वाराणसी, गोरखपुर और मणिपुर के लोगों का बनेगा हेल्थ डाटा:केंद्रीय मंत्री जितेंद्र प्रसाद शुक्रवार को BHU में करेंगे टेली मेडिसिन प्रोजेक्ट लांच; जानिए फायदे

वाराणसीएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
वाराणसी के जनसंपर्क विभाग में प्रेस-कांफ्रेंस के दौरान मौजूद विशेषज्ञ। - Dainik Bhaskar
वाराणसी के जनसंपर्क विभाग में प्रेस-कांफ्रेंस के दौरान मौजूद विशेषज्ञ।

जिस तरह से हर घर में आधार कार्ड बना है, ठीक उसी तर्ज पर अब पूर्वांचल के गांवों में रहने वाले लोगों को हेल्थ डेटा तैयार किया जाएगा। इस डेटा के आधार पर बीमार और गंभीर लोगों को चिह्नित कर उन्हें बेहतर इलाज देने की प्रक्रिया शुरू होगी। वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शुक्रवार को टेलीमेडिसिन परियोजना (प्लग एंड प्ले मॉडल) की शुरूआत होगी।

विज्ञान-प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इसे BHU के विज्ञान संस्थान स्थित सेमिनार कॉम्प्लेक्स में लांच करेंगे। उनके साथ UP में मंत्री रवींद्र जायसवाल और डॉ. नीलकंठ तिवारी भी होंगे। भारत सरकार की ऑटोनॉमस इकाई टाइफेक, इंफॉरमेशन, फॉरकास्टिंग एंड एसेसमेंट काउंसिल (TIFAC) ने इस टेलीमेडिसन परियोजना को तैयार किया है। यह एक टेली डिजिटल हेल्थ पायलट कार्यक्रम है।

BHU में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान TIFAC के कार्यकारी निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत वाराणसी, गोरखपुर और मणिपुर के कामजोंग में दूरस्थ इलाकों में रहने वाले 60 हजार लोगों का हेल्थ डाटा तैयार किया जाएगा। यह वैसी आबादी होगी, जो मेट्रोपॉलिटन सिटी से दूर रहती है और इन लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बहुत जरूरत होती है।

BHU में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए TIFAC के कार्यकारी निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीवास्तव।
BHU में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए TIFAC के कार्यकारी निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीवास्तव।

IIT मद्रास ने तैयार किया एप

IIT-मद्रास और C-DAC ने एक एप भी विकसित किया है, जिस पर हर व्यक्ति का हेल्थ डाटा होगा। वहीं, इसमें आउटरीच भागीदार के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, BHU और NIT मणिपुर शामिल हैं। गांव की महिलाओं और बच्चों को रियायती दर पर इलाज देने की भी व्यवस्था की जाएगी। निवासियों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए इस एडवांस टेली डाइग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग बढ़ाना होगा।

टाइफेक के साथ ही इस परियोजना में BHU हड्डी रोग से लेकर कई विभागों के डॉक्टर भी शामिल हाेंगे। इस प्रेस कांफ्रेंस में IIT- BHU के रिसर्च स्कॉलर दिवाकर समेत BHU के तमाम डॉक्टरों मौजूद रहे।

- महिलाओं और बच्चों का हेल्थ चेकअप - ई-संजीवनी क्लाउड के माध्यम से हेल्थ डेटा का एनालिसिस - EHR के लिए डाटा डॉक्टरों को बताना

इन चेकअप पर तैयार होगा हेल्थ डाटा
- इलेक्ट्रो कार्डियोग्राफिक जांच ( हृदय रोग परीक्षण )
- हार्टबीट मेजरमेंट
- ब्लड प्रेशर
- ब्लड ऑक्सीजेनेटेड
- लिपिड प्रोफाइल
- हीमोग्लोबिन लेवल
- मां-शिशु की देखभाल (फैटल ड्रॉपलर) आदि।