बस यही छत बची है। शव दाह करने आए लोग धुआं और आग की आंच से परेशान रहे।
मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए बस यही छत बची है। शव दाह करने आए लोग धुआं और आग की आंच से परेशान रहे।

608.57 हेक्टेयर फसल और 28 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
वाराणसी के डीएम कौशल राज शर्मा ने बताया, ''बाढ़ से वाराणसी शहर के 20 वार्ड और 115 ग्राम सभा गंगा में पूरी तरह डूब गए हैं। वाराणसी में अभी तक 28499 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 608.57 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुआ है। जिले में 40 राहत शिविर चल रहे हैं। सोमवार को 688 परिवार के कुल 3645 लोग रूके। इसमें 1000 से ज्यादा बच्चे और 285 वृद्ध भी रहे।''

मणिकर्णिका घाट और श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर में गंगा का पानी।
मणिकर्णिका घाट और श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर में गंगा का पानी।

सामनेघाट की सड़कों पर गंगा का सैलाब, आवाजाही रोकी गई
गंगा तेजी से शहर की ओर बढ़ रही है। सामनेघाट से बढ़ते हुए महेशनगर कालोनी तक आ गई है। ट्रॉमा सेंटर से रामनगर जाने वाली सड़क पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वाराणसी में गंगा, वरुणा और अस्सी नाले में उफान है। बाढ़ आने से कई स्कूल और अस्पताल बंद कर दिए गए हैं।

बाढ़ प्रभावित स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास शुरू कर दिया है। वाराणसी में अस्सी-नगवां मार्ग पूरी तरह से बंद है। सामनेघाट-रामनगर सड़क पर कमर तक पानी भर गया है। सामनेघाट-मारुतिनगर सड़क पर गर्दन तक पानी भर गया है।

गंगा किनारे चदंन-टीका और पूजा कराने वाले अब गंगा से थमने की प्रार्थना कर रहे हैं।
गंगा किनारे चदंन-टीका और पूजा कराने वाले अब गंगा से थमने की प्रार्थना कर रहे हैं।

अब महीनों करना होगा इंतजार
गंगा में आई बाढ़ से वाराणसी के करीब डेढ़ हजार से ज्यादा नाविक और मल्लाह खाली बैठे हैं। घाटों पर पूजन-हवन, चुनरी, फूल-माला बेचने से लेकर पुजारियों और भिखारियों तक को खाने के लाले पड़ने लगे हैं। घाटों के किनारे के एक हजार से ज्यादा दुकानें गंगा में डूब चुकी हैं। गंगा किनारे घाट पर चाट बेचने वाले पप्पू कहते हैं कि अब गंगा का पानी नीचे उतरेगा उसके बाद भी महीनों साफ-सफाई कराना होगा। गाद और सिल्ट हटाने में कई सप्ताह गुजर जाते हैं।

प्रयागराज में स्थिर हुई गंगा-यमुना
प्रयागराज में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक गंगा और यमुना का जलस्तर अब स्थिर हो गया है। हालांकि 2013 में आई बाढ़ के अधिकतम बिंदु से महज एक मीटर कम पर गंगा और यमुना बह रही है। अगर फिर से पानी बढ़ना शुरू हुआ तो व्यापक पैमाने पर आबादी बाढ़ की चपेट में आ जाएगी। मंगलवार को गंगा और यमुना का जलस्तर 85.90 पर है।

यह तस्वीर प्रयागराज में मंगलवार सुबह की है। बाढ़ क्षेत्र छोटा बघाड़ा में नावों की मारा-मारी है।
यह तस्वीर प्रयागराज में मंगलवार सुबह की है। बाढ़ क्षेत्र छोटा बघाड़ा में नावों की मारा-मारी है।

2013 में आई बाढ़ में फाफामऊ में गंगा खतरे के निशान से दो मीटर से ऊपर 86.82 पर पहुंच गई थी। यमुना भी 86.6 मीटर तक पहुंच गई थी। लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर शरणार्थी शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी।

रायबरेली में बारिश में गिरा छप्पर, 7 साल के बच्चे की मौत

इसी छप्पर के नीचे दब कर अर्पित की मौत हो गई है। पलक गंभीर रूप से घायल हो गई।
इसी छप्पर के नीचे दब कर अर्पित की मौत हो गई है। पलक गंभीर रूप से घायल हो गई।

रायबरेली में सोमवार शाम बारिश की वजह से छप्पर गिर गया। जिससे सो रहे भाई-बहन दब गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मलबा हटाया। 7 साल के अर्पित 6 साल की पलक घायल हो गए। दोनों को जिला अस्पताल के लिए गए। जहां पर अर्पित की मौत हो गई। पालक की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया है।

अब बात मौसम के हाल की...

लखनऊ में हुई तेज बारिश
लखनऊ में मंगलवार दोपहर तेज बारिश हुई। करीब आधे घंटे तक हुई झमाझम बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया। 15 जिले में आज बारिश का रेड अलर्ट जारी है। मानसून के पीक माह में 50 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। लेकिन अगस्त महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है इस साल बारिश ने धोखा देने का काम किया है।

ये तस्वीर मंगलवार दोपहर एक बजे परिवर्तन चौक की है। आधे घंटे तक यहां झमाझम बारिश हुई।
ये तस्वीर मंगलवार दोपहर एक बजे परिवर्तन चौक की है। आधे घंटे तक यहां झमाझम बारिश हुई।

कई बार मौसम विभाग का अनुमान फेल हुआ है। किसानों को बीस दिन देरी से मानसून का पानी मिलना शुरु हुआ। इस साल मानसून शुरु होने से अब तक 44 प्रतिशत कम बारिश होने का आंकड़ा बना हुआ है। बीते 24 घंटे में 4.1 मिली मीटर बारिश हुई है।

अयोध्या समेत 15 जिले में रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी करते हुए मंगलवार को भारी बारिश होने का अनुमान लगाया है। जौनपुर, प्रतापगढ़, फतेहपुर, रायबरेली, उन्नाव, लखनऊ, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, सीतापुर, सोनभद्र, बाराबंकी , बहराइच, अम्बेडकर नगर, हरदोई और लखीमपुर खीरी में आज बारिश का अलर्ट है। यहां पर बिजली की गरज चमक के साथ 70 किलो मीटर प्रति घंटे के अनुमान से हवाएं भी चल सकती है।