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काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद केस में कोर्ट का फैसला:ASI की पांच सदस्यीय टीम करेगी पुरातात्विक जांच, सर्वेक्षण का खर्च उठाएगी राज्य सरकार

वाराणसीएक महीने पहले
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याचिकाकर्ता का दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण 2050 साल पहले महाराज विक्रमादित्य ने करवाया था, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब ने साल 1664 में मंदिर को नष्ट करा दिया था। - Dainik Bhaskar
याचिकाकर्ता का दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण 2050 साल पहले महाराज विक्रमादित्य ने करवाया था, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब ने साल 1664 में मंदिर को नष्ट करा दिया था।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में आज पुरातात्विक सर्वेक्षण पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी है। यह भी कहा है कि सर्वेक्षण का खर्च राज्य सरकार उठाएगी।

याचिकाकर्ता ने दावा था कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेषों से ही ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण हुआ था। साल 1991 से चल रहे इस विवाद में 2 अप्रैल को सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के सिविल जज आशुतोष तिवारी ने दोनों पक्षों की सर्वेक्षण के मुद्दे पर बहस के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। केंद्र के पुरातत्व विभाग के 5 लोगों की टीम बनाकर पूरे परिसर का अध्यन करने निर्देश दिया है। यह भी कहा है कि सर्वेक्षण का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। रस्तोगी ने कहा कि 1669 में मंदिर को तोड़ा था और फिर विवादित ढांचा खड़ा कर दिया गया था। बाकी सारे अवशेष वहां मौजूद हैं। इस ढांचे के नीचे शिवलिंग मौजूद है। कोर्ट से मांग की है कि पुरातात्विक विभाग उसका सर्वे करके खुदाई करे। कोर्ट ने हमारे पक्ष को स्वीकार कर लिया है। साथ ही आदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश सरकार और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया अपने खर्चे पर सर्वे कर रिपोर्ट पेश करे।

पक्षकार पंडित सोमनाथ व्यास ने की थी सर्वेक्षण की मांग

अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने साल 2019 में सिविल जज के अदालत में स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर काशी विश्वनाथ की ओर से 'वाद मित्र' के रूप में एक आवेदन दिया था, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि मस्जिद, ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर मंदिर का एक अंश है। जहां हिंदू आस्थावानों को पूजा-पाठ, दर्शन और मरम्मत का अधिकार है। कोर्ट से ये मांग स्वयंभू ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर के पक्षकार पंडित सोमनाथ व्यास ने किया था। पुरातात्विक सर्वेक्षण कराकर मुद्दे को हल किया जाए। याचिकाकर्ता का दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण 2050 साल पहले महाराज विक्रमादित्य ने करवाया था, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब ने साल 1664 में मंदिर को नष्ट करा दिया था।

अंजुमन इंतजामिया मस्जिद व अन्य हैं विपक्षी

पूरे मामले में वादी के तौर पर स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर काशी विश्वनाथ और दूसरा पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड हैं। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से अधिवक्ता मुमताज अहमद, रईस अहमद सेंट्रल वक्फ बोर्ड यूपी तौफीक खान और अभय यादव ने कोर्ट में बहस की थी।

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